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Thursday, 5 February, 2026
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मोदी सरकार अज़हर पर चीन के यू-टर्न का श्रेय लेने की हकदार है, लेकिन चीन-पाक संबंध प्रभावित नहीं होंगे

चीन को जितनी चिंता पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को लेकर है, उससे कहीं ज़्यादा वह 62 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर चिंतित है.

भाजपा को देश के लिए खतरा मानना और चुनाव में नोटा चुनने में कोई विरोधाभास नहीं

विकल्प के सामने होने तक ‘ना’ कहने का एक सीमित और एकदम आखिर में अपनाया जाने वाला उपाय है नोटा.

देश में प्रधानमंत्रियों को उनके चुनाव क्षेत्र में ही घेर लेने की समृद्ध परम्परा रही है

प्रधानमंत्री को उनके ही क्षेत्र में घेरने की विपक्ष की समृद्ध परंपरा को भले ही कांग्रेस पार्टी और दूसरे दलों के नेताओं ने न अपनाया हो लेकिन तेज बहादुर ने कड़ी चुनौती दी है.

लोकसभा में दलितों की दमदार आवाज क्यों सुनाई नहीं देती?

देश की 16.6 फीसदी आबादी दलितों की हैं और उनकी आबादी 20 करोड़ से ज़्यादा है. इतनी बड़ी आबादी की आवाज़ अगर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में दमदारी से नहीं उठती, तो ये एक गंभीर मसला है.

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर क्यों करें डॉ. आंबेडकर को याद

बाबा साहेब को देश उनके कई और योगदान के लिए याद करता है. लेकिन उनका एक महत्वपूर्ण कार्य मजदूरों और किसानों को संगठित करने और उनके आंदोलन का नेतृत्व करने का भी था.

गूंजे धरती आसमान वाले रामविलास पासवान अमित शाह के कहने पर अमेठी क्यों गए?

क्या रामविलास पासवान लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त नहीं हैं? हो सकता है ऐसा हो. क्या वे राज्यसभा का सुरक्षित दांव इसी लिए खेल रहे हैं? मुमकिन है.

इस बार का चुनाव सबके लिए एक जैसा नहीं है

सही मायने में लोकतंत्र सभी दलों को समान अवसर देने की मांग करता है लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं हो रहा.

अखिलेश की ‘भैंस’ यानी जन्म, कर्म और राजनीति का कॉकटेल

खासकर दलित और पिछड़ी जातियों के नेताओं को अक्सर जातिसूचक अपमानजनक संबोधन झेलने पड़ते हैं और जाति कर्म के आधार पर उनका मजाक उड़ाया जाता है. क्या है इसकी समाजशास्त्रीय व्याख्या?

चुनाव जीतने के लिए वोट का ध्रुवीकरण करने में जुटी भाजपा

पिछले पांच सालों के दौरान अगर ख़ूब 'विकास' हुआ है, तो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के नेता विकास पर वोट क्यों नहीं मांग रहे हैं? आखिर क्यों मुसलमान विरोधी धुव्रीकरण की कोशिश की जा रही है?

मुंबई छोड़िए, दिल्ली भोजपुरी संगीत इंडस्ट्री का नया केंद्र बन गया है

मुंबई में रिकॉर्डिंग स्टूडियो केवल प्रसिद्ध भोजपुरी गायकों की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं. वहां रिकॉर्डिंग और गुजर-बसर महंगा है, दिल्ली में, एक गीत 2,500 रुपये में तैयार हो जाता है और स्टूडियो हाथों-हाथ लेते हैं.

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बाराबंकी जिले में एक डॉक्टर ने बेटे के सामने खुदकुशी की

बाराबंकी (उप्र), पांच फरवरी (भाषा) बाराबंकी जिले के मसौली क्षेत्र में एक निजी नर्सिंग होम के डॉक्टर ने कथित रूप से पारिवारिक कलह के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.