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Saturday, 7 February, 2026
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ये जाति की राजनीति का अंत है या फिर जाति और धर्म के कॉकटेल की शुरुआत 

क्या वाकई भाजपा के नेतृत्व में जातिवाद की राजनीति खत्म हुई है, या फिर जातीय राजनीती इस आम चुनाव में किसी और रूप में प्रकट हुई है.

प्रकृति पर रईसी की ऐसी धौंस का अंत कहां?

हाल ही में औली में इन ‘बंधुओं’ (अजय व अतुल) के दो बेटों की शादियां संपन्न हुईं, इन शादियों की गुप्ता बंधुओं से ज्यादा कीमत औली और उसके पर्यावरण को चुकानी पड़ी है.

झारखंड में ऐसा क्या है कि वहां सबसे ज्यादा ‘मॉब लिंचिंग’ हो रही है?

झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले मॉब लिंचिंग की घटना से वहां समाज में ध्रुवीकरण तेज हो सकता है. लेकिन इस क्रम में वहां कानून के शासन के होने या न होने का सवाल खड़ा हो गया है.

बिहार में मासूम बच्चों के काम क्यों न आई आयुष्मान भारत योजना

बिहार जैसे गरीब राज्यों और इंश्योरेंस आधारित आयुष्मान भारत योजना के बीच कोई तालमेल ही नहीं है. ये योजना देश के विकसित इलाकों के लिए बनी है. बिहार के लिए सरकार को कुछ और सोचना होगा.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति मसौदा पुरातनपंथी नहीं पर शक है कि इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

इस दस्तावेज के सुझावों को देखें तो पिछले पांच वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार इसके विपरीत दिशा में चली है.

राम रहीम की पैरोल अर्ज़ी पर इतना हंगामा क्यों, यह तो न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है

पैरोल किसी भी अपराध के लिये सज़ा पाने वाले अपराधी का अधिकार है और अपराधी को पैरोल पर रिहा करने का निर्णय प्रशासन के विवेक पर निर्भर करता है.

मुसलमानों को नरेंद्र मोदी के वादों को किस तरह देखना चाहिए?

अगर अल्पसंख्यक खुले मन से सरकार के साथ बातचीत और संवाद में जाते हैं तो इसके बाद का दारोमदार बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर होगा कि संसद के सेंट्रल ह़ॉल में कही गई अपनी बातों और वादों पर खरे उतरें.

लोहिया और आंबेडकर के सपनों को क्या पूरा कर पाएंगे अखिलेश?

लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में दलितों ने 25 साल बाद साइकिल चुनाव चिह्न पर वोट डाला है. सपा और दलितों के बीच की कड़वाहट घटी है. क्या अखिलेश इस समय दलितों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे?

कबीर सिंह: प्रेम नहीं, सामंती ‘मर्दाना कुंठा’ का बेशर्म मुज़ाहिरा है

दरअसल, 'कबीर सिंह' कोई प्रेम कहानी नहीं है, यह समाज में चारों तरफ पसरी सामंती मर्द यौन कुंठाओं का शोषण और उसकी बिक्री है!

मोदी अकेले नहीं, दुनिया भर में दक्षिणपंथी लोकप्रिय अधिनायकों का दौर

दक्षिणपंथी अधिनायकवाद की एक प्रवृत्ति ये भी है कि वो समर्थन तो वंचितों से लेता है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता. धार्मिक उन्माद दक्षिणपंथी अधिनायकवाद का हथियार है.

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ओडिशा में भाजपा महानदी मुद्दे को हल करने में असमर्थ, छत्तीसगढ़ को और बांध बनाने की अनुमति दी गई: बीजद

भुवनेश्वर, छह फरवरी (भाषा) विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने शुक्रवार को ओडिशा की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए उस पर महानदी जल...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.