कोरोनावायरस की वजह से चीन को दुनिया ने दरकिनार किया है और डोनाल्ड ट्रंप ने कोविड-19 के लिए पूरी तरह से चीन को दोषी ठहराया है और खुलेआम खिलाफत की है उसके बाद चीन बौखलाया हुआ है.
देश में बढ़ती आबादी को लेकर उच्चतम न्यायालय भले ही समय-समय पर चिंता व्यक्त करता रहा है लेकिन इस स्थिति से निपटने के लिये कानून बनाने जैसा कोई निर्देश या सुझाव उसने अभी तक सरकार को नहीं दिया है.
फ्रांस की संसद में अब एक कानून है जिसके तहत सोशल मीडिया और ट्विटर, फेसबुक व गूगल जैसी टेक कम्पनियों के लिए अनिवार्य है कि फ्लैग किए जाने के 24 घंटे के भीतर, नफ़रत भरी सामग्री हटा लें.
राष्ट्रीय स्तर की इस भयावह मानवीय त्रासदी के प्रति मोदी सरकार ने जो शर्मनाक रवैया अख्तियार किया, उसे ‘असंवेदनशील’ भर कहना स्थिति की वास्तविकता से मुंह फेरना होगा.
अयोत्तिदास ने भी दलितों की हिंदुओं से पृथक पहचान बनाने पर जोर दिया था. उन्होंने ब्रिटिश सरकार से दलितों के लिए राजनीतिक अधिकार मांगे और 1898 में बौद्ध धम्म स्वीकार कर लिया.
विधानसभा चुनाव सिर पर होने के बावजूद बिहार के लाखों प्रवासी मजदूरों को लेकर प्रदेश के सत्ताधारी गठबंधन में उस तरह की चिंता नहीं दिख रही है, जो सामान्यत: होनी चाहिए. क्या हो सकती है इसकी वजह?
सरकार अगर इस आपदा को अवसर में बदलना चाहती तो उसे बिना राजनीतिक राग-द्वेष के केरल व राजस्थान जैसे राज्यों के कोरोना से लड़ने के सफल माॅडलों का, जो सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के बेहतर इस्तेमाल से ही संभव हुए हैं, देश भर में उपयोग करना चाहिए था.
कांग्रेस ने कल्याणकारी तंत्र की सामग्री तैयार कर रखी थी. प्रधानमंत्री ने बस अपनी रेसिपी के अनुसार उनको परस्पर मिलाने और मोदी 'तड़का' लगाकर अपना बताते हुए बेचने का काम किया.