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Sunday, 15 March, 2026
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ममता बनर्जी दीदी से बंगाल की बेटी क्यों बन गईं

पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ‘बंगाल की बेटी’ को बाहरी हमलावरों से बचाने का नारा देकर मतदाताओं की भावनाओं को उभारने की कोशिश में जुटी है.

क्यों एकजुट रहने के लिए कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव हारने होंगे

इंदिरा ने 1969 और 1978 में, कांग्रेस के दिग्गजों को चुनौती दी थी और पार्टी को विभाजित कर दिया था. राहुल या प्रियंका के पास अपनी दादी वाला करिश्मा नहीं है.

शहतूत एग्रीमेंट, चमोली और अफगानिस्तान के बीच संबंध और आत्मबोधानंद के अनशन के मायने क्या है

मातृसदन के साधुओं ने एकबार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.जीडी अग्रवाल की मांगों और उन मांगों पर सरकारी दावों – वादों की याद दिलाया है. जबकि प्रधानमंत्री विकास की नई इबारत लिखने के लिए अफगानिस्तान के साथ शहतूत एग्रीमेंट  पर हस्ताक्षर किया है.

1971 के युद्ध के 50 साल होने पर जिंदगी बचाने वाले सैशे और उसे लोगों तक पहुंचाने वाले बंगाली डॉक्टर को न भूलें

भले ही आज हर कोई ओआरएस जानता है, जिसे मेडिकल जर्नल लांसेट ने 20वीं शताब्दी में 'चिकित्सा क्षेत्र की संभवत: सबसे महत्वपूर्ण प्रगति' कहा है लेकिन डॉ. दिलीप महालनबिस को याद करने वाले कम ही लोग होंगे.

भारत को सोचना चाहिए की सकारात्मक विकास दर के बावजूद वह चीन की तरह गरीबी को क्यों नहीं खत्म कर पा रहा

भारत के लिए प्रगति की रफ्तार में गिरावट ही चिंता की बात नहीं है, वह उन दूसरे देशों से आगे निकलने में भी सुस्त हो गया है जो आर्थिक वृद्धि और विकास के मामले में चीन की दूर-दूर तक बराबरी नहीं करते

वैक्सीन पर संदेह से लेकर हड़बड़ी तक, टीकाकरण के दूसरे चरण में मोदी सरकार के सामने क्या है चुनौतियां

जब वरिष्ठ नागरिकों और कोमोर्बिडिटी के शिकार 45 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगेगी तो टीके लगने के बाद इसके प्रतिकूल असर का संभावित खतरा बढ़ सकता है.

राजद्रोह कानून के जरिए अब नागरिक चेतना को नहीं दबाया जा सकता, मोदी सरकार को यह समझना होगा

मोदी सरकार के पिछले छह-सात सालों में बढ़ते गये उसके राजनीतिक व सांप्रदायिक दुरुपयोग ने उसे न सिर्फ बुरी तरह डिमॉरलाइज किया है बल्कि उसके प्रोफेशनलिज्म को भी बहुत धक्का पहुंचाया है.

हैबियस पोर्कस: ‘जेल नहीं बेल’ के सिद्धांत का कैसे हमारी न्यायपालिका गला घोंट रही है

हमारी स्वाधीनता की सुरक्षा करना न्यायपालिका की बड़ी ज़िम्मेदारी है और इसके लिए ‘हैबियस कॉर्पस’ की व्यवस्था का सहारा लिया जाता है लेकिन आज मजिस्ट्रेट इस तरह फैसले कर रहे हैं मानो नियम तो ‘जेल देने का ही है, बेल देना तो उनके ओहदे के दायरे से बाहर है’.

महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे समृद्ध राज्यों के भीतर भी काफी असमानता, विकास का मॉडल एक जैसा नहीं: स्टडी

अधिक आर्थिक विषमता कहानी का सिर्फ एक पहलू है. इसका एक दूसरा पहलू है- राज्यों के बीच असमानता जो उससे कहीं अधिक है.

एलएसी पर भारत का राजनीतिक मकसद तो कुछ हद तक पूरा हुआ, अब उसे सीमा विवाद के अंतिम समाधान की कोशिश करनी चाहिए

भारत ने चीन के लिए गतिरोध तो पैदा कर दिया मगर उसने 1959 वाली अपनी दावा रेखा का जो पेंच डाल दिया है उसका भारत को निबटारा करना ही पड़ेगा.

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जब धार्मिक पहचान और आरक्षण टकराते हैं—अदालतें क्या कह रही हैं?

क्या किसी ने सच में यह जांचा कि चर्च जाने के बावजूद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज़ बनाए रखे थे या नहीं? यह पता नहीं है, क्योंकि इसके लिए किसी व्यक्ति की निजी ज़िंदगी में और गहरी जांच करनी पड़ती, और कोई भी राज्य इतने लोगों की निजी ज़िंदगी में इतना अंदर तक नहीं जा सकता.

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पश्चिम एशिया संघर्ष के नाजुक माहौल में भी ‘नादानी’ से बाज नहीं आ रहे राहुल गांधी : मोहन यादव

नेपानगर, 15 मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.