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सहारनपुर की रैली में महागठबंधन के नेताओं के साथ बसपा प्रमुख मायावती, फाइल फोटो | दिप्रिंट
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 हारने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है. अब तक वह ज्यादातर अकेले ही चुनाव लड़ती थी. याद रहे कि 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने चुनावी गठबंधन किया था और भाजपा ने अपना दल जैसी छोटी पार्टी से गठबंधन किया था, वहीं बसपा अकेले ही लड़ी थी. इससे पहले 2014 लोकसभा चुनाव में भी बसपा अकेले ही उतरी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में भले ही उसको कोई सीट नहीं मिली, लेकिन उसने सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था. राष्ट्रीय स्तर पर, उसको मिले वोट भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर रहे.

2017 के बाद बसपा ने अपनी नीति बदली और उसने ऐसी पार्टियों को तलाशा, जिनके साथ सहयोग किया जा सकता हो. उत्तर प्रदेश में जब लोकसभा के उपचुनाव हुए, जैसे कि फूलपुर और गोरखपुर सीटों पर, तो उसने सपा को समर्थन देने का ऐलान किया. कैराना लोकसभा सीट पर उसने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) प्रत्याशी को समर्थन दिया. इसके साथ-साथ उसने अलग-अलग प्रदेशों में विभिन्न पार्टियों के साथ सहयोग की संभावना तलाशी.


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पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव में सीटों को लेकर उसकी कांग्रेस से बात नहीं बन पायी. मजबूरन उसे अकेले चुनाव लड़ना पड़ा. कर्नाटक में उसने जनता दल (सेक्युलर) के साथ गठबंधन किया. उसे लड़ने के लिए 20 सीटें मिलीं. बाकि सीटें जनता दल सेक्युलर को. बसपा का एक विधायक भी बना. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कांग्रेस के समर्थन से जब जनता दल सेक्युलर की सरकार बनी, तो बसपा का भी एक विधायक मंत्री बना.

इधर, सभी उत्तरी राज्यों में जहां उसका वोट मौजूद है, उसने विभिन्न पार्टियों के साथ सहयोग और गठबंधन किया है, वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां भले ही उसके पास कम वोट है, सीटें भी कम ही आती हैं, लेकिन उसके पास इतना वोट है कि ये दूसरी पार्टी को जिता सकता है. दूसरी बात, ये माना जाता है कि बसपा का वोट दूसरी अन्य पार्टियों के मुकाबले ज्यादा आसानी से ट्रांसफर हो जाता है. इसलिए भी अन्य पार्टियां बसपा के साथ गठबंधन करने को उत्सुक रहती हैं.

2018 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए. राजस्थान, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल को लेकर बीएसपी की बात नहीं बन पाई. इसलिए इन राज्यों में उसे अकेले लड़ना पड़ा. लेकिन छत्तीसगढ़ में उसने अजित जोगी से चुनावी तालमेल किया.

लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में उसका गठबंधन समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल से हुआ. जनवरी में मायावती और अखिलेश यादव ने गठबंधन की आधिकारिक रूप से घोषणा भी कर दी. कुछ समय बाद इस गठबंधन में रालोद भी शामिल हो गया. यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें बसपा 38, सपा 37 और रालोद 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी दो सीटें – अमेठी और रायबरेली – कांग्रेस के लिए छोड़ी गई हैं.


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समाजवादी पार्टी से उसका गठबंधन एक मजबूत आधार ले चुका है. अखिलेश यादव भी काफी सुलझा हुआ व्यवहार कर रहे हैं. बसपा और सपा का यह गठबंधन उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी हो चुका है.

इधर बसपा अध्यक्ष मायावती ने साफ़ घोषणा की है कि कांग्रेस के साथ उसका किसी तरह का गठबंधन नहीं हुआ है. इसका कारण शायद यह है कि बसपा जितनी सीटें चाहती है, कांग्रेस उतनी छोड़ने को तैयार नहीं है.

