क्या उर्मिला मातोंडकर बीजेपी के गढ़ में कांग्रेस की विजय पताका फहरा पाएंगी. इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर फिल्म स्टार गोविंदा ने 2004 में राम नाईक को हराया था.
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने देश को उम्मीदों की सवारी कराई थी. तमाम तरह के वादे और दावे किए गए थे. आश्चर्यजनक है कि बीजेपी आज उन मुद्दों की बात नहीं कर रही है.
जिन दलित आंदोलनकारियों को 2 अप्रैल के भारत बंद की हिंसा में सामंती-संघी विचारधारा के समर्थकों के हाथों मार दिया गया उन मामलों में गिरफ्तारियां बाकी हैं.
सारागढ़ी और भीमा कोरेगांव में एकमात्र गौरवशाली बात सिख और महार सैनिकों का निजी शौर्य था, जिसका देशभक्ति से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन सरकार, इतिहासकारों, पुस्तक लेखकों और फिल्मकारों ने दोनों घटनाओं के साथ बिल्कुल अलग तरह का बर्ताव किया.
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी गुजरात में 26 में से 26 सीटें जीती थी. इसे दोहरा पाना उसके लिए काफी मुश्किल हो रहा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में दिख गया कि मोदी का जादू वहां उतार पर है.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.