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Wednesday, 4 February, 2026
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कश्मीर समस्या का हल क्या है?

पलायनवाद हमारा चिन्तन चरित्र बन चुका है. हम पेन किलर खा कर अपनी बीमारी छिपाने वाले राष्ट्र में तब्दील हो गए हैं. 1947 में कश्मीर समस्या फुंसी थी, नेहरू ने तब इसका इलाज करने की जगह धारा 370 का पेन किलर लेना ठीक समझा.

नरेंद्र मोदी ने किस मजबूरी में दलितों के पैर धोए?

आरएसएस एक ऐसी समाज व्यवस्था चाहता है जिसमें जातिभेद कायम रहे, लेकिन सभी जातियां समरसता के साथ रहें. इसी के तहत नरेंद्र मोदी दलितों के पांव धोए हैं. इससे जातियां कमजोर नहीं होंगी.

ऑपरेशन बालाकोट में ‘सूत्रों’ ने ही बनाया मीडिया का मज़ाक

सूत्रों ने अलग-अलग लोगों को इतनी अलग-अलग बातें बतायीं कि हमारा मीडिया कवरेज़ ही हास्यास्पद हो गया. सबने अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग अलापा.

तनाव कम करने के लिए तनाव बढ़ाना, पाकिस्तान के लिए भारत की नई चाल है

संभव है, बालाकोट हवाई हमले के बाद भी बारंबार होने वाले आतंकवादी हमले ना रुकें, लेकिन भारत ने कथानक को बदलने और यह दिखाने का विकल्प चुना कि वायुशक्ति से क्या कुछ संभव है.

पैरों की धुलाई नहीं चाहिए, सीवर में मरने वालों को मिले शहीद का दर्जा

सीवर में जान जाने का खतरा बॉर्डर से कम नहीं. देश के लिए सफाई का काम जरूरी भी है, वरना हर साल लाखों लोग बीमारी से मर जाएंगे. मोदी को सफाईकर्मियों के पैर धोने की जगह, उन्हें सम्मानजनक जिंदगी का हक देना चाहिए.

‘स्वर्ग के शिल्पियों’को ‘आर्यावर्त’ से धक्के देकर निकालने के मायने क्या हैं?

कश्मीरी हस्तशिल्प उत्पादों ने अपने आकर्षक डिजाइन, उपयोगिता और उच्च गुणवत्ता वाले शिल्प कौशल के लिए दुनियाभर में नाम कमाया है.

हवाई हमलों से भारत की पाकिस्तान समस्या दूर नहीं होगी

हवाई हमलों से न तो कश्मीर में भावी हमलों पर रोक लगने, न ही आगे और अधिक रोमांचक जवाबी कार्रवाई की आवश्यकता खत्म होने के आसार हैं.

बीजेपी ने तो अपना चुनावी मुद्दा चुन लिया, कांग्रेस क्या करेगी?

कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल कोशिश में हैं कि सरकार के पौने पांच साल के कामकाज को मसला बनाया जाए. वहीं मोदी ने सैन्य कार्रवाई और सैनिकों के मारे जाने से देश में उपजे गुस्से को मसला बना लिया है.

क्या महागठबंधन को मार गिराने वाला ब्रह्मास्त्र मोदी ने हासिल कर लिया है?

बात इमरान खान के हाथ में है- वे चाहें तो सीमा पर कायम तनाव के माहौल को जारी रखें और भारत में होने जा रहे आम चुनाव की थाली नरेन्द्र मोदी के हाथ में थमा दें.

शहादत दिवस: चंद्रशेखर ‘आजाद’ की ऐतिहासिक ‘माउजर’ व ‘कोल्ट’ पिस्तौलों का क्या हुआ?

अवध के किसी भी जिले के किसी भी हज्जाम के सैलून में चले जाइये, आपको वहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जैसे नायकों की तस्वीरें लगी मिल जायेंगी.

मत-विमत

STT में मामूली इजाफा हुआ है, जो भारत के जोखिम देखने के तरीके में बदलाव की ओर इशारा करता है

लंबे समय के निवेशकों और बड़ी बैलेंस शीट वाली इंस्टीट्यूशनल एंटिटीज़ के लिए, इसका असर बहुत कम होता है. इसका मुख्य बोझ हाई-फ्रीक्वेंसी रिटेल ट्रेडर्स पर पड़ता है.

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बलिया (उप्र), चार फरवरी (भाषा) बलिया जिले की एक अदालत ने 11 वर्षीय बच्चे की हत्या के 13 साल पुराने मामले में पिता-पुत्र को...

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