क्या कांग्रेस को पिछड़े वर्ग से आने वाली एक भी महिला में कोई काबिलियत नहीं दिखी. आज़ादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी अब तक ‘महिला मोर्चा’ अध्यक्ष पद के लिए कोई पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला नहीं मिली ?
कांग्रेस में गांधी परिवार के वर्चस्व के साथ इतने लंबे समय तक सत्ता का लाभ उठाने वाले किसी व्यक्ति के लिए कांग्रेस छोड़ने की संभावना पर कुछ भी कहना अभी अटकलबाजी ही होगा.
‘विश्व असमानता रिपोर्ट-2022‘ के अनुसार वर्ष 2021 में उसकी एक फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी हिस्सा संकेन्द्रित हो गया है, जबकि निचले तबके के 50 फीसदी लोगों के पास महज 13 फीसदी हिस्सा बचा है.
एकाधिकारवादी प्रवृत्तियां, टैक्स चोरी, दूसरों का बेजा फायदा उठाना, पैंतरेबाज़ नेताओं की चापलूसी—कॉर्पोरेट एनआरआइ के चैंपियनों को ऐसी कुछ बातों को लेकर सवालों के घेरे में माने जा सकते हैं .
उत्तर-पूर्व के अधिकांश भाग को ‘आफस्पा’ जैसे सख्त कानून की जरूरत नहीं है. कोई भी सरकार इसे रद्द करने की हिम्मत नहीं करेगी, तो इसे जहां जरूरी है वहीं लागू किया जाए.
बांग्लादेश 1971 के नरसंहार और युद्ध अपराधों के लिए पाकिस्तानी फ़ौजियों पर मुकदमा चलाना चाहता रहा है मगर राजनीतिक हकीकतें उसे रोकती रही हैं, फिर भी इंसाफ तो किया ही जाना चाहिए.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.