इतिहास को खंगालें तो पता चलेगा कि परंपरा की नींव कांग्रेस ने ही डाली और उसने इंडियन एयरलाइंस के विमान का 1978 में अपहरण करने वाले दो नेताओं को भरपूर सम्मान भी दिया.
लोग स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की दिशा में आगे बढ़ना नहीं चाहते, क्योंकि शायद इन मूल्यों की गारंटी देने वाले नए आधुनिक भारत को लेकर उनके मन में संदेह है. वे अराजकता की ओर नहीं जाना चाहते.
एआईएमआईएम की उपस्थिति अब प्रतीकात्मक मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह पश्चिम से पूरब तक के राज्यों के चुनावों में धर्मनिरपेक्ष दलों द्वारा मुस्लिम मतदाताओं को ब्लैकमेल किए जाने को चुनौती दे रही है.
दिल्ली और आसपास की आबोहवा खराब है. इसकी एक बड़ी वजह आस-पास के राज्यों में किसानों द्वारा धान की फसल की खूंट या पराली को जलाया जाना है. क्या है इसका समाधान?
बीएसपी सिर्फ 12 साल पहले यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. लेकिन मायावती के उल्टे पड़ते दांव की वजह से बीएसपी अपने पुराने दिनों की छाया बनकर रह गई है. 2007 के बाद वह लगातार अपनी जमीन गंवा रही हैं.
गणेश शंकर विद्यार्थी की शहादत के 90 वर्षों बाद भी राष्ट्रीय आंदोलन, हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के इतिहास में उनके महत्वपूर्ण योगदानों की सम्यक विवेचना होना शेष है.
नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता घटी नहीं है मगर महज 5 महीने में इतने ज्यादा मतदाताओं ने पाला बदल लिया जो इस बात का संकेत है कि राष्ट्रवाद और धार्मिक जोश की जिन हवाओं ने आर्थिक स्थिति और बेरोजगारी जैसे ‘मामूली’ सरोकारों को बेमानी बना दिया था वे हवाएं अब उलटी दिशा में लौट रही हैं.