आरसीईपी में शामिल न होने का फैसला अपने स्वभाव में राजनीतिक है. शामिल होने पर विपक्ष प्रधानमंत्री के खिलाफ गोलबंद हो जाता- आंदोलन और विपक्षी पार्टियां दोनों ही मोदी के खिलाफ एकजुट हो जाते.
पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा ने वकीलों के इस रवैये के लिए जजों और सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया है. जज इसके लिए जिम्मेदार हैं जो वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरते हैं.
अपने किसानों और डेयरी उद्योग के हितों को देखते हुए भारत ने फिलहाल आरसीईपी से बाहर रहने का फैसला किया है. लेकिन क्या ये कदम अपने उद्योग को बचाने के लिए सही है.
धर्मनिरपेक्षता के इस झीनी चादर को थोड़ी देर के लिए अलग कर दीजिये तो तमाम राजनीतिक दलों का चरित्र लगभग एक समान नजर आता है. इनकी ज्यादातर नीतियां एक समान हो गई हैं.
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन को भाजपा की सत्ता प्राप्ति के आधार के रूप में स्थापित किया था, पर आज भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उनके लिए कोई जगह नहीं है.
अब जब चीन को बड़े दांव वाले युद्ध पर नज़र रखने में व्यस्त किया जा रहा है, यह छोटा पड़ोसी संघर्ष पाकिस्तान को भू-रणनीतिक युद्ध का ज़रूरी सबक सिखा सकता है.