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Saturday, 21 March, 2026
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मौजूदा चुनाव में समाजवाद और सामाजिक न्याय एक बार फिर सतह पर

भारत जैसे देश में जहां समाज जाति और वर्ग के नाम पर बुरी तरह बंटा हो, वहां समाजवाद की सफलता सामाजिक न्याय संबंधी नीतियों के कार्यान्वन पर निर्भर करती है.

भाजपा का इन चुनावों में जोश ठंडा, फिर भी सरकार बना लेने की उम्मीद

भाजपा के विरोध में कोई एक ऐसा मोर्चा नहीं बन सका है जो तमाम गैर भाजपाई दलों की एकता के लिए धुरी का काम करे. ऐसे में चुनाव के बाद कई दल पाला बदल सकते हैं.

गरीबों और वंचितों के लिए फ़ायदेमंद है गठबंधन सरकार

इवर्सेन और सोस्की ने अपने रिसर्च में पाया है कि जिन देशों में गठबंधन सरकारें बन रही हैं, उनमें असमानता कम बढ़ी है, जबकि जिन देशों में पूर्ण बहुमत की स्थाई सरकारें बनी है, उनमें असमानता तेज़ी से बढ़ रही है.

सर्जिकल स्ट्राइक पर भाजपा- कांग्रेस की लड़ाई से, राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमारा रवैया जगजाहिर हो गया है

भारत पड़ोसी पाकिस्तान को बाध्य करने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है, और पाकिस्तान सुनियोजित छद्म युद्ध की अपनी रणनीति पर कायम रहेगा.

यह अंग्रेजों का दौर नहीं जब अनशन सफल हुआ करते थे

अंग्रेजों की क्रूरता से इतिहास भरा पड़ा है लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि 1916 का मदन मोहन मालवीय का आंदोलन अंग्रेजों से बातचीत के बाद ही सफल हो पाया था.

आंध्रप्रदेश में कैसे तोड़ी थी राजशेखर रेड्डी ने माओवादियों की कमर

पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी उर्फ वायएसआर के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी हिंसा के फन कुचलने में कामयाब रही. बाद की सरकारों ने भी रेड्डी की रणनीति पर कठोरतापूर्वक अमल किया जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं.

क्यों मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट, ओपिनियन और एग्ज़िट पोल चुनाव को लेकर एक मत नहीं हैं

समाचार रिपोर्ट राजनीतिक रणनीति और स्थानीय मुद्दों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये सीटों की टैली को बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं करते हैं.

यूपी में ‘आएगा तो मोदी ही’ की गूंज के बीच अब…’आएगा तो गठबंधन ही’!

लोकसभा चुनाव अभी समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन उनके बाद की राजनीतिक संभावनाओं की तलाश शुरू हो गई है. इस क्रम में देश के...

एक खामोश क्रांति: लाखों युवक अब नौकरी नहीं, कारोबार करने की जुगत में हैं

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अपना कोई काम-धंधा शुरू करने वालों को जितना लोन देने का मन बनाया था, उसमें वह सफल रही है.

पूना पैक्ट की कमजोर और गूंगी संतानें हैं लोकसभा के दलित सांसद

अगली लोकसभा में, देश की 16.6 फीसदी यानी 20 करोड़ दलित आबादी की कोई मुखर व जानी-पहचानी आवाज नहीं होगी. डॉ. आंबेडकर को पता था कि ऐसा होने वाला है.

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‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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अधिकारी की आत्महत्या को लेकर विपक्षी दलों ने मान सरकार को घेरा, परिवहन मंत्री ने इस्तीफा दिया

चंडीगढ़, 21 मार्च (भाषा) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित कई नेताओं ने शनिवार को एक सरकारी अधिकारी की आत्महत्या को लेकर पंजाब...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.