अगर आप यह सोचते हैं कि भाजपा 'दुश्मनों और गद्दारों' के नाम पर जो मुहिम चला रही है उसे आप देशद्रोह से संबंधित कानून को खत्म करने के वादे से बेअसर कर देंगे, तो आप मुगालते में हैं और आपको पता नहीं है कि आपकी लड़ाई किस चीज़ से है.
1980 में अटल बिहारी वाजपेयी जनता पार्टी के टिकट पर प्रतिष्ठित नई दिल्ली सीट से लड़े. उनके सामने कांग्रेस ने कमोबेश एक अंजान शख्स सी.एम. स्टीफन. को उतारा था.
इस सभा को इस मायने में ऐतिहासिक करार दिया जा सकता है कि लंबे अरसे बाद यूपी की दो सामाजिक शक्तियों दलितों और पिछड़ों के प्रतिनिधित्व की दावा करने वाली दो पार्टियां फिर से करीब आई हैं.
प्रधानमंत्री जी, बताइए यह यदि वर्ण-व्यवस्था ही हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना का मूलाधार है, तो फिर किसी पिछड़े (शूद्र) का अपमानित होना स्वाभाविक बात है. यह तो मनुस्मृति कहती है.
किसान और छोटे कारोबारियों में ज्यादातर पिछड़ी जातियों के हैं और उनको लुभाने के लिए मोदी ने पहले चरण के चुनाव के बाद जाति बताने की कवायद शुरू कर दी है कि वे भी पिछड़े वर्ग से हैं.
कांग्रेस की अगुआई वाला विपक्ष 2019 के चुनाव में एनएसएसओ की एक रिपोर्ट की सहायता से बेरोजगारी की समस्या को उजागर कर रहा है, जबकि पूरी दुनिया में रोजगार परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.
आगरा की एक अदालत ने 2018 में सिकंदरा थाने में राजू गुप्ता की हिरासत में मौत के मामले में एक सब-इंस्पेक्टर को दोषी ठहराया और पुलिस की निष्क्रियता व जांच में कमियों की कड़ी आलोचना की. यह मामला पुलिस की क्रूरता, चुप्पी और सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है.