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Wednesday, 4 February, 2026
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बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था में लोक- कल्याणकारी योजनाएं कैसे बनेंगी, इसका जवाब है अभिजीत बनर्जी के पास

अभिजीत बनर्जी और उनके दोस्तों ने अर्थशास्त्र को लोगों से असल जिंदगी में जोड़ने का काम किया है. ये लोग वहां पहुंचते हैं जहां नीतियां जमीन से जुड़ती हैं, लोगों पर असर डालती हैं.

गोवध पर पाबंदी लगाने में मुसलमान कभी बाधक नहीं रहे

मुस्लिम नेताओं ने संविधान सभा में मांग की थी कि गोवध पर पाबंदी लगा दी जाए, वरना हिंसा का खतरा बना रहेगा. आजम खान भी चाहते हैं कि गोवध पर रोक लगे. लेकिन सरकार न तब सहमत थी, न अब है.

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी जारी रहेगी जम्मू-कश्मीर में ‘दरबार मूव’ परंपरा

‘दरबार मूव’ की परंपरा ने जम्मू-कश्मीर के सभी हिस्सों के लोगों को आपस में जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह ज़रूरत आगे भी बनी रहेगी.

कैसे रेलवे का निजी हाथों में सौंपा जाना देश को बेचे जाने सरीखा है

भारतीय रेल का करोड़ों लोगों को ‘पीठ पर लादकर’ दिनों-रात का ये सफर तब ही जारी रह सका, जब कई पीढ़ियों के करोड़ों लोगों का खून-पसीना इसमें शरीक हुआ, जिन्होंने इस सफर के लिए जान भी दी और सैनिकों की तरह मोर्चा संभाले रहे.

करीब सवा सदी पुराने अयोध्या- बाबरी मामले में कानूनी दलीलों और बहस पर लगेगी लगाम

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ का अयोध्या स्थित 2.77 एकड़ भूमि के मालिकाना हक को लेकर सुनाया जाने वाला फैसला ऐतिहासिक होगा जो देश की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है.

चुनाव परिणाम किसी सामाजिक असंतोष के होने या न होने का विश्वसनीय पैमाना नहीं है

हर साल दो करोड़ नौकरियां मुहैया कराने के वादे पर आई सरकार इस दिशा में कुछ न कर पाने, बल्कि लाखों लोगों के रोजगार चले जाने के बावजूद फिर सत्ता में आ गई.

नोबेल पाने वाली ओल्गा अगर भारतीय होतीं तो देशद्रोही करार दी जातीं

ओल्गा की स्पष्ट राय है कि पोलैंड को एक सहिष्णु देश बनना चाहिए- एक ऐसा देश जहां अल्पसंख्यकों के साथ कोई ज्यादती न हो. उन्होंने कहा था कि अगर हमने अतीत में ज्यादतियां की हैं, तो हमें इसकी माफी मांगनी चाहिए.

यदि नरेंद्र मोदी को नोबेल चाहिए तो वे इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबी अहमद से सीख लें

अबी अहमद ने भी 2014 के मोदी के समान उम्मीद जगाई थी, लेकिन उन्होंने सचमुच में अच्छे दिन लाने का काम किया है.

निजीकरण से मोदी सरकार को मदद मिलेगी, लेकिन यह राजनीतिक जोखिम से भरा है

इस सकारात्मक पहलू पर जरूर गौर किया जाना चाहिए कि सरकारी परिसंपत्तियों के निजी हाथों में जाने से उनके बेहतर इस्तेमाल और उनकी बेहतर सेवा से व्यवस्थागत लाभ होगा, जो कि निजीकरण का असली मकसद है.

राफेल शस्त्र पूजा पर राजनाथ सिंह की आलोचना राजनीतिक आत्महत्या की तरह है

अधिक समय नहीं बीता है जब लगभग संपूर्ण भारत गणेश प्रतिमाओं को दूध पिलाने के लिए मंदिरों की कतारों में लगा था. तो फिर आज विवाद क्यों?

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लांबासिंगी में केसर की खेती को बढा़वा देने के निर्देश दिये

अमरावती, चार फरवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आधिकारियों को निर्देश दिया कि कंपनियों को लांबासिंगी में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक-निजी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.