Wednesday, 29 June, 2022
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क्या ‘पद्मावत’ का विवाद इसके लिए बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी है?

उड़ता पंजाब जैसी कुछ विवादास्पद फिल्में यह दर्शाती हैं कि फिल्म रिलीज होने से पहले ये एक विवाद से ज्यादा और कुछ भी नहीं है.

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पिछले कुछ महीनों से संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म पद्मावत (जिसका नाम विवाद से पहले पद्मावती था) पर विवाद ने बहुत ज्यादा ही तूल पकड़ लिया है। जिसके चलते फिल्म पद्मावत के कलाकारों और संचालकों को लगातार धमकियां दी जा रही थीं और उन्हें इस सोच के हवाले छोड़ दिया गया था कि क्या यह फिल्म कभी दिन का उजाला देख पायेगी?

अब कहानी में नया पेंच यह फंसा है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (जिसे हम सेंसर बोर्ड कहते हैं) से इस फिल्म को मंजूरी प्राप्त हो गई है, उच्चतम न्यायालय ने प्रतिबंध को हटा दिया है, लेकिन फिर भी राज्यों ने इसकी रिलीज पर प्रतिबंध लगा रखा है.

जैसा कि कई पुरानी कहावतों में कहा गया है कि किसी भी चीज का प्रचार करने के लिए दुष्प्रचार से अच्छी कोई चीज नहीं है. इस फिल्म पर महीनों तक चले लंबे विवाद ने इसको बहुत ज्यादा प्रचारित किया और अब एकमात्र प्रश्न ही बाकी बचता है कि 25 जनवरी को रिलीज होने के बाद क्या यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन कर पायेगी या नहीं.

विवादों पर चर्चा

बॉलीवुड फिल्मों के किसी भी प्रचारक से आप पूछ लें तो आपको यही पता चलेगा कि एक फिल्म निर्माता का पहला सवाल यह होता है कि कैसे एक फिल्म के लिए सही प्रचार किया जाए जिससे लोगों को सही तरीके से फिल्म की तरफ आकर्षित किया जा सके.

बज्ज (Buzz) शब्द का अर्थ है, फिल्म के लिए लक्षित दर्शकों के बीच ‘जागरूकता’ और ‘देखने का इरादा’ पैदा करना. इसके लिए आमतौर पर एक निर्माता, विज्ञापन करने वाली पत्रिकाओं में विज्ञापन के लिए जगह खरीद लेते हैं, डिजिटल प्रचार का सहारा लेते हैं, फिल्म के स्टार अभिनेताओं द्वारा फिल्म की प्रमुखता के बारे में पूरे देश में साक्षात्कर के माध्यम से प्रचार करवाते हैं, टीवी पर विज्ञापन खरीदे जाते हैं और रेडियो पर भी प्रचार किया जाता है.

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इन सब चीजों पर खर्च होने वाला पैसा फिल्म के बजट का काफी बड़ा हिस्सा होता है.

हिंदी फिल्म उद्योग में कुछ ऐसी कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं जो फिल्म निर्माताओं को फिल्म रिलीज होने से पहले ही अनुमानित बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का आंकड़ा प्रदान करती हैं. ऑरमैक्स मीडिया ऐसी ही कंपनियों में से एक है, जिसने ऑरमैक्स सिनेमैटिक्स (ओसीएक्स) नाम का एक उत्पाद इजाद किया है. यदि कोई फिल्म ओसीएक्स की सेवाओं की सदस्यता लेती है तो यह उत्पाद बॉक्स ऑफिस पर उस फिल्म की शुरुआत के बारे में पूर्वानुमान और उसके बारे में लोगों की जागरूकता पर नजर रखता है.

मुख्य रूप से ओसीएक्स चार मापदंडों चर्चा, पहुंच, अपील और दिलचस्पी पर कार्य करता है. अनुभवी बॉलीवुड निर्माता कहते हैं कि यह दस में से छह बार सही साबित होता है. इसे फिल्म उद्योग में एक अच्छे औसत के रूप में माना जाता है. फिल्म का शुक्रवार के दिन रिलीज होना उसका लंबा चलना तय करता है और यह एक तथ्य है कि यदि फिल्म लंबे समय तक चलेगी तो पैसे भी कमाएगी.

विवाद के जैसा कोई प्रचार नहीं

अगर सीधे शब्दों में कहें तो विवाद चर्चाओं को पैदा करता है. हालांकि, पद्मावत के मामले में, उच्चतम न्यायालय द्वारा चार राज्यों में फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया गया है, पर इसके बावजूद भी, कट्टर संगठन राजपूत करणी सेना अपने आपे से बाहर चल रही है. उन्होंने फिल्म में राजपूतों को अपमानित करने का आरोप लगाया है और फिल्म से संबंधित कलाकारों को मौत की धमकी भी दी है. उनका कहना है कि वे इस फिल्म को किसी भी हाल में रिलीज नहीं होने देंगे. हर प्राइम टाइम टीवी शो पर फिल्म पद्मावत के बारे में बहस की गई है और इस खबर को ज्यादातर अखबारों के पहले पृष्ठ पर छापा गया है.

