मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी का आरक्षण दोगुना तो कर दिया है, लेकिन इसे लेकर पार्टी कोई उत्साह नहीं दिखा रही है. इससे सवर्ण वोटर कांग्रेस से नाराज हो जाएंगे.
वोट मांगने वाले छोटे बड़े नेता तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कोई ऐसा भी नेता देखा है जो वोट मांगने आये तो ढिठाई से एक भेली गुड़ की मांग भी कर बैठे?
यूपी में कांग्रेस के दलित मतदाता बसपा में शिफ्ट हो गए, मुसलमानों की पहली प्राथमिकता सपा और दूसरी बसपा हो गई. बचे सवर्ण, तो वो अब पूरी तरह से भाजपा में हैं.
कांग्रेस के सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने से सबसे बड़ा नुकसान ये है कि जो मतदाता सपा-बसपा छोड़कर इसकी ओर आना चाहता है, वह फिर से इन्हीं दलों में उलझकर रह जाएंगे. कांग्रेस के स्वतंत्र विकास में इससे अड़चन आएगी.
कांग्रेस की समस्या यह है कि सवर्ण और उसमें भी मुख्य रूप से ब्राह्मण उसे वोट नहीं देते लेकिन पार्टी वही चला रहे हैं. इसलिए पार्टी अब ओबीसी के पास जा रही है, पर क्या ओबीसी उसके पास आएंगे?
आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले मध्य प्रदेश में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के अध्यादेश को राज्यपाल से मंजूरी दिलाकर कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह फ्रंटफुट पर खेलने को तैयार है.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.