बाबा साहेब को देश उनके कई और योगदान के लिए याद करता है. लेकिन उनका एक महत्वपूर्ण कार्य मजदूरों और किसानों को संगठित करने और उनके आंदोलन का नेतृत्व करने का भी था.
क्या रामविलास पासवान लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त नहीं हैं? हो सकता है ऐसा हो. क्या वे राज्यसभा का सुरक्षित दांव इसी लिए खेल रहे हैं? मुमकिन है.
खासकर दलित और पिछड़ी जातियों के नेताओं को अक्सर जातिसूचक अपमानजनक संबोधन झेलने पड़ते हैं और जाति कर्म के आधार पर उनका मजाक उड़ाया जाता है. क्या है इसकी समाजशास्त्रीय व्याख्या?
पिछले पांच सालों के दौरान अगर ख़ूब 'विकास' हुआ है, तो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के नेता विकास पर वोट क्यों नहीं मांग रहे हैं? आखिर क्यों मुसलमान विरोधी धुव्रीकरण की कोशिश की जा रही है?
मुंबई में रिकॉर्डिंग स्टूडियो केवल प्रसिद्ध भोजपुरी गायकों की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं. वहां रिकॉर्डिंग और गुजर-बसर महंगा है, दिल्ली में, एक गीत 2,500 रुपये में तैयार हो जाता है और स्टूडियो हाथों-हाथ लेते हैं.
पिछले कुछ दिनों से लग रहे क़यासों को सही साबित हुए, डॉ उदित राज ने आख़िरकार बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है. उन्होंने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से अपना टिकट कटने की वजह से बीजेपी छोड़ दी है.
बिहार के चुनावी समर में बेगूसराय सिर्फ एक सीट है. लेकिन यहां कन्हैया के खड़े होने और उनके पक्ष में देशभर से प्रगतिशील लोगों के जमा होने से इसे बहुत ज़्यादा मीडिया कवरेज मिल रही है. वहां जावेद अख्तर के एक बयान से विवाद हो गया है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.