इस फिल्म को देखने के लिए निर्माता को किसी को भी समझाने की जरूरत नहीं है और न ही इस फिल्म के अभिनेताओं को फिल्म का प्रोमोशन करने की जरुरत है. क्योंकि लोग पद्मावत फिल्म देखना चाहते हैं.

यह फिल्म इतनी अधिक ‘चर्चा’ में है कि इस फिल्म की वजह से बॉलीवुड के मेगा स्टार अक्षय कुमार, जिनकी आने वाली फिल्म पेडमैन, जिसे पहले गणतंत्र दिवस को रिलीज करने का फैसला किया गया था, उसकी रिलीज डेट को अब आगे बढ़ा दिया गया है. यह जानते हुए भी कि इसके लिए उन्हें एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. यह पद्मावत के लिए एक बड़ा संकेत हो सकता है लेकिन यह व्यावहारिक भी था.

लेकिन क्या यह विवाद फिल्म की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है? अगर एक शब्द में बयां करें तो नहीं. जिसका पता इस फिल्म की रिलीज के पहले सप्ताह के अंत तक लग जाएगा कि जनता इस फिल्म को कितने नम्बर देती है लेकिन इन सब चीजों से परे इस फिल्म की विषय वस्तु है, जो सबसे खास है.

पद्मावत के लिए जो अच्छी बात है, वह यह है कि इस फिल्म के पक्ष में की गई चर्चाएं उतनी ही मजबूत हैं जितनी मजबूत चर्चाएँ इसके विरोध में हैं. इस फिल्म में काम करने वाले प्रमुख कलाकार काफी मजबूत हैं और जिसने भी इस फिल्म का ट्रेलर देखा है उसने इसे संजय लीला भंसाली का सबसे अच्छा काम बताया है.

इन विवादों ने फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर कैसे सफलता दिलाई है, इसके पीछे कई उदाहरण हैं. 2010 में, शाहरुख खान की फिल्म माइ नेम इज खान को शिवसेना के कारण कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा था, इसके बाद इसी अभिनेता द्वारा आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करने के बारे में किए गए ट्वीट पर भी शिवसेना द्वारा काफी बड़ा विवाद पैदा किया गया. शिवसेना ने मांग की, कि इस फिल्म को प्रतिबंधित किया जाए और इसके बाद जो विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, उसके परिणामस्वरूप इस फिल्म के रिलीज के पहले दिन टिकट की बिक्री पर काफी बुरा असर पड़ा. हालांकि, बाद में इस फिल्म को लोगों द्वारा बहुत अधिक पसन्द किया गया.

अभी हाल ही में 2016 में आई करन जौहर की एक फिल्म ऐ दिल है मुश्किल को फिल्म में एक पाकिस्तानी अभिनेता के होने के कारण राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा बहुत ही ज्यादा विवाद और गुस्से का सामना करना पड़ा. करन जौहर को देश के लिए अपना प्रेम साबित करने के लिए इन सभी को बाहर निकालना पड़ा था और इतना ही नहीं एक वीडियो के जरिए उन्होंने माफी भी माँगी थी जिसके कारण भी उनको बहुत लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. लेकिन विवाद होने के बाद भी लोगों ने फिल्म को देखा और फिल्म ने अच्छी कमाई भी की. तथ्य तो यह है कि विवाद की वजह से फिल्म ने औसत से ज्यादा कमाई की.

उसके बाद 2016 में उड़ता पंजाब फिल्म आयी, जो बॉलीवुड बनाम सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी के साथ विवादों में बदल गई. विवादों ने काफी हद तक लोगों को आकर्षित किया और व्यापार विश्लेषक इस फिल्म के लिए एक विशाल ओपनिंग का अनुमान लगा रहे थे, अन्यथा बिना विवाद के इसे, दी गई विषयवस्तु के आधार पर एक कमजोर शुरुआत वाली फिल्म के रूप में देखा जा रहा था. वास्तव में दर्शकों की संख्या के कम हो जाने का कारण, फिल्म के रिलीज होने से दो दिन पहले इसका लीक हो जाना था.

अप्रत्याशित बॉक्स ऑफिस

दर्शकों ने विवादों का आनंद लिया, लेकिन अंत में उन्हें फिल्म पसंद आयी। बॉक्स ऑफिस के विषेशज्ञ आपको बताएंगे कि बाजार के रुझान लगातार बदल रहे हैं. जिसके कारण कोई पूर्वानुमान लगाना कठिन है कि क्या फिल्म दर्शकों को पसंद आएगी.

हाँ, अंततः विषयवस्तु ने अपना प्रभाव डालना शुरू कर दिया है, लेकिन इस प्रवृत्ति को चित्रित करना जल्दबाजी भी हो सकता है. इसलिए कितनी भी विवादस्पद चर्चाएँ हो जाएँ, लेकिन अंत में थिएटरों में प्रवेश करने वाले दर्शक ही यह तय करेंगे कि फिल्म पद्मावत ‘पैसा वसूल’ है या नहीं.

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