अगर राहुल गांधी ‘हिंदू’ साधनों के जरिए कांग्रेस को अपनी जगह से खिसकाना चाहते हैं तो उन्हें धर्म और अपनी पार्टी के सुधार के एजेंडा की व्याख्या करनी होगी.
अदम गोंडवी अपनी गजलों की मार्फत साहित्य को मुफलिसों की अंजुमन, बेवा के माथे की शिकन, रहबरों के आचरण और रोशनी के बांकपन तक ले चलने का आह्वान करते देश भर में घूमते रहे.
इंटरनेट गुरु, सोशल मीडिया ब्लॉगर्स और उभरते हुए फिटनेस उत्साही, PCOS को ठीक करने के हज़ारों त्वरित उपाय लेकर आ रहे हैं, जिनमें सप्लीमेंट्स, हर्बल चाय और काढ़ा आदि शामिल हैं. उनके झांसे में न आएं.
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अगले चुनाव के लिए माहौल गरम हो रहा है, राजनीतिक दलों के नेता और उम्मीदवार अपनी चुनाव सभाओं के लिए लोक गायकों की बुकिंग करने लगे हैं.
किसान आंदