समान नागरिक संहिता की आवश्यकता के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 36 साल पहले 1985 में अपनी राय व्यक्त की थी. गोवा में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है.
किसान प्रधानमंत्री की इस एकतरफा घोषणा को अपनी जीत के रूप में देखने के बावजूद उसमें अपने प्रति कोई हमदर्दी नहीं देख पा रहे. यहां तक ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ भी नहीं ही मान पा रहे
तमिलनाडु में नए उभरे दलित-पिछड़ा मध्य वर्ग से ही रंजीत, वेट्रिमारन, मारी सेल्वराज, रजनीकांत, धनुष, सूर्या आदि निकलकर आए हैं. उत्तर भारत के राज्यों में दलित और पिछड़ा मध्य वर्ग छोटा और नया है और वहां से निकलने वाली ऐसी प्रतिभाओं की संख्या कम है.
एक खुला समाज अपने सभी वासियों के प्रति जितना दोस्ताना होगा और लोग सम्मिलित तथा बहिष्कृत के बीच की रेखा को जितनी धुंधली करेंगे उतना ही यह सहकारी एकता के लिए बेहतर होगा.
बीजेपी का चाहे जितना वर्चस्व हो भारत राज्यों का एक संघ है और उनमें से केवल 12 में ही उसके मुख्यमंत्री सत्ता में हैं. कृषि राज्यों का विषय है और अधिकांश भारत आंख मूंद कर उसका अनुसरण नहीं करता
भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को मजबूत करने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को सामर्थ्य और सशक्त बनाना अनिवार्य है और ऑनलाइन शिक्षा को समावेशी और सुलभ बनाने की जरूरत है.
मीडिया में लोगों के सोच को बदलने का रसूख रखने वालों ने शुरू में तो इमरान खान का समर्थन किया था मगर अब कबूल कर रहे हैं कि ‘सॉरी यार, गलती से मिस्टेक हो गई’
सावरकर ने बहुत सोच-समझकर अपनी राजनीतिक विचारधारा को हिन्दुत्व का नाम दिया, ताकि जब भी उसकी आलोचना की जाये, हिन्दुओं को लगे कि हिन्दू धर्म की आलोचना की जा रही है. वे यह न समझ सकें कि हिन्दुत्व वास्तव में हिन्दू धर्म का नहीं, हिन्दू राष्ट्रवाद का दस्तावेज है, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक संविधान के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.