प्रधानमंत्री को उनके ही क्षेत्र में घेरने की विपक्ष की समृद्ध परंपरा को भले ही कांग्रेस पार्टी और दूसरे दलों के नेताओं ने न अपनाया हो लेकिन तेज बहादुर ने कड़ी चुनौती दी है.
देश की 16.6 फीसदी आबादी दलितों की हैं और उनकी आबादी 20 करोड़ से ज़्यादा है. इतनी बड़ी आबादी की आवाज़ अगर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में दमदारी से नहीं उठती, तो ये एक गंभीर मसला है.
बाबा साहेब को देश उनके कई और योगदान के लिए याद करता है. लेकिन उनका एक महत्वपूर्ण कार्य मजदूरों और किसानों को संगठित करने और उनके आंदोलन का नेतृत्व करने का भी था.
क्या रामविलास पासवान लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त नहीं हैं? हो सकता है ऐसा हो. क्या वे राज्यसभा का सुरक्षित दांव इसी लिए खेल रहे हैं? मुमकिन है.
खासकर दलित और पिछड़ी जातियों के नेताओं को अक्सर जातिसूचक अपमानजनक संबोधन झेलने पड़ते हैं और जाति कर्म के आधार पर उनका मजाक उड़ाया जाता है. क्या है इसकी समाजशास्त्रीय व्याख्या?
पिछले पांच सालों के दौरान अगर ख़ूब 'विकास' हुआ है, तो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के नेता विकास पर वोट क्यों नहीं मांग रहे हैं? आखिर क्यों मुसलमान विरोधी धुव्रीकरण की कोशिश की जा रही है?
मुंबई में रिकॉर्डिंग स्टूडियो केवल प्रसिद्ध भोजपुरी गायकों की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं. वहां रिकॉर्डिंग और गुजर-बसर महंगा है, दिल्ली में, एक गीत 2,500 रुपये में तैयार हो जाता है और स्टूडियो हाथों-हाथ लेते हैं.