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Saturday, 7 March, 2026
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मत-विमत

सामाजिक भेदभाव के शिकार बन गए भारत के पहले राष्ट्रवादी इतिहासकार

ज्ञान की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त काशी प्रसाद जायसवाल क्यों फ़ुट नोट्स बन कर रह गए? उनका कृतित्व क्यों इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया?

वीजी सिद्धार्थ का केस बताता है कि मोदी सरकार नागरिकों से नर्म रवैये से काम ले

भारत को नागरिकों को आश्वस्त करने वाली कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता है, और संस्थागत संरक्षण जो उन्हें सहारा दे, न कि केंद्रीय अधिकारियों को ज्यादा ताकत.

अब्दुर रज़्ज़ाक़ अंसारी : जाने कहां गए वे लोग!

ऐसे लोग कम होते हैं जो बग़ैर किसी शोहरत की तमन्ना किए ख़ामोशी से समाज सेवा का अपना काम किए जाते हैं. ऐसी ही शख़्सियतों में एक नाम अब्दुर रज़्ज़ाक़ अंसारी का है

तीन दलबदलू, छह हत्याएं, तीन बलात्कार, और एक पार्टी- भाजपा

कुलदीप सिंह सेंगर, संजय सिंह, साक्षी महाराज की कहानियां...और ये कहानियां हमें हमारी सियासत, पुलिस, न्याय व्यवस्था, और भाजपा के बारे में क्या बताती हैं?

‘मामला चाहें जो भी हो, कुल मिलाकर यह एक भूमि विवाद है’

उच्च न्यायालय 30 सितंबर, 2010 के बहुमत के अपने फैसले में इसे हिन्दू, मुस्लिम और राम लला की संयुक्त मालिकाना हक वाली भूमि घोषित कर चुका है.

ज़ोमैटो प्रकरण में सीईओ दीपेंद्र गोयल का दिखा घोर अवसरवादी चेहरा

ज़ोमैटो का समर्थन करने वाले उदारवादियों ने भी अपने दोमुंहेपन को प्रदर्शित किया है.

कांवड़ यात्रा में दलित और ओबीसी : सहमति से लागू हुआ वर्चस्व

कांवड़ यात्रा में दलितों और ओबीसी का बड़ी संख्या में शामिल होना एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिघटना है लेकिन आखिर किन वजहों से ऐसा हो रहा है? आइए जानने की कोशिश करते हैं.

क्या मानव सभ्यता महाविनाश की ओर बढ़ रही है?

बदलते और बिगड़ते पर्यावरण की समस्या केवल भारत की नहीं है. लेकिन इसका विकराल रूप भारत जैसे गरीब देश को ज्यादा झेलना पड़ेगा. इसलिए हमें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.

ज़ोमैटो ने सांप्रदायिक घृणा के अंधेरे कोने में उजाले की कम से कम एक किरण तो फेंकी ही है

सांप्रदायिक भेदभाव की यह अपनी तरह की कोई अनूठी या पहली घटना नहीं है. ऐसे भेदभावों के ही चलते आजादी के बहुत सालों बाद तक रेलवे स्टेशनों पर ‘हिन्दू पानी’ अलग और ‘मुस्लिम पानी’ अलग हुआ करता था.

इमरान ख़ान मीडिया के पीछे पड़े हैं, वहीं पाकिस्तानी पुरुष टिकटॉक पर जन्नत ‘गंवा’ रहे हैं

पाकिस्तान इन दिनों टिकटॉक के मज़े ले रहा है, जहां किसी को भी बख्शा नहीं जाता. हालांकि, इसे गैर-इस्लामी करार देने वाले और इस पर प्रतिबंध की मांग करने वाले सक्रिय हो चुके हैं.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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राजनीति

देश

पलानीस्वामी का भी वही हश्र होगा जो बिहार के मुख्यमंत्री का हुआ है: स्टालिन

मदुरै (तमिलनाडु), सात मार्च (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को कहा कि अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी का भी वही हश्र...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.