मोदी ने लखीमपुर खीरी कांड पर चुप्पी साध कर और अपनी सरकार का महिमागान करके साफ कर दिया कि वे एजेंडा को ‘हड़पना’ चाहते हैं और वही सब करना चाहते हैं जिसमें वे माहिर हैं— भुलक्कड़ी, हठ और लीपापोती.
भारत में पैदा हुआ लगभग आधा (49.12 प्रतिशत) चावल, सरकारी एजेंसियों ने ख़रीद लिया. देश में किसी भी फसल का आधा उत्पादन सरकार द्वारा ख़रीद लिया जाना, इस बात को दर्शाता है कि मुक्त बाज़ार निष्क्रिय पड़ा हुआ है.
केंद्र सरकार ने जनहित याचिका दायर करने वाले कुछ संगठनों पर समानांतर सरकार चलाने के प्रयास और कुछ लोगों द्वारा इस प्रक्रिया को पेशा बनाने के आरोप लगाए हैं.
जी-22 के सदस्यों की फिलहाल जो हालत है वह फिल्मी खलनायक अजित के मशहूर डायलॉग ‘लिक्विड इसको जीने नहीं देगा, और ऑक्सीज़न इसको मरने नहीं देगा’ वाली है, गांधी परिवार उन्हें कांग्रेस में रहने नहीं देगा और उनकी वफादारी तथा वैचारिक निष्ठा उन्हें पार्टी छोड़ने नहीं देगी.
बिहार के पूर्णिया जिले के आईएएस राहुल कुमार ने अभियान किताब दान की अनोखी पहल शुरू की है. इस पहल ने एक क्रांति को जन्म दिया है. दो साल से भी कम समय में इस अभियान के तहत 1 लाख 30 हजार से अधिक पुस्तकें मिल चुकी हैं.
कांग्रेस और भाजपा इस समय भारत के दलित समुदायों को कोई न कोई राजनीतिक पद देकर उनके जरिये अपनी शोभा बढ़ा रहे हैं. लेकिन क्या उन कुर्सियों को कोई शक्ति मिली हुई है?
एंटरप्रेन्योरशिप को एक वैध करियर विकल्प के रूप में सामान्य बनाने का श्रेय काफी हद तक उस पहचान और महत्व को जाता है जो नीतियों के जरिए स्टार्टअप्स को दिया गया है.