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Tuesday, 24 February, 2026
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महाराष्ट्र में क्यों हाशिए पर हैं दलित पार्टियां

2019 लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में दो गठबंधन बने हैं मगर किसी ने भी किसी दलित पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया.

किसी युवा से ऊर्जावान हैं फ़ारूक़ अब्दुल्ला

दूसरे नेताओं में 80 वर्षीय मुलायम सिंह अपनी ही पार्टी में अलग-थलग हैं, वहीं 79 वर्षीय शरद पवार परिवार की अगली पीढ़ी के लिए चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके हैं.

क्या सचमुच तीन यादवों ने ही महिला आरक्षण बिल को रोक रखा था?

पहली बार महिला आरक्षण बिल आने के दो दशक से ज्यादा गुजरने के बावजूद आज भी इसे बाधित करने का आरोप सिर्फ तीन नेताओं- लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव पर लगता है.

ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हैं कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के लिए एक मंदिर तोड़ा गया

अयोध्या विवाद मंदिर नष्ट किए जाने और उसके अवशेष के सहारे मस्जिद तामीर किए जाने के समय से ही जारी है.

लोकसभा चुनाव में किस पर भरोसा करें आदिवासी?

जिन तबकों का सामाजिक संगठन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर है, उनकी तवज्जो चुनावी राजनीति में कम ही है. उनके हित भी सुरक्षित नहीं.

होली के त्योहार को बॉलीवुड ने सबसे ज्यादा दिया है भाव

अपने दौर का कोई भी बड़ा सितारा हो दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और रणवीर कपूर सबकी फिल्मों में होली का गाना जरूर रहा है.

नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्यों बेहतर उम्मीदवार साबित होंगे कन्हैया कुमार?

कन्हैया कुमार भूमिहार जाति के हैं, जिनकी बनारस में अच्छी संख्या है. वहां कभी कम्युनिस्टों का भी असर था. अपनी भाषण कला से कन्हैया बीजेपी की नाक में दम कर सकते हैं

दो घूंट पानी पीकर बाबा साहेब ने दी जातिवाद को सबसे बड़ी चुनौती

बाबा साहेब का उद्देश्य दलितों में उनके मानव अधिकारों के लिए जारूकता पैदा करना था. उन्होंने यह निश्चय किया कि हमारा अछूत समाज इस तालाब से पानी पीकर रहेगा.

राष्ट्र को कांशीराम का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिनके कारण बच गया लोकतंत्र

मान्यवर कांशीराम ने बामसेफ और बीएसपी ऐसे समय में बनाई जब वंचित जातियों का लोकतंत्र से मोहभंग हो रहा था. रिजर्व सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधि बेकार साबित हुए थे. तब उन्होंने वंचित जातियों को शासक बनने का सपना दिखाया.

प्रियंका गांधी ने गंगा यात्रा तो की, लेकिन पीएम मोदी को घेरने का मौका गंवा बैठीं

प्रियंका का कोई दूरदर्शी सलाहकार होता तो उन्हें कानपुर से वाराणसी की यात्रा करने की सलाह देता. इस बहाने वे गंगा सफाई के दावों की सच्चाईयों से रूबरू हो जातीं.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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राजनीति

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ओडिशा ने साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

भुवनेश्वर, 24 फरवरी (भाषा) ओडिशा सरकार ने मंगलवार को ‘इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन’ (आईएमएफ) और ‘एयरो क्लब ऑफ इंडिया’ (एसीआई) के साथ समझौता ज्ञापनों पर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.