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Saturday, 17 January, 2026
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अंतर-धार्मिक विवाह और संबंधित विवादों के लिये अब समान नागरिक संहिता की अनिवार्यता क्यों महसूस हो रही है

समान नागरिक संहिता की आवश्यकता के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 36 साल पहले 1985 में अपनी राय व्यक्त की थी. गोवा में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है.

युवाओं की बेरोजगारी के मामले में सबसे अमीर केरल और सबसे गरीब बिहार एक जैसे

पिछले एक दशक में युवाओं के बीच बेरोजगारी सभी बड़े राज्यों में बढ़ी, खेतीबाड़ी छोड़ने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई.

कृषि कानूनों की वापसी : कुफ्र टूटा खुदा-खुदा करके…लेकिन आगे और लड़ाई है

किसान प्रधानमंत्री की इस एकतरफा घोषणा को अपनी जीत के रूप में देखने के बावजूद उसमें अपने प्रति कोई हमदर्दी नहीं देख पा रहे. यहां तक ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ भी नहीं ही मान पा रहे

कर्णन, काला, असुरन या जय भीम जैसी फिल्में हिंदी में क्यों नहीं बन सकती

तमिलनाडु में नए उभरे दलित-पिछड़ा मध्य वर्ग से ही रंजीत, वेट्रिमारन, मारी सेल्वराज, रजनीकांत, धनुष, सूर्या आदि निकलकर आए हैं. उत्तर भारत के राज्यों में दलित और पिछड़ा मध्य वर्ग छोटा और नया है और वहां से निकलने वाली ऐसी प्रतिभाओं की संख्या कम है.

मोदी के नेतृत्व में ‘सबसे सक्षम’ लोगों के देश के रूप में बदला भारत लेकिन जरूरत ‘दोस्ताना लोगों’ को बचाने की है

एक खुला समाज अपने सभी वासियों के प्रति जितना दोस्ताना होगा और लोग सम्मिलित तथा बहिष्कृत के बीच की रेखा को जितनी धुंधली करेंगे उतना ही यह सहकारी एकता के लिए बेहतर होगा.

कृषि कानूनों की घर वापसी से साफ है कि दादागिरी से कानून पास करना समझदारी नहीं

बीजेपी का चाहे जितना वर्चस्व हो भारत राज्यों का एक संघ है और उनमें से केवल 12 में ही उसके मुख्यमंत्री सत्ता में हैं. कृषि राज्यों का विषय है और अधिकांश भारत आंख मूंद कर उसका अनुसरण नहीं करता

कोविड ने प्रारंभिक शिक्षा को कैसे प्रभावित किया, अभिभावकों, शिक्षकों और तकनीक की क्या है भूमिका

भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को मजबूत करने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को सामर्थ्य और सशक्त बनाना अनिवार्य है और ऑनलाइन शिक्षा को समावेशी और सुलभ बनाने की जरूरत है.

इमरान खान के मुरीद अब ‘…सपना टूट गया’ गाना गा रहे हैं, और लाहौर के ‘स्मॉग’ को उनसे बेहतर मान रहे हैं

मीडिया में लोगों के सोच को बदलने का रसूख रखने वालों ने शुरू में तो इमरान खान का समर्थन किया था मगर अब कबूल कर रहे हैं कि ‘सॉरी यार, गलती से मिस्टेक हो गई’

पेगासस कमिटी का वह हश्र न हो, जो कालेधन से लेकर प्रदूषण तक के मामले में जज के अधीन गठित कमिटियों का हुआ

जस्टिस रवींद्रन कमिटी को जो काम सौंपा गया है उसके संभावित नतीजे के बारे में कई लोगों को संदेह हो सकता है, लेकिन अधिकतर लोग जस्टिस रवींद्रन नहीं हैं

हिन्दुत्व तो एक राजनीतिक विचारधारा है, उसका हिन्दू धर्म से क्या लेना-देना

सावरकर ने बहुत सोच-समझकर अपनी राजनीतिक विचारधारा को हिन्दुत्व का नाम दिया, ताकि जब भी उसकी आलोचना की जाये, हिन्दुओं को लगे कि हिन्दू धर्म की आलोचना की जा रही है. वे यह न समझ सकें कि हिन्दुत्व वास्तव में हिन्दू धर्म का नहीं, हिन्दू राष्ट्रवाद का दस्तावेज है, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक संविधान के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता.

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पाकिस्तान से आज़ादी: भारत, आगे बढ़ो और उसे इतनी अहमियत देना बंद कीजिए

पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.

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लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए मजबूत न्यायपालिका जरूरी : योगी आदित्यनाथ

(फोटो के साथ) चंदौली (उप्र), 17 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.