पलायनवाद हमारा चिन्तन चरित्र बन चुका है. हम पेन किलर खा कर अपनी बीमारी छिपाने वाले राष्ट्र में तब्दील हो गए हैं. 1947 में कश्मीर समस्या फुंसी थी, नेहरू ने तब इसका इलाज करने की जगह धारा 370 का पेन किलर लेना ठीक समझा.
आरएसएस एक ऐसी समाज व्यवस्था चाहता है जिसमें जातिभेद कायम रहे, लेकिन सभी जातियां समरसता के साथ रहें. इसी के तहत नरेंद्र मोदी दलितों के पांव धोए हैं. इससे जातियां कमजोर नहीं होंगी.
संभव है, बालाकोट हवाई हमले के बाद भी बारंबार होने वाले आतंकवादी हमले ना रुकें, लेकिन भारत ने कथानक को बदलने और यह दिखाने का विकल्प चुना कि वायुशक्ति से क्या कुछ संभव है.
सीवर में जान जाने का खतरा बॉर्डर से कम नहीं. देश के लिए सफाई का काम जरूरी भी है, वरना हर साल लाखों लोग बीमारी से मर जाएंगे. मोदी को सफाईकर्मियों के पैर धोने की जगह, उन्हें सम्मानजनक जिंदगी का हक देना चाहिए.
कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल कोशिश में हैं कि सरकार के पौने पांच साल के कामकाज को मसला बनाया जाए. वहीं मोदी ने सैन्य कार्रवाई और सैनिकों के मारे जाने से देश में उपजे गुस्से को मसला बना लिया है.
बात इमरान खान के हाथ में है- वे चाहें तो सीमा पर कायम तनाव के माहौल को जारी रखें और भारत में होने जा रहे आम चुनाव की थाली नरेन्द्र मोदी के हाथ में थमा दें.
अवध के किसी भी जिले के किसी भी हज्जाम के सैलून में चले जाइये, आपको वहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जैसे नायकों की तस्वीरें लगी मिल जायेंगी.
लंबे समय के निवेशकों और बड़ी बैलेंस शीट वाली इंस्टीट्यूशनल एंटिटीज़ के लिए, इसका असर बहुत कम होता है. इसका मुख्य बोझ हाई-फ्रीक्वेंसी रिटेल ट्रेडर्स पर पड़ता है.