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Tuesday, 28 April, 2026
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मोदी सरकार को भारत की लुढ़कती जीडीपी से उभरे अवसर को नहीं गंवाना चाहिए

जब आर्थिक वृद्धि दर चार तिमाहियों में 7.0 प्रतिशत से गिरकर 4.5 प्रतिशत पर पहुंच जाए, तो यह मानना ही पड़ेगा कि यह और कुछ नहीं बल्कि मंदी ही है.

मोटा अनाज हुआ फैशनेबल, क्या लोग फिर समझ रहे हैं इसका महत्व

मोटे अनाज को अगर बढ़ावा दिया जाए तो पानी का संकट भी कुछ कम होगा. साथ ही आम लोगों की सेहत भी बेहतर बनेगी.

जीडीपी में गिरावट रोकने का कोई झटपट उपाय क्यों नहीं है

नीतियां ज़मीनी वास्तविकताओं की समझ वाले विशेषज्ञों द्वारा, पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद बनाई जानी चाहिए. नेताओं को चाहिए कि वे इनकी जिम्मेदारी लें और समय रहते बदलावों के बारे में कारोबारियों को सूचित करें.

एनसीपी, कांग्रेस और भाजपा के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज के मायने

महाराष्ट्र की राजनीति ने साबित कर दिया है कि हर पार्टी के तरकश में कई तीर हैं. और, कोई नहीं जानता कि अगला तीर कौन छोड़ेगा.

ज्वाला गुट्टा : तेलंगाना में बलात्कार और हत्या के लिए समाज को दोष दें, सिर्फ पुलिस या सरकार को नहीं

मैंने हैदराबाद में कभी असुरक्षित महसूस नहीं किया. यकीन करना मुश्किल है कि शहर में ऐसा भयानक अपराध हुआ है.

बीजेपी भले ही राज्यों में सिकुड़ रही हो लेकिन विचारधारा फल-फूल रही है

भाजपा की सत्ता अब भले ही केवल कुछ बड़े और महत्वपूर्ण राज्यों तक सीमित हो गई है लेकिन उसकी हिंदुत्ववादी विचारधारा ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है और देशभर में इसका कोई बड़ा विरोध नहीं हो रहा है.

लुटियंस दिल्ली की चहेती सुप्रिया सुले क्या अब महाराष्ट्र की ताई बन गई हैं

महाराष्ट्र में एनसीपी पर अजित पवार की पकड़ जिस तरह टूटी है उससे वहां की ताज़ा सियासी नौटंकी में सुप्रिया सुले ही खामोश विजेता के रूप में उभरी हैं.

जेएनयू मॉडल जैसी सब्सिडाइज्ड शिक्षा से भारतीय नफरत क्यों करते हैं

भारत में शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को लगातार अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए रोहित वेमुला, पायल तड़वी, फातिमा लतीफ की आत्महत्या और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शन को देखा जा सकता है.

ट्विटर को ब्लू टिक लौटाने का मेरा फैसला और लोकतंत्र के लिए इस बहस के मायने

खास लोगों को मिलने वाला ब्लू टिक मेरे विचार में संवाद के मामले में एक किस्म का नस्लभेद है या इसे आप डिजिटल वर्ण व्यवस्था भी कह सकते हैं. ये लोकतंत्र के लिए हानिकारक है.

अयोध्या में गरीब औरतें और आदमी रश्क कर रहे- हाय, हम छुट्टा गाय या बैल क्यों न हुए

अयोध्या के कई भाजपाई संत गाय को पशु कहने पर चिढ़ जाते हैं और उपदेश देने लगते हैं कि ‘वह पशु नहीं माता है’. यह बात और है कि ये उपदेश-कुशल संत इस माता के लिए खुद कुछ नहीं करते और करदाताओं के पैसे से ही उसको पालना चाहते हैं.

मत-विमत

ईरान युद्ध ने भारत के लिए अगले युद्ध का खाका पेश कर दिया है

पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

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राजनीति

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पीक XV ने 130 करोड़ रुपये में मोबिक्विक में अपनी हिस्सेदारी बेची

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) वेंचर कैपिटल कंपनी पीक XV पार्टनर्स ने 130 करोड़ रुपये से अधिक के ‘ब्लॉक’ सौदे के माध्यम से...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.