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Thursday, 5 February, 2026
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यूपी में सिर के बल खड़ी आरक्षण नीति और एनसीबीसी का हस्तक्षेप

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन डॉ. भगवान लाल साहनी और सदस्य कौशलेंद्र सिंह पटेल ने सुनवाई में पाया कि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधानों को लागू करने में गड़बड़ी हुई है.

जयप्रकाश नारायण की ऐतिहासिक भूल की वजह से बढ़ी भाजपा

भाजपा के पुराने अवतार जनसंघ ने समाजवादी होने का क्षद्म रचा और जेपी उनके छलावे में आ गए. इसकी वजह से संघ को जो विश्वसनीयता मिली, उसे वह अब तक भुना रही है.

कौन हैं आजम खान, जिन्हें तबाह करना चाहती है भाजपा

आजम खान इमरजेंसी के योद्धा हैं, जिन्होंने रामपुर इलाके में नवाबी दबदबे को खत्म करके लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया. शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम की बराबरी करने वाले देश में कम ही नेता हैं.

पुलिस नेता-राज जहां रस्सी सांप बन सकती है और लिंचिंग दिल का दौरा

पुलिस-नेता की साठगांठ कोई नई चीज़ नहीं है लेकिन इसने भयानक रूप ले लिया है और आईपीएस यानी भारतीय पुलिस सेवा अपना नैतिक और पेशागत वजन खो बैठी है.

लव कुश तो बहाना है, असल मसला तो वाल्मीकि की विरासत है

वाल्मीकि समाज का कहना है कि लव-कुश के कपड़े मॉडर्न क्यों लग रहे हैं. उनकी मांग है कि जब भी ऐसे धारावाहिक बनें तो समाज को स्टेकहोल्डर बनाया जाए.

गलत नहीं हैं निर्मला सीतारमण, ओला और उबर कार की बिक्री को नुकसान पहुंचा सकते हैं

कठिन बाज़ार से जूझ रहे कार उत्पादकों से सहानुभूति रखते हुए इस तथ्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि वे इस मौके का फायदा उठाकर टैक्सों में और ज्यादा छूट हासिल करने की आपत्तिजनक कोशिश में लगे हैं

हिंदी में अरुंधति राय, विक्रम सेठ और चेतन भगत क्यों नहीं हैं?

सिर्फ हिंदी में लिखकर कोई कवि या कहानीकार जीवन यापन की नहीं सोच सकता. इसकी वजहें भारतीय समाज और राजनीति में छिपी हैं.

मोदी ने बंटवारे के पाकिस्तान के ‘अधूरे छूटे काम’ को पूरा किया है

अनुच्छेद 370 तो गया, अब एक सही लड़ाई लड़ने का समय आ गया है— कश्मीरियों को भारत के सभी नागरिकों को प्राप्त समान अधिकार दिलाने, कश्मीर में नागरिक और मानवाधिकारों व व्यावसायिक तथा राजनीतिक गतिविधियों को बहाल करने की लड़ाई लड़ने का.

नीतीश कुमार की जदयू को अब भाजपा को बिहार पर शासन करने का मौका देना चाहिए

नीतीश कुमार की कार्यशैली ने जदयू को एक व्यक्ति-केंद्रित पार्टी बना दिया है, न कि विचारधारा पर आधारित दल. बिहार की कमान अब भाजपा को संभालनी चाहिए.

सेकुलर और कम्युनल दोनों खेमों में होने की मायावती और नीतीश की सुविधा

बेशक, यूपी में समाजवादी पार्टी और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल अल्पसंख्यकों की पहली प्राथमिकता वाले दल हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी और जनता दल यूनाइटेड भी अल्पसंख्यकों के अच्छे-खासे वोट पाते रहे हैं.

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दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी मामले में अल फलाह विश्वविद्यालय के चेयरमैन को गिरफ्तार किया

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दिल्ली में विस्फोट के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की शिकायत पर दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.