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Wednesday, 25 February, 2026
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महामारी के बीच में सेना के एक डॉक्टर का तबादला, भारत के सिविल-सैन्य रिश्तों के बारे में बहुत कुछ कहता है

मेजर जनरल वासु वर्धन के तबादले पर, रक्षा मंत्रालय और सेना की प्रतिक्रिया, सभी के लिए एक संकेत है कि अगर वो नहीं झुकते, तो उन्हें क्या क़ीमत चुकानी पड़ सकती है, भले ही उनका रुख़ वर्दी के सबसे ऊंचे और क़ीमती मूल्य- नैतिक ईमानदारी की मर्यादा को बनाए रखता हो.

मोदी को अब और स्वीकार करना क्रूरता को स्वीकार करना है

यह कहना है कि महामारी एक ‘अनदेखे दुश्मन’ का काम है, जिसके खिलाफ सरकार दुर्भाग्यवश ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है, कुछ और नहीं ये स्वीकारना ही है कि सरकार विफल रही है.

RSS को क्लीन चिट नहीं- अपनी पीठ खुद ठोक रहे भाजपा नेताओं को भागवत का भाषण फिर से सुनना चाहिए

हालात की सकारात्मक तस्वीर पेश करने वाली अपनी ही कहानी पर यकीन कर रहे भाजपा नेताओं के विपरीत, अपने कई कार्यकर्ताओं को कोविड महामारी में गंवा चुका आरएसएस जो जमीनी हकीकत सामने ला रहा है वह कहीं ज्यादा सकते में डालने वाली है .

आखिर क्यों हर बार न्यायपालिका को हस्तक्षेप कर कार्यपालिका को नींद से जगाना पड़ता है

न्यायपालिका का चाबुक चले बगैर कार्यपालिका और नौकरशाही गंभीर समस्याओं के मामले में भी सक्रिय नहीं होती है और इस वजह से निरीह जनता को तमाम परेशानियों से रूबरू होना पड़ता है.

सेंट्रल विस्टा में सुधार की जरूरत है, वो 7 गैर-कोविड कारण जहां मोदी सरकार ने गलती की

सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण, विशाल पैमाने वाली परियोजना को, जो गोपनीयता के पर्दे में छिपी है और जिसे जनता की नज़रों से दूर रखा गया है उसे क्या महामारी के बीच लागू किया जाना चाहिए जबकि एक-एक रुपया देश की मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाना चाहिए?

जीवनदायिनी नदियों से लेकर पूरा विंध्य क्षेत्र इस बात का सबूत है कि कैसी राजनीति घातक है और कौन सी असरदार

उत्तर प्रदेश और बिहार में कोविड त्रासदी की मूल वजह राजनीति व अर्थनीति में छिपी है. राजनीतिक सत्ता, और आर्थिक व सामाजिक संकेतकों के मामलों में जो क्षेत्रीय असंतुलन है वह गंभीर संकट का कारण है.

गंगा में बहती लाशें एक बड़े रंगमंच का हिस्सा हैं, जहां हर कोई अपने तय डायलॉग बोल रहा है

रंगमंच सजा हुआ है, किनारे पर कुछ विदुषक भी खड़े हैं, आईटी सेल ने उन्हे स्क्रिप्ट थमा दी है जिस पर लिखा है- सरकार को कोसने से क्या होगा जब समाज ही भ्रष्ट है, जो अपने सगे को गंगा में फेंक रहा है.

गंगा नदी भारत का इम्युनिटी बूस्टर हुआ करती थी, हम उसे सेल्फी प्वाइंट बनाकर तस्वीरें खींच रहे हैं

उत्तराखंड में गंगा किनारे आकार ले रहे ऑल वेदर रोड पर कई जगह सेल्फी प्वाइंट बनाए गए हैं. ताकि गंगा पर पर्यटन बढ़ाया जा सके. तीर्थाटन से पर्यटन की ओर जाती नीतियां गंगा के हर प्रमुख स्थल पर नजर आती है.

मौतों की तादाद को छिपाना बेकार है, कोविड के कहर से यूपी के गांवों को बचाना राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए

यूपी के ग्रामीण अंचलों में कोविड कैसा कहर बरपा रहा है, इसका अनुमान सरकारी आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता.

भाजपा ने अब पूरी तरह से कांग्रेसी संस्कृति को अपना लिया है, असम इसका ताजा उदाहरण है

आलाकमान वाली संस्कृति और शीर्ष नेतृत्व के पूर्वाग्रहों ने हिमंता बिस्वा सरमा को 2015 में कांग्रेस से अलग होने पर मजबूर किया था. विडंबना यह है कि अब भाजपा में इसी संस्कृति ने उन्हें असम की ऊंची गद्दी पर बैठा दिया है.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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जामिया विश्वविद्यालय ने वायरल ‘निकाह’ नोटिस को फर्जी बताया, शिकायत दर्ज कराई

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मंगलवार को एक परिपत्र जारी कर सोशल मीडिया पर प्रसारित उस अधिसूचना का खंडन किया,...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.