Sunday, 26 June, 2022
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आम बजट 2018: सरकारी निवेषों को लाभकारी बनाना है जरूरी

आम धारणा के विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी के बजट की असली समस्या टैक्सों के चलते नहीं है बल्कि सरकारी निवेशों पर खराब लाभ के कारण...

272 के बिना मोदी मोदी नहीं, इसलिए उन्होंने 2019 के लिए अभी से फूंका चुनावी बिगुल

भाजपा को पता है कि जिन राज्यों में 2014 में उसने पूरी की पूरी सीटें बटोर ली थीं वहां फिर यह करिश्मा असंभव है....

बजट 2018-19: मौका कुछ भी हो, निचोड़ने के लिए मध्यवर्ग तो है ही!

मध्यवर्ग से टैक्स निचोड़ने के मामले में सरकारें हमेशा बेरहम रही हैं, क्योंकि न तो उसकी कोई लॉबी होती है और न ही उसे...

बजट 2018-19: आखिर सैन्य बजट के प्रति सौतेला बरताव क्यों?

रक्षा बजट का छोटा आकार खासतौर से इसलिए समझ से परे है क्योंकि सैन्य तैयारियों को लेकर भाजपा दूसरे दलों से ज्यादा फिक्र जताती...

जब मोदी पहुंचे दावोस : भारत की तरक्की की कहानी सिर्फ बातों तक सीमित

दावोस में भारतीय सत्र के दौरान हॉल जब तक केवल भारतीयों से भरा रहेगा, तब तक दावोस में भारत आपस में एक-दूसरे की तारीफ करने वालों का ही क्लब बना रहेगा.

“पद्मावत” के विरोध में हो रहा पागलपन ठीक वैसा ही जैसा कुरान की आलोचना पर

यह बहुत ही दुखद बात है कि हिन्दू कट्टरपंथी भी मुस्लिम कट्टरपंथियों के समान व्यवहार कर रहे हैं. लेकिन फिर कट्टरपंथी तो कट्टरपंथी ही...

नेहरू नहीं चाहते थे राजेंद्र बाबू राष्ट्रपति बनें, उनकी पसंद थे सी. राजगोपालाचारी

लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल के हस्तक्षेप के बाद नेहरू को मानना पड़ा. पटेल को डर था कि कहीं राजेंद्र बाबू राजाजी की खातिर चुनाव से हटने को राजी न हो जाएं.

मुकेश अंबानी ने कम समय में ही दिलायी जियो को अपार सफलता लेकिन…

टेलिकॉम व्यवसाय में कदम रखकर मुकेश अंबानी ने जनता को लाभ तो खूब पहुंचाया मगर इस उद्योग में स्वस्थ वातावरण भी उतना ही जरूरी...

दावोस में अपने पहले भाषण में मोदी ने इशारे से चीन और ट्रम्प पर साधा निशाना

दावोस के भाषण में मोदी द्वारा डेटा को वैश्विक शक्ति की एक नई करेंसी बताना एक प्रमुख मुद्दा था और ऐसा करने वाले यह शायद पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं.

फतवे और धर्मग्रंथ सिर्फ संग्रहालय में होने चाहिए, जिंदगी के रोज-रोज के मामलों में नहीं

उदारवादियों की तरह मैं यह नहीं कहती कि फतवा गैर-इस्लामी चीज है. हकीकत तो यही है कि अब तक जो भी फतवे जारी किए...

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‘जिताऊ उम्मीदवारों’ की बीमारी के राष्ट्रपति चुनाव तक आ पहुंचने के मायने

लेकिन आज बड़ा सवाल इसके बदले यह है कि क्या राष्ट्रपति के, जिन्हें देश का प्रथम नागरिक माना जाता है और जिनके पद में देश की प्रभुसत्ता निहित होती है, चुनाव को भी ऐसे ओछे राजनीतिक मंसूबों व जिताऊ समीकरणों से जोड़ा जाना नैतिक है? और क्या इससे इस पद का गौरव बढ़ता है?

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असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार, पांच लोगों की मौत, 22 लाख लोग प्रभावित

गुवाहाटी, 26 जून (भाषा) असम में बाढ़ से पांच और लोगों की मौत हो गयी और 25 जिलों में 22 लाख से अधिक लोग...

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बाढ़ प्रभावित असम में विधायकों की ‘छुट्टी’ और कैसे MVA मॉकटेल तेज कॉकटेल के खिलाफ है

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून.