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Wednesday, 4 February, 2026
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राजकोषीय घाटे से जुड़े 3 प्रतिशत के लक्ष्य को भूल जाना चाहिए

आखिर हमारे वित्त मंत्रियों को करीब 6 प्रतिशत को 3.5 प्रतिशत बताने की बाजीगरी क्यों करनी पड़ती है? खुले और पूर्ण एकाउंटिंग को बढ़ावा क्यों न दिया जाए ताकि देश को वित्तीय घाटे की वास्तविक तस्वीर मिले?

बाल ठाकरे के सामने नतमस्तक रही बीजेपी ने शिवसेना को कैसे जूनियर बना दिया?

समान तेवर और विचारधारा वाली दो पार्टियां एक साथ फल-फूल नहीं सकती. जब से बीजेपी ने उग्र हिंदुत्व को अपना लिया है तब से शिव सेना की जमीन लगातार सिंकुड़ती जा रही है. अब उसके सामने अस्तित्व का संकट है.

अर्थव्यवस्था इतनी बीमार है कि इसका इलाज होम्योपैथी से नहीं, सर्जरी से ही हो सकता है

आर्थिक संकट केवल सही और साहसी सुधारों से ही दूर हो सकता है, और यह मोदी सरकार अगर यह नहीं कर पाती तो इससे यह आशंका ही सही साबित होगी कि वह अपना जादू गंवा चुकी है.

नीतीश मीडिया के सामने खो रहे हैं आपा, राजनीति में करो करो या मारो की स्थिति

बिहार में बाढ़ के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सहयोगी भाजपा सहित सभी तरफ से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

बहुजनों को शासक बनाने के बीएसपी के सपने का क्या हुआ

भारत में निम्न वर्गों के राजनीतिक उभार को साइलेंट रिवोल्यूशन या मूक क्रांति कहा गया है. इस क्रांति की अग्रणी ताकत बसपा थी, जिसने कभी बहुजनों को शासक बनने का सपना दिखाया था.

झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों की खींचतान

विपक्षी दल साझा रैली-प्रदर्शन करने के बजाय अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन में लगे हुए हैं ताकि जब सीटों के तालमेल की बातचीत हो तो अधिक से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर सकें.

कैसे हुआ केजरीवाल का कायापलट, साबित हो सकते हैं लंबी रेस के घोड़े

केजरीवाल ने मोदी से जंग से फिलहाल पूरी तरह किनारा कर लिया है. वे किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते. वे नहीं चाहते कि दिल्ली के मतदाता फरवरी में जब वोट डालने जाएं तब उनके मन में यह दुविधा हो कि मोदी के पक्ष में वोट दें या उनके पक्ष में.

मंदी से निपटने के लिए सरकार को मनमोहन सिंह से सलाह क्यों लेनी चाहिए

सरकार जब महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती है तो मंदी से निपटने के लिए मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री के अनुभव का लाभ उठाने में क्या बुराई है?

7 तरीके जिनसे इमरान के अमेरिकी दौरे को उनके समर्थकों ने कामयाब साबित किया

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लोगों का दावा कि भारतीय मुसलमानों से लेकर रानी मुखर्जी और अमेरिकी सीनेटर तक तमाम लोगों पर कैसे छा गए उनके वजीरे आज़म इमरान खान.

कश्मीर से 370 हटाकर आखिर क्या हासिल हुआ, जब कश्मीरी ही साथ न हुए

एकीकरण में कश्मीरी कहां हैं? क्या आज वे भारत के साथ पहले से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं, या उनमें अलगाव की भावना पहले से ज्यादा व्यापक और प्रबल हो गई है?

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कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता : राजीव कुमार

गांधीनगर, चार फरवरी (भाषा) अर्थशास्त्री और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बुधवार को कहा कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था एक सशक्त विदेश...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.