कांशीराम जहां सेना के नियमों के हिसाब से काम करते थे, वहीं मायावती नौकरशाही के मॉडल पर चलती हैं. यह मॉडल बीएसपी को कहां पहुंचा सकता है चुनाव नतीजों से देखा जा सकता है.
डा.भीमराव आंबेडकर ने पंडित नेहरु की कैबिनेट से 27 सितंबर,1951 को इस्तीफा दे दिया था. वे उसके अगले ही दिन यानी 28 सितंबर, 1951 को 26 अलीपुर रोड में शिफ्ट कर गए थे.
उत्तर और दक्षिण की बिलकुल ही अलग-अलग प्रकार की सामाजिक-राजनैतिक परिस्थितियां, अलग प्रकार की समस्याएं एवं चिंताएं हैं – इन सब मसलों को संतोषजनक रूप से हल करने की कोशिश होनी चाहिए.
ऐसा शायद कभी नहीं हुआ कि सवर्ण महिलाओं ने अपने परिवार के उन पुरुषों का बहिष्कार कर दिया हो, जिन्होंने दलित महिलाओं का यौन शोषण या बलात्कार किया हो बल्कि वो उनको बचाने की तमाम कोशिशें करती हैं.
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल, जवानों से घरेलू नौकरों का काम लेने और बिजली बिलों में हेरफेर जैसे विशेषाधिकारों के दुरुपयोग के मामले बेकाबू हो चुके हैं.
झारखंड में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करके बीजेपी ने बढ़त ले ली है. वह अपनी सरकार बचाने के लिए लड़ेगी, लेकिन क्या विपक्षी दल इस लड़ाई के लिए तैयार हैं?