राम मंदिर का मुद्दा अस्सी के दशक तक बीजेपी और उसकी पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ या फिर इसके मूल संगठन आरएसएस का मुख्य मुद्दा नहीं था. यह मुद्दा मूल रूप से अखिल भारतीय हिंदू महासभा का था जिसे बीजेपी ने बाद में अपना लिया.
आंबेडकर गांधी के राम और राम राज्य के विचार से तनिक भी प्रभावित नहीं थे. बल्कि राम और रामराज्य को लेकर उनकी दृष्टि आलोचनात्मक रही और इसे उन्होंने विस्तार से दर्ज भी किया है.
पूर्व उप-मुख्यमंत्री बेग कह रहे हैं—एक साल पहले अनुच्छेद 370 को हटाते हुए दावा किया गया था कि इससे वहां के लोगों में राष्ट्रवादी भावना बढ़ेगी मगर हकीकत में तो इसके कोई लक्षण दिख नहीं रहे हैं.
कुछ लेखकों, स्तंभकारों ने बहुसंख्यकवाद यानी मैजोरिटेरियन राजनीति के खतरों की आशंका जताई है. लेकिन भारतीय संविधान की संरचना ऐसी है कि सभी समुदायों के लिए न्याय और खुशहाली का पर्याप्त प्रायोजन है.
अमेरिकी कांग्रेस नया कानून बना भी ले और ‘बिग टेक’ के एकाधिकार को तोड़ने की कोशिश में एंटीट्रस्ट कार्रवाई भी करे तो भी वह इनकी बड़ी ताकत का सीधा मुक़ाबला नहीं कर पाएगी.
सांसद गणेश सिंह पटेल शुरू से ही मंडल आयोग की सिफारिशों के प्रबल समर्थक रहे हैं. वे मूल रूप में समाजवादी विचारधारा के समर्थक हैं और मंडल कमीशन के समर्थन में हुए आंदोलन में भी उन्होंने हिस्सा लिया था.
कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूदू से लेकर अमेरिकी नेता बेतो ओ’रुर्क तक दुनियाभर में नेताओं का दाढ़ी रखना या न रखना उनके बारे में खास संदेश देता रहा है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफ़ेद दाढ़ी या काँग्रेस नेता राहुल गांधी का सफाचट चेहरा भी कुछ-न-कुछ कहता है
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना के 11 साल पुराने मामले पर सुनवाई नए सिरे से करने का फैसला किया है. उम्मीद है,अदालत की निष्पक्ष सुनवाई से कुछ बहू प्रतीक्षित सवालों के जवाब मिलेंगे.
शिमला, 28 जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश सरकार ने दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला मार्गों पर नियमित उड़ान सेवाएं शुरू करने और उनके निरंतर संचालन को सुनिश्चित...