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Saturday, 31 January, 2026
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कोविड के समय हवाई सफ़र आवाजाही का सबसे सुरक्षित ज़रिया है, भारत इस सेक्टर में बड़ी उछाल ला सकता है

कोरोनावायरस के बाद की दुनिया में, जब सोशल डिस्टेंसिंग एक आम बात हो जाएगी, तो कच्चे तेल के सस्ते अंतर्राष्ट्रीय दामों की बदौलत, भारत के एविएशन सिस्टम में उछाल आने वाला है.

कैसे विकसित हुआ नया एंटीजन टेस्ट और कोरोना को हराने में एकजुट है दुनिया

अमेरिका ने एंटीजन टेस्ट को पास कर दिया है यह न केवल पांच मिनट में कोविड-19 संक्रमण का परिणाम देता है बल्कि यह पहले से चले आ रहे आरटीपीसीआर टेस्ट से काफी सस्ता भी है.

बांग्लादेश, चीन, वियतनाम की तरह भारत अपने श्रम कानून के सुधारों में सुरक्षा की जगह आय को प्रमुखता दे रहा है

श्रम बाज़ार में उदारीकरण से श्रमिकों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं. उदाहरण के लिए, भारत की एक औसत कपड़ा कंपनी में 240 कर्मचारी होते हैं, जबकि बांग्लादेश में करीब 800.

लिपुलेख पास से होकर कैलाश मानसरोवर के लिए नई सड़क तैयार, नेपाल क्यों कर रहा है इसका विरोध

#CutTheClutter के 466वें एपिसोड में शेखर गुप्ता कैलाश मानसरोवर और लिपुलेख पास को लेकर भारत और नेपाल के बीच भू-राजनीति के बारे में बता रहे हैं.

वाजपेयी के नेतृत्व में आरएसएस का जलवा था पर मोदी राज में उसकी धमक कम हो गयी है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबदबे का चाहे जो बखान किया जाता रहा हो, आज हकीकत यह है कि भाजपा का वैचारिक संरक्षक यह संगठन नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में हाशिये पर पड़ा दिख रहा है.

कोरोना के दौर में पेश हैं एक नए राहुल जो अर्थशास्त्रियों की ले रहे हैं सलाह, मज़दूरों के हक़ की मांग कर रहे हैं

रघुराम राजन और अभिजीत बनर्जी के साथ राहुल गांधी की बातचीत और साथ ही ज़ूम प्रेस वार्ताओं से साफ़ ज़ाहिर है, कि कांग्रेस लीडर अब वापसी के अंदाज़ में हैं.

सोशलिज्म के आदर्शलोक से नहीं, ‘श्रम कानून’ को उदार बनाने में है मजदूरों का हित

कोविड काल में पैदा हुई परिस्थिति को अवसर के रूप में भुनाते हुए रोजगार सृजन के लिए श्रम कानून की जटिलताओं में ढील देनी जरूरी थी. इसके लिए श्रम कानून के जिन प्रावधानों को निरस्त किया गया है, उससे ना तो लाखों मजदूरों को  पहले कोई कोई लाभ था और ना ही अब कोई हानि होनी है.

नौकरियां अब लाखों लोगों की यादों में बसी कहानियां बनकर ही न रह जाएं, यदि प्रवासी नहीं लौटते तो उत्पादकता भी स्मृति होगी

लाखों लोग ऐसे हैं जो रोजगार को अब यादों का हिस्सा मान कर कामगारों की जमात से अलग हो चुके हैं. बढ़ती आबादी में छोटे वर्कफोर्स के कारण अर्थव्यवस्था की उत्पादकता को झटका लगेगा

वंदे भारत बनाम भारत के बंदे: क्या नरेंद्र मोदी जनता में अपनी सियासी पैठ इतनी जल्दी गंवा रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महामारी के दौर में राष्ट्र के नाम जो संदेश दिए हैं वे मुख्यतः मध्य वर्ग या इलीट तबके को संबोधित रहे हैं, उनमें करोड़ों गरीबों के प्रति हमदर्दी ना के बराबर दिखती है, तो क्या मोदी अपना राजनीतिक अंदाज भूल रहे हैं?

यूपी में श्रम कानूनों में सुधार कर योगी सरकार ने कोरोना संकट का सही इस्तेमाल किया, एमपी भी ऐसा कर रहा

#CutTheClutter के 465वें एपिसोड में शेखर गुप्ता इन्हीं श्रम सुधारों के बारे में बता रहे हैं. वह उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले को बोल्ड कह रहे हैं पर ट्रेडर माफिया को बड़ी चुनौती बता रहे हैं.

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गुज़ारा करने के लिए कर्ज़ा: भारतीय परिवार ज़्यादा बचत करते हैं, फिर भी क्यों हैं कर्ज़ में?

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.

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राजनीति

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सुनेत्रा के कैबिनेट में शामिल होने के निर्णय को लेकर राकांपा (एसपी) से परामर्श नहीं किया गया:सूत्र

पुणे, 30 जनवरी (भाषा) राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार शुक्रवार शाम पुणे से मुंबई के लिए रवाना हो गईं, जहां उनके शनिवार को अपने दिवंगत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.