ताजा घटनाक्रम यही संकेत देता है ‘वक्त की कसौटी पर खरा उतरा’ भारत-रूस संबंध सिकुड़ गया है और इसकी वजह यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं की पर्याप्त परवाह नहीं कर रहे हैं.
कांग्रेस पार्टी ने असम में जो चुनावी रणनीति अपनाई वह 2 मई को नतीजों की घोषणा के बाद कामयाब साबित हो या नहीं, मगर राहुल गांधी इसे आगे आजमाने पर विचार कर सकते हैं.
ऐसा लगता है कि आंदोलन शुरू करना तो आसान है मगर उसकी दिशा को नियंत्रित करना मुश्किल है. यही वजह है कि लोगों ने जहां दमनकारी शासकों का तख़्ता पलटकर नये शासकों को बैठाया उनमें से कई जगहों में उनकी किस्मत नहीं बदली.
ज्ञानवापी मस्जिद पर वाराणसी की जिला अदालत का आदेश इस उम्मीद को तोड़ता है कि अयोध्या में जो कुछ हुआ उसे अब दोहराया नहीं जाएगा, गड़े मुर्दों को उखाड़ते रहना विनाश को बुलावा देना ही है.
जब पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) ने, ज़मीन और समुद्र के रास्ते भारत से चीनी, कपास, और कपास के धागों के आयात को मंज़ूरी दी, तो हमने ये मान लिया कि भारत-पाकिस्तान मिलनसारी के पुराने अच्छे दिन लौट आए हैं.
ट्विटर स्पेस पर भारत-पाकिस्तान के बारे में कोई भी बात हो तो स्थिति किसी सड़क हादसे के बाद वाले एकदम खांटी देसी माहौल जैसी हो जाती है. दो लोगों की मोटर बाइक आपस में टकरा गई और 100 लोग सिर्फ यह देखने के लिए जमा हो गए कि आखिर चल क्या रहा है.
दूसरे विश्व युद्ध में जर्मन सेना को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि उसकी दूसरी पंक्ति के कमांडरों में पूरा तालमेल था और वे उसकी रीढ़ की मजबूत हड्डी साबित हुए.
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.