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Thursday, 26 February, 2026
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अरुण जेटली ने लिखा- टीना फैक्टर, कमजोर विपक्ष का मतलब मोदी फिर से जीत रहे हैं

केंद्रीय मंत्री ने कहा- विपक्षी वादे इस मार्ग के लिए जिम्मेदार होंगे. जो एकदम दिखाता है कि नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है.

नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहने में किसी को क्या एतराज हो सकता है?

नाथूराम गोडसे चाहते थे कि हिंदू धर्म उस मर्दानगी को प्राप्त करे जो औपनिवेशिक शासन का प्रतिनिधित्व करती है. गांधी इसके विपरीत चाहत रखते थे.

क्या आपको ज़ारा, अरमानी या प्रादा इस्तेमाल करने वाले दलित से समस्या है?

फिल्मकार, पत्रकार और लेखक इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं देश के 20 करोड़ दलितों में एक अच्छा-खासा मिडिल क्लास पैदा हो चुका है, जो सूअर टहलाने वाला आदमी नहीं है!

प्रधानमंत्री जी, आप ट्विटर को कुछ ज़्यादा ही समय दे रहे हैं और आपने मीडिया को गलत समझा है

मीडिया का एक बड़ा हिस्सा तहेदिल से प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करता है. और सत्ता में रहते हुए, उन्हें थोड़ी आलोचना झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए.

मरीचझापी का शाप बंगाल में लेफ्ट पार्टी के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा

मरीचझापी कांड और कुछ नहीं बल्कि लेफ्ट राजनीतिक की गलतियों का एक नमूना है. 26 जनवरी, 1979 को अवैध तरीके से रह रहे लोगों को हटाने के लिए नरसंहार किया गया.

प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती क्यों हैं मजबूत दावेदार

प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती के नाम पर सहमति बनने से देश की सबसे वंचित जातियों का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास और दृढ़ होगा. इससे भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी.

डॉ. आंबेडकर ने इस्लाम, ईसाई या सिख धर्म की जगह बौद्ध धम्म ही क्यों अपनाया

आंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़ने की घोषणा 1936 में ही अपने भाषण जातिभेद का उच्छेद यानी एनिहिलेशन ऑफ कास्ट में कर दी थी लेकिन उन्होंने धर्म परिवर्तन 1956 में जाकर किया. इस बीच उन्होंने सभी धर्मों का अध्ययन किया.

देश के सबसे ‘बदज़ुबान’ प्रधानमंत्री को 23 मई को बाहर का रास्ता दिखा कर जनता अपना जवाब सुनाएगी

मणिशंकर अय्यर लिखते हैं ‘याद है कि मैंने 7 दिसंबर 2017 को उन्हें किस रूप में चित्रित किया था? क्या मेरी बात भविष्यवाणी नहीं साबित हुई?

लेफ्ट ने लोकसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी को हराने का आह्वान किया, लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया

बंगाल में बढ़ती बेरोजगारी और फैली अराजकता के खिलाफ सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में सड़कों पर भाग लेते हुए शायद ही वामपंथियों को देखा गया है.

उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ रहे कुछेक मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए कारगर है वंशवाद

वंशानुगत कनेक्शन के बगैर, मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता के आंकड़े और भी निराशाजनक होते है.

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मुसलमानों को ‘गोली मारने’ वाले हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो पर कानून क्या कहता है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

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राजनीति

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बिहार: फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान कई स्कूली छात्र बीमार

पटना, 25 फरवरी (भाषा) बिहार के पटना जिले में बुधवार को लिंफैटिक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के दौरान दवा का सेवन करने के बाद...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.