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Tuesday, 14 April, 2026
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हाथरस रेप मामले में लड़की अगर ऊंची जाति से होती तो क्या पुलिस, सरकार और मीडिया ऐसे ही पेश आता

क्या रातोंरात लड़की की लाश उसके घरवालों की मौजूदगी के बगैर जला दी जाती? पुलिस एफआईआर लिखने में आठ दिन लगाती?

कांग्रेस को मौसमी विरोध बंद करने की जरूरत, जीएसटी से लेकर कृषि बिल तक की नींव रखी थी मनमोहन सिंह ने

कांग्रेस के पास मौका है कि वह भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों और श्रम कानूनों पर अपना रुख साफ करे. मोदी सरकार द्वारा सरकारी संपत्तियों की बिक्री पर स्पष्ट रुख अपनाए.

हाथरस की दलित महिला का रेप और उसकी मौत के बाद पुलिस द्वारा जबरदस्ती दाह संस्कार ने उसे एक और मौत दी है

बलात्कार, पुरुषों की यौन इच्छा या फिर औरत ने क्या पहना था या वो क्या कर रही थी के बारे में नहीं है. बलात्कार हमेशा अपनी ताकत, वर्चस्व और नियंत्रण दिखाने के बारे में है. हमारे देश के संदर्भ में ये जाति में भी तब्दील हो जाता है.

अमेरिका के लिए वोट करें या भारत-अमेरिका संबंधों के लिए वोट करें- क्यों भारतीय अमेरिकी और उनकी फंडिंग मायने रखती है

राष्ट्रपति पद के लिए 2012 के ओबामा-मिट रोमनी मुकाबले में भारतीय अमेरिकियों के वोट पर उतना ध्यान नहीं दिया गया था, और ओबामा ने नौकरियों को ‘बफेलो से बैंगलोर’ भेजने के लिए रोमनी पर निरंतर हमले किए थे.

ऑनलाइन कक्षाओं में कोई बच्चा पीछे नहीं छूटे, इसके लिए जिन घरों में इंटरनेट नहीं है इसका पता लगाने के लिए SECC डेटा का...

यूडीआईएसई (शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली) की 2017-18 की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में केवल 28.7 प्रतिशत स्कूलों और शहरी भारत में 41.9 प्रतिशत स्कूलों के पास ही उपयोग में लाने योग्य कंप्यूटर सुविधाएं थीं.

बिहार में का बा- चुनावी वादों से एक-दूसरे को पटखनी देने की जुगत में राजनीतिक दल

बिहार में चुनावीमहाभारत का सियासी पर्दा भले ही उठ गया है, मगर कई अहम सवालों के जवाब अनुत्तरित रहने के कारण चुनाव नतीजे का ऊंट इस बार किस करवट बैठेगा. 10 नवंबर तक इंतजार करना होगा.

घाटी में जमात-ए-इस्लामी पर चुप्पी की कीमत वकील-एक्टिविस्ट बाबर कादरी जैसे कश्मीरियों को चुकानी पड़ती है

चुप्पी की साजिश इतनी गहरी है कि जमात-ए-इस्लामी की घृणा के पात्र फारूक़ अब्दुल्ला जैसे नेता भी उस पर लगे प्रतिबंध का विरोध करते हैं.

मोदी सरकार को भारतीयों के लिए COVID वैक्सीन मुफ्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए, इसका खर्चा बस 80,000 करोड़ रुपये है

सामान्य लोगों को लाखों करोड़ रुपयों से शायद ही वास्ता पड़ता होगा इसलिए वे इतनी बड़ी रकम के बारे में सुन कर घबरा सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक खर्चों के मामले में 80 हज़ार करोड़ कोई इतनी बड़ी रकम नहीं होती.

हिंदू संगठनों में कोरोना महामारी के बीच काशी और मथुरा के ‘विवादों’ को हवा देने की बेसब्री क्यों है

जो लोग भी देश के बहुलवादी लोकतांत्रिक व संवैधानिक स्वरूप को सुरक्षित रखना चाहते हैं, इस बेहिस उम्मीद के सहारे बैठे रहकर गलती करेंगे कि एक दिन बहुसंख्यक समुदाय स्वयं ऐसे मुद्दों को बारंबार हवा देने की कोशिशों के खिलाफ खिलाफ उठ खड़ा होगा.

कृषि विधेयकों के खिलाफ आखिरकार विपक्ष एकजुट हुआ है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है

ट्विटर पर निडरता के साथ अपनी बात रखने भर से काम नहीं चलने वाला. विपक्ष को बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र सीएए-विरोधी आंदोलन से सीख लेनी चाहिए.

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नवाचार को अपनाने के साथ-साथ मानवीय पहलू को बनाए रखें छात्र: राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को एम्स, राजकोट के स्नातक छात्रों को नवाचार को अपनाने के साथ-साथ मानवीय पहलू...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.