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Saturday, 21 March, 2026
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मत-विमत

राजनीति ईमानदार चेहरों की पहचान पुख्ता नहीं होने देती, न ही उनको मुकम्मल जहां मिलने देती है!

भगौती प्रसाद ने राजनीति को धनोपार्जन का साधन नहीं बनाया था, इसलिए जल्दी ही उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी.

मोदी-शाह की जोड़ी ने इस देश को ‘जिंगोस्तान’ बना दिया है

अगर आप यह सोचते हैं कि भाजपा 'दुश्मनों और गद्दारों' के नाम पर जो मुहिम चला रही है उसे आप देशद्रोह से संबंधित कानून को खत्म करने के वादे से बेअसर कर देंगे, तो आप मुगालते में हैं और आपको पता नहीं है कि आपकी लड़ाई किस चीज़ से है.

जब नई दिल्ली सीट से एक मलयाली अटल जी को हराने वाला था

1980 में अटल बिहारी वाजपेयी जनता पार्टी के टिकट पर प्रतिष्ठित नई दिल्ली सीट से लड़े. उनके सामने कांग्रेस ने कमोबेश एक अंजान शख्स सी.एम. स्टीफन. को उतारा था.

मायावती और मुलायम का साथ आना क्यों महत्वपूर्ण है?

इस सभा को इस मायने में ऐतिहासिक करार दिया जा सकता है कि लंबे अरसे बाद यूपी की दो सामाजिक शक्तियों दलितों और पिछड़ों के प्रतिनिधित्व की दावा करने वाली दो पार्टियां फिर से करीब आई हैं.

प्रियंका गांधी को क्यों मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहिए

प्रियंका गांधी चुनाव नहीं जीतेंगी, लेकिन कम से कम ऐसा लगेगा कि देश में विपक्ष है.

लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा की 5 बातें, कोई और नेता लिखता तो ‘महान’ बन जाता

दलितों ने लिटरेचर लिखा तो उसे ‘दलित साहित्य’ कहकर पुस्तक मेलों में ही किनारे स्टॉल पर खड़ा कर दिया गया. ठीक वैसे ही, जैसे जाति सिस्टम में होता है.

पश्चिम बंगाल को चाहिए असली बदलाव, ममता बनर्जी का ‘पोरिबर्तन’ नहीं

पश्चिम बंगाल को बदलाव की सख्त जरूरत है. वहां के लोग इतने सालों के कुशासन के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार पर भरोसा दिखा रहे हैं.

प्रधानमंत्री जी! आप फुले-आंबेडकर के पिछड़े हैं या सावरकर-गोलवरकर के?

प्रधानमंत्री जी, बताइए यह यदि वर्ण-व्यवस्था ही हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना का मूलाधार है, तो फिर किसी पिछड़े (शूद्र) का अपमानित होना स्वाभाविक बात है. यह तो मनुस्मृति कहती है.

चुनाव के समय फिर से ओबीसी क्यों बन गए नरेंद्र मोदी?

किसान और छोटे कारोबारियों में ज्यादातर पिछड़ी जातियों के हैं और उनको लुभाने के लिए मोदी ने पहले चरण के चुनाव के बाद जाति बताने की कवायद शुरू कर दी है कि वे भी पिछड़े वर्ग से हैं.

बेरोजगारों के लिए भाजपा का स्टार्टअप पर ज़ोर देना क्यों कांग्रेस के न्याय से बेहतर है

कांग्रेस की अगुआई वाला विपक्ष 2019 के चुनाव में एनएसएसओ की एक रिपोर्ट की सहायता से बेरोजगारी की समस्या को उजागर कर रहा है, जबकि पूरी दुनिया में रोजगार परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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देश

8 साल बाद हिरासत में मौत के मामले में फैसला, यूपी कोर्ट ने पुलिसकर्मी को दोषी ठहराया

आगरा की एक अदालत ने 2018 में सिकंदरा थाने में राजू गुप्ता की हिरासत में मौत के मामले में एक सब-इंस्पेक्टर को दोषी ठहराया और पुलिस की निष्क्रियता व जांच में कमियों की कड़ी आलोचना की. यह मामला पुलिस की क्रूरता, चुप्पी और सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है.

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.