बेहतर होता की केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल यह कहकर किसान आंदोलन का अनादर करने की कोशिश न करते कि उसके पीछे वामपंथियों का हाथ है क्योंकि ऐसा करने से हम यह नहीं समझ पाएंगे कि किसानों में आक्रोश क्यों है.
बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन ने दिखा दिया है कि हिमंता बिस्वा सरमा एक चुनावी मास्टरमाइंड बनकर उभरे हैं जिसकी कि मोदी और अमित शाह को ज़रूरत है.
एमएसपी जैसे उपायों को लागू करने के लिए भारत एक तरफ खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा और दूसरी ओर डब्ल्यूटीओ कानून में 'व्यापार विरूपणकारी' करार दी गई नीतियों के बीच संतुलन बनाकर चलता रहा है.
सीडीएस जनरल बिपिन रावत नौसेना दिवस समारोह को छोड़कर योगी आदित्यनाथ के गोरखनाथ मठ से जुड़ी संस्था के कार्यक्रम में भाग लेने चले गए, अमित शाह राम मंदिर भूमि पूजन में शामिल नहीं हुए... ये घटनाएं बहुत कुछ कहती हैं.
यूपी में भाजपा को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आप में एक जननायक बन गए हैं, और अपनी 'मोदी नंबर 2' की छवि गढ़ने में जुटे हुए हैं.
अगर भारत को एक गतिशील सामाजिक लोकतंत्र बनना है, तो उसे अनुशासित टैक्स व्यवस्था तैयार करके कॉर्पोरेट की ताकत पर लगाम लगाते हुए सरकारी पूंजीवाद की राह पकड़ने से बचना होगा.
वैसे, एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर उभरता है— लोकतंत्र आर्थिक वृद्धि के लिए अच्छा है या बुरा? कितना लोकतंत्र अच्छा है और कब यह जरूरत से ज्यादा हो जाता है? क्या सीमित लोकतंत्र जैसी भी कोई चीज होती है?
अगर गोरखनाथ मठ से जुड़ी संस्थाओं को भारतीय सेना ने अपने लिए निषिद्ध संस्थाओं की सूची में नहीं शामिल किया है, तो उसे दारुल उलूम देवबंद से जुड़ी संस्थाओं को भी इस सूची में शामिल नहीं करना चाहिए.