scorecardresearch
Wednesday, 4 February, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

राम मंदिर में दलित पुजारी बनाने से मोदी को क्या मिलेगा

राममंदिर आंदोलन के नेता के तौर पर अशोक सिंघल और आडवाणी का ही नाम दर्ज है. उनके अलावा मुख्य न्यायाधीश गोगोई और पांच जजों की बेंच को भी इतिहास याद रखेगा. लेकिन इन सब के बीच नरेंद्र मोदी कहां हैं?

खराब हवा में सांस लेते इंसान, डूबती नदियां और तैरते न्यायाधीश

एनजीटी ने सरकारों को या संस्था को डांटा यह बात सभी जानते हैं लेकिन अंतिम रूप से आदेश क्या दिया इस पर बात नहीं हो पाती, एनजीटी ने जुर्माना किया यह सभी जानते हैं लेकिन कितना जुर्माना वसूला गया इस पर बात नहीं हो पाती.

राजीव गांधी से सलाह लेकर टीएन शेषन बने थे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त

नेताओं के साथ राजनैतिक दलों को चुनाव आयोग को दंतविहीन समझने की गलती न करने का संदेश देने वाले शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कहानी भी दिलचस्प है.

जिन्ना की टू नेशन थ्यौरी का मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसा दूसरा कोई विरोधी नहीं हुआ

मौलाना यह तक कहने से नहीं हिचके थे कि उनके लिए राष्ट्र की एकता स्वतंत्रता से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है और वे उसका विभाजन टालने के लिए कुछ और दिनों की गुलामी भी बर्दाश्त कर सकते हैं.

नीतीश कुमार को महाराष्ट्र से सबक लेना चाहिए

एक साल बाद होने वाले बिहार चुनाव में अगर नीतीश कुमार की जेडीयू को बीजेपी से एक सीट भी कम मिली तो तय मानिये कि बिहार अगला महाराष्ट्र बनेगा!

मंदिर तो हो गया लेकिन खराब अर्थव्यवस्था को देखते हुए हिंदू राष्ट्रवाद पर अब मोदी सवार नहीं हो सकते

भारत की अर्थव्यवस्था अपने ठहराव की जकड़ को तोड़कर आगे नहीं बढ़ती तो मोदी का कद छोटा हो सकता है. इस गिरावट को थामने के लिए उन्हें बड़े उपाय सोचने होंगे या फिर वे भावनाएं भड़काने के जोखिम की ओर मुड़ सकते हैं.

संरक्षणवादी लॉबी का साथ देकर मोदी सरकार भारत को 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बना सकती

देश अब अपने अंदर ज्यादा देख रहा है. तो सिस्टम उदार और ज्यादा प्रतिस्पर्द्धी कैसे होगी? प्रतिस्पर्द्धी जो प्रतिस्पर्द्धी नहीं उन्हें बाज़ार से बाहर कर रहे हैं. इस तरह तो अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन की नहीं होने वाली!

खालिस्तान की आग भड़काने की इमरान की फंतासी पूरी होने वाली नहीं, क्योंकि सिख समुदाय नादान नहीं

भारत कोई चीनीमिट्टी का नहीं बना है. करतारपुर साहिब का रास्ता खुल गया है और यह हम सबके लिए खुशी का मौका है. खालिस्तान की खातिर उन्माद भड़काने वाले टीवी को बंद करो.

करतारपुर और खालिस्तान: पाकिस्तानी सेना भारत के साथ कॉरिडोर खोलने के लिए क्यों उत्सुक है

पाकिस्तान सेना 1971 के अपमान को नहीं भूली है और भारत के साथ गलत तरीके से खेलने की वो अब कोई कोशिश नहीं करेगा.

इमरान खान की सत्ता को मौलाना की चुनौती लेकिन पीटीआई खूनी उदारवादियों को दोषी ठहराने में व्यस्त

इमरान इतिहास को जिस नजरिए से देखते हैं उसके मुताबिक, खून के प्यासे उदारवादी फासिस्टों ने गांवों पर बमबारी, ड्रोन से हमले और अमेरिकी नीतियों का समर्थन किया, जिनमें ‘दहशतगर्दी के खिलाफ जंग’ भी शामिल है.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

भाजपा सरकार यूरिया की बोरियों का वजन कम करके किसानों से ठगी कर रही: भूपेंद्र हुड्डा

चंडीगढ़, तीन फरवरी (भाषा) कांग्रेस की हरियाणा इकाई के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंगलवार को भाजपा सरकार पर कीमत घटाए बिना यूरिया की...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.