खास लोगों को मिलने वाला ब्लू टिक मेरे विचार में संवाद के मामले में एक किस्म का नस्लभेद है या इसे आप डिजिटल वर्ण व्यवस्था भी कह सकते हैं. ये लोकतंत्र के लिए हानिकारक है.
अयोध्या के कई भाजपाई संत गाय को पशु कहने पर चिढ़ जाते हैं और उपदेश देने लगते हैं कि ‘वह पशु नहीं माता है’. यह बात और है कि ये उपदेश-कुशल संत इस माता के लिए खुद कुछ नहीं करते और करदाताओं के पैसे से ही उसको पालना चाहते हैं.
पवार के राजनीतिक दांव-पेंचों की सूची बड़ी लंबी है. एक समय उनके संबंध शिवसेना से ठीक-ठाक थे, लेकिन बाद में उसी शिवसेना को किनारे करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई. इस बार उन्होंने एक और बड़ा खेल कर दिया.
वसीम अकरम और ब्रिगेडियर राजा रिज़वान, जिन्हें पाकिस्तान की सेना ने पिछले हफ्ते जासूसी के आरोप में फांसी दी थी, जिनको पकड़े नहीं गए होंगे लेकिन दो चीजें गलत हो गईं.
ये एक पहेली है कि देश की आजादी के बाद संविधान के लागू होने के बावजूद जो समुदाय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के मामले में सबसे पीछे रह गया, वही समुदाय संविधान के प्रति सबसे ज्यादा वफादार क्यों है.
अमेरिकी विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने कुछ निगम पार्षदों को सूचित किया कि चुनाव से पहले एक अखबार में उनके कामकाज पर रिपोर्ट छपेगी. पढ़िए इसका परिणाम क्या निकला.