अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद ऊंची जाति के भारतीय जाग गए. लेकिन क्या हम उनकी भारत में जाति वर्चस्व खत्म करने की लड़ाई में दलितों के साथ शामिल होने की कल्पना कर सकते हैं?
अर्थव्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएं जब सब कुछ विफल हो जाएंगी, तब कट्टर हिंदुत्व चेहरे की तुलना में भाजपा के लिए बचने के लिए बड़ा मुद्दा क्या होगा?
आर्थिक गिरावट में विकासशील देशों पर ज़्यादा बुरा असर हो सकता है. लेकिन पीएम मोदी की अगुवाई की स्थिरता और लचीलापन, यक़ीनन हमें इस तूफान से निकालकर शांत पानी की ओर ले जाएगा.
ऑनलाइन कक्षाएं माध्यमिक स्तर के लिए अच्छी साबित हो सकती हैं. छोटे बच्चों को शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है और बड़ों को लैब और प्रोजेक्ट स्पेस की जरूरत होती है.
कोरोना काल ने जनसंख्या की वास्तविक भौगोलिक स्थिति की सटीक और केंद्रीकृत जानकारी नहीं होने से उपजी खामियों को उजागर किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सही जनसांख्यिकी स्थिति को जाने बिना आकस्मिक विपदाओं से निपटना संभव हो पायेगा?
इमरजेंसी की तारीफ में कहा जाता था कि इसमें रेलगाड़ियां वक़्त पर चलने-पहुंचने लगी थीं, लेकिन आज लॉकडाउन के दौर में तो रेलगाड़ियां गायब हो रही हैं और यात्री शवों के रूप में अपने ठिकानों पर पहुंच रहे हैं .
राष्ट्र निर्माण को ध्यान में रखते हुए नेहरू ने सभी मतभेदों को अलग रख तीन राजनीतिक विरोधियों को पहली कैबिनेट में शामिल किया था. क्या मोदी ऐसा कोई संदेश देंगे?
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका और न्यायाधीशों के बारे में पोस्ट की गयी आपत्तिजनक टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुये एक सांसद और एक पूर्व विधायक सहित कम से कम 49 व्यक्तियों को न्यायालय की अवमानना के नोटिस दिये हैं.
कोविड-19 ने आईटी क्रांति का जाप करने वाले इस देश का डिजिटल डिवाइड उजागर कर दिया है. संकट के इस दौर में देश का एजुकेशन सेक्टर इस असमानता का सबसे बड़ा उदाहरण बन कर उभरा है.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.