बढ़ते पर्यटन के अपने खतरे भी हैं. पर्यटन से ज्यादा से ज्यादा माल कमाने के फेर में प्रकृति का ज्यादा दोहन किया जा रहा है. इससे कुदरत और मानव के बीच का संतुलन डांवाडोल हो रहा है.
देश में कोई भी उद्योग ऐसा नहीं है, जिसमें नौकरियां चकाचक मिल रही हों और उस क्षेत्र के लोगों के चेहरे खिले हुए हों या तो नौकरियों में स्थिरता बनी हुई है या नौकरियां जा रही हैं.
भाजपा के कोर मतदाताओं की हमेशा से ये इच्छा रही है कि जातिगत आरक्षण पूरी तरह से खत्म हो. भाजपा अपने कोर मतदाताओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.