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Sunday, 1 March, 2026
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दो मंदिर आंदोलनों की टक्कर- उत्तर भारत में सामाजिक न्याय के शून्य को भरने की स्टालिन की पहल

बीजेपी ने राष्ट्रीय राजनीति को सफलतापूर्वक हिंदू बनाम मुसलमान और सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई में सीमित कर दिया है. विपक्ष भी इस खेल में फंस गया है.

बाल काटना, शॉपिंग करना या सफाई करना… इम्पल्स में आकर ऐसा क्यों करती हैं महिलाएं

पिछले दिनों जब बेहद हताश महसूस कर रही थी तो मैं शॉपिंग के लिए निकल गई और मैंने ऐसी कई चीजें खरीद ली जिन्हें शायद मैं कभी इस्तेमाल न करूं लेकिन मुझे ऐसा करके थोड़ा बेहतर महसूस हुआ

UP चुनाव में अब छवि का खेल, योगी ‘बाबा, महंत और गोरखनाथ’ हैं तो अखिलेश ‘बदलाव के प्रतीक’

भाजपा के असर की कुंजी है ‘मोदी-योगी एक ही है’ जबकि अखिलेश की छवि परिवर्तकारी युवा नेता की.

ज़मीन खो रहे हैं इमरान खान, फिर छिनने जा रही है किसी की कुर्सी

पाकिस्तान में एक तमाशा चल रहा है. इमरान ख़ान का सूरज ढल रहा है, जबकि नवाज़ शरीफ एक मुर्दा तेंदुए पर रोना-पीटना मचाए हैं.

नेताओं और राजनयिकों ने कई कोशिशें की लेकिन अब भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत की जरूरत     

पाकिस्तान में सेना ही सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी है. भारत में उसे समझने वाला कोई महकमा है तो वह भारतीय सेना ही है. वही है जिसके साथ पाकिस्तानी फौज बैठेगी और जिसकी बात सुनेगी.

यमन के कमजोर बागी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने और साबित किया कि फौजी ताकत की भी एक सीमा होती है

ईरान और सऊदी अरब अब बातचीत कर रहे हैं लेकिन जंग के जिन्न को वापस बोतल में बंद करने में शायद बहुत देर हो चुकी है. यमन में सत्ता के दलाल अपने दबदबे के लिए हिंसा पर ही निर्भर हैं.

EVM से जुड़ी जन-प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61-A की संवैधानिकता को SC में चुनौती के क्या हैं मायने

देखना है कि जन-प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61-ए के तहत ईवीएम के इस्तेमाल के बाद अब अचानक इस प्रावधान की संवैधानिकता के सवाल पर उच्चतम न्यायालय क्या रुख अपनाता है और अगर वह विचार करने का निश्चय करता है तो उसकी क्या व्यवस्था होगी.

अब इस गणतंत्र में सिर्फ ‘तंत्र’ बचा है, अगर ‘गण’ अब भी न जगा तो कुछ न बचेगा

गणतंत्र की प्राणवायु यानी विचार अब खर्च हो गए हैं. इक्कीसवीं सदी में गणतंत्र को बचाने के लिए बीसवीं सदी की विरासत का संयोजन और संशोधन करते हुए एक नई विचारधारा को गढ़ना होगा.

अफसर, इंजीनियर या शिक्षक नहीं, सिर्फ गरीब दलितों के घर खाना खाते हैं नेता

उग्र जातिवादियों के लिए ये तस्वीरें जाति की सर्वोच्चता के संकेत, तो उदार जातिवादियों को यह रक्षक होने एहसास देती हैं, जो उनमें नैतिक बड़प्पन का भाव जगाता है.

भारतीय लोकतंत्र के शोर में कैसे दब रहा है ‘गणतंत्र का विचार’

लोकतंत्र और गणतंत्र कमजोर ढांचे होते हैं जिन्हें निरंतर निगरानी और साज-संभाल की जरूरत होती है क्योंकि वे मामूली कुत्सित हस्तक्षेपों से भी आसानी से ध्वस्त हो सकते हैं.

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उप्र : चित्रकूट में मोटरसाइकिलों की टक्कर में दो व्यक्तियों की मौत

बांदा, एक मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश में चित्रकूट जिले के मानिकपुर थाना क्षेत्र में रविवार को दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने की टक्कर में...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.