उत्तराखंड में कुल पांच लोकसभा सीटें हैं जिनमें से सपा एक सीट और बसपा शेष चार सीट पर चुनाव लड़ रही है. सपा पौड़ी गढ़वाल से चुनाव लड़ेगी और बसपा बाकी सीटों पर.

मध्य प्रदेश में कुल 29 सीटें हैं, जिनमें से सपा 3 और बाकी 26 सीटों पर बसपा चुनाव लड़ेगी. सपा बालाघाट, टीकमगढ़ और खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी.

छत्तीसगढ़ में बसपा का जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) के साथ गठबंधन है, जिसके अध्यक्ष अजीत जोगी हैं. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कुल 90 सीटों में से बसपा 35 और जकांछ ने 55 सीटों पर चुनाव लड़ा. लेकिन नतीजे आशानुरूप नहीं रहे. जकांछ ने 5 सीट जीतीं जबकि बसपा ने केवल 2. यह गठबंधन लोकसभा चुनाव में जारी है. लेकिन जकांछ चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि बसपा का समर्थन कर रही है.

हरियाणा में बसपा का गठबंधन लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (लोसपा) के साथ है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार सैनी हैं. हरियाणा में कुल 10 सीटें हैं जिनमें से दो सीट लोसपा को दी गईं हैं जबकि बाकी की 8 सीटें पर बसपा चुनाव लड़ेगी. लोसपा को सोनीपत और भिवानी दी गई हैं. लोसपा नई पार्टी है, जो फरवरी 2019 में ही बनी है. पिछले साल 2018 में बसपा का गठबंधन इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से हुआ था, लेकिन इनेलो की आंतरिक कलह से बसपा ने संबंध तोड़ लिया है.

पंजाब में बसपा ने 5 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है. इस गठबंधन को पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस नाम दिया है. इसमें पंजाबी एकता पार्टी, लोक इंसाफ पार्टी, पंजाब मंच, सीपीआई और आरएमपीआई शामिल हैं. इस गठबंधन में बसपा 3, पंजाबी एकता पार्टी 3, लोक इंसाफ पार्टी 3, पंजाब मंच को 1, सीपीआई 1 और आरएमपीआई 1 सीट पर चुनाव लड़ेगी. बसपा आनंदपुर साहेब, होशियारपुर और जालंधर सीट से चुनाव लड़ेगी.

बसपा का आंध्र प्रदेश में जन सेना पार्टी, सीपीआई और सीपीएम के साथ गठबंधन है. आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं. बसपा आंध्र प्रदेश की कुल 25 में से 3 और विधानसभा की 175 में से 21 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उसका जनसेना पार्टी के साथ तेलंगाना में भी गठबंधन है. जनसेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण हैं जो फिल्म में लोकप्रिय अभिनेता रह चुके हैं. अपनी फिल्म लोकप्रियता के आधार पर वह इन राज्यों में सफलता की उम्मीद देख रहे हैं. पवन कल्याण ने बसपा अध्यक्ष मायावती के बारे में कहा है कि वह बहन जी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं.


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बसपा इस लोकसभा चुनाव में छोटे दलों के साथ ज्यादा सहज है. जहां पिछले चुनाव तक बसपा गठबंधन की राजनीति से दूर थी और कहती थी कि गठबंधन हमारे लिए लाभदायक नहीं है, वहीं अब बसपा गठबंधन की राजनीति सहजतापूर्वक कर रही है.

इधर बसपा अध्यक्ष बहन मायावती का यह भी कहना है कि वह भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों से किसी प्रकार का गठबंधन नहीं करेंगी. शायद बसपा का इरादा एक व्यापक गैर भाजपा- गैर कांग्रेस मोर्चा बनाने का है. इस व्यापक गठबंधन में सपा, राजद, डीएमके, वामपंथी पार्टियां सहित सभी पार्टियां शामिल हो सकती हैं. यह चुनाव परिणाम पर निर्भर करता है कि बसपा को इसमें कितनी सफलता मिलती है.

(लेखक दर्शनशात्र के शिक्षक हैं और राजनीतिक विषयों पर लिखते हैं.)


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