भारत को दीर्घकालिक सैन्य क्षमता विकसित करने की जरूरत है. लेकिन सार्वजनिक तौर पर 56 इंच के सीने वाली छवि बना चुके मोदी के लिए ऐसी नीति विकसित करना और इस पर आम सहमति बनाना कोई आसान बात नहीं है.
आंकड़ों से पता चलता है कि गरीब लोग सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों को ज्यादा समय देते हैं- करीब 142 मिनट्स, जो कि कुल आबादी द्वारा दिए गए औसत समय से ज्यादा होता है.
‘धर्म संसद’ में मुसलमानों के खिलाफ हमला, मदर टेरेसा की संस्था के बहाने ईसाइयों से द्वेष जैसे नियोजित अपराधों पर मोदी की खामोशी के कारण उनके ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे पर से लोगों का भरोसा उठने लगा है.
संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक पेश किये जाना सरकार का लैंगिक समानता प्रदान करने की तुलना में राजनीतिक हित साधने वाला ज्यादा लगता है.
15वें वित्त आयोग ने भी यह प्रस्तावित किया है कि इस कैडर को आईएएस की तर्ज पर ही गठित किया जाए. पुनः मार्च 2021 में स्वास्थ्य मामलों की एक संसदीय समिति द्वारा भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए इस तरह की सेवा के विकास की वकालत की गई थी.
वाजपेयी में कई खामियां थीं, वे कई तरह से कमजोर थे और स्वार्थपूर्ण राजनीति करते थे लेकिन बहुरंगी समूहों को साथ लेकर चलने की कोशिश करने से वे कभी पीछे नहीं हटते थे.
देश का नाम भारत है तो इंडिया भी, राष्ट्रगान जन-गण-मन है तो वंदे मातरम् भी और सारे जहां से अच्छा की धुन भारतीय सेना बीटिंग रिट्रीट में बजाते आयी है, देश के झंडे में एक से ज्यादा रंग हैं और ठीक इसी तरह इस देश के कैलेंडर भी एक से ज्यादा हैं.
इन दोनों दृष्टिकोणों के द्वंद्व के बीच वे विभिन्न धर्म तो अपनी तरह से अपनी भूमिका निभाते ही हैं, जो सारे के सारे इस अर्थ में स्त्री के विरुद्ध हैं कि किसी भी धर्म का ईश्वर स्त्री नहीं है, बाजार भी कुछ कम भूमिका नहीं निभाता.
तिरुमला, एक मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को यहां भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी)...