जिन दलित आंदोलनकारियों को 2 अप्रैल के भारत बंद की हिंसा में सामंती-संघी विचारधारा के समर्थकों के हाथों मार दिया गया उन मामलों में गिरफ्तारियां बाकी हैं.
सारागढ़ी और भीमा कोरेगांव में एकमात्र गौरवशाली बात सिख और महार सैनिकों का निजी शौर्य था, जिसका देशभक्ति से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन सरकार, इतिहासकारों, पुस्तक लेखकों और फिल्मकारों ने दोनों घटनाओं के साथ बिल्कुल अलग तरह का बर्ताव किया.
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी गुजरात में 26 में से 26 सीटें जीती थी. इसे दोहरा पाना उसके लिए काफी मुश्किल हो रहा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में दिख गया कि मोदी का जादू वहां उतार पर है.
भारतीय नौसेना हमेशा से भारत की राजनीतिक सीमाओं से परे, राष्ट्रीय कूटनीतिक और अन्य संपर्क प्रयासों को समर्थन देने में सबसे आगे रही है. अब आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने का समय आ गया है.
पुडुचेरी, 20 मार्च (भाषा) पुडुचेरी में सत्तारूढ़ ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) और भाजपा-अन्नाद्रमुक गठजोड़ ने विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे...