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Saturday, 17 January, 2026
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‘अशराफ बनाम पसमांदा’- जातिगत भेदभाव से जूझ रहे मुस्लिमों में कैसे जारी है सामाजिक न्याय का संघर्ष

लगभग 13 से 15 करोड़ की जनसंख्या वाले देशज पसमांदा समाज की यह अनदेखी किसी भी रूप में देश और समाज के हित में नहीं है.

‘खून के धब्बे धुलेंगे कितनी बरसातों के बाद’- लखीमपुर मामले में भारतीय मीडिया की साख फिर हुई तार-तार

जनसंचार के माध्यम और जनमत के बीच खाई का पैदा होना हमारे लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है. यह सेंसरशिप से भी बुरा है.

मोदी ‘सब चंगा सी’ की तरह व्यवहार कर और लखीमपुर खीरी पर चुप रहकर बच नहीं सकते

मोदी ने लखीमपुर खीरी कांड पर चुप्पी साध कर और अपनी सरकार का महिमागान करके साफ कर दिया कि वे एजेंडा को ‘हड़पना’ चाहते हैं और वही सब करना चाहते हैं जिसमें वे माहिर हैं— भुलक्कड़ी, हठ और लीपापोती.

50 साल पहले IAF की उस ‘बाउंस’ पार्टी में शरीक न होता, तो इंडियन आर्मी को अपनी सेवाएं नहीं दे पाता

उस रात भारतीय वायुसेना के ‘स्पिरिट’ में न बहा होता तो आज मैं आपको यह कहानी सुनाने के लिए मौजूद न होता.

तेजी और मंदी शेयर बाजार का चरित्र है, क्या ये फिर गिरेगा

शेयर बाजार का इतिहास गवाह है कि जब यह बुरी तरह गिरता है तो उस समय ही बाद में आने वाली तेजी की नींव भी रखी जाती है.

खरीफ की अधिक खरीद की वजह सिर्फ पंजाब नहीं, तेलंगाना के आंकड़ों पर तो नजर डालिए

भारत में पैदा हुआ लगभग आधा (49.12 प्रतिशत) चावल, सरकारी एजेंसियों ने ख़रीद लिया. देश में किसी भी फसल का आधा उत्पादन सरकार द्वारा ख़रीद लिया जाना, इस बात को दर्शाता है कि मुक्त बाज़ार निष्क्रिय पड़ा हुआ है.

क्या PIL वाकई एक उद्योग की शक्ल ले चुकी है या नौकरशाही और सरकार इससे असहज महसूस कर रही

केंद्र सरकार ने जनहित याचिका दायर करने वाले कुछ संगठनों पर समानांतर सरकार चलाने के प्रयास और कुछ लोगों द्वारा इस प्रक्रिया को पेशा बनाने के आरोप लगाए हैं.

दुविधा में G-22: कांग्रेस में रहकर टमाटर के हमले झेले या ममता की TMC का रुख करें

जी-22 के सदस्यों की फिलहाल जो हालत है वह फिल्मी खलनायक अजित के मशहूर डायलॉग ‘लिक्विड इसको जीने नहीं देगा, और ऑक्सीज़न इसको मरने नहीं देगा’ वाली है, गांधी परिवार उन्हें कांग्रेस में रहने नहीं देगा और उनकी वफादारी तथा वैचारिक निष्ठा उन्हें पार्टी छोड़ने नहीं देगी.

‘अभियान किताब दान’ की अब तक की यात्रा उम्मीद जगाने वाली, लोगों के सहयोग से पूर्णिया में कैसे खड़ा हुआ जनांदोलन

बिहार के पूर्णिया जिले के आईएएस राहुल कुमार ने अभियान किताब दान की अनोखी पहल शुरू की है. इस पहल ने एक क्रांति को जन्म दिया है. दो साल से भी कम समय में इस अभियान के तहत 1 लाख 30 हजार से अधिक पुस्तकें मिल चुकी हैं.

पंजाब में चन्नी से UP में गोंड तक- अंग्रेजी की एक नर्सरी राइम इनके उत्थान को सही ढंग से समझाती है

कांग्रेस और भाजपा इस समय भारत के दलित समुदायों को कोई न कोई राजनीतिक पद देकर उनके जरिये अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं. लेकिन क्या उन कुर्सियों को कोई शक्ति मिली हुई है?

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चंदौली में पिकअप वाहन ने मोटरसाइकिल सवार दंपति को मारी टक्कर, दोनों की मौत

चंदौली (उप्र), 16 जनवरी (भाषा) चंदौली जिले के बबुरी थाना क्षेत्र में शुक्रवार शाम तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने मोटरसाइकिल सवार दंपति को जोरदार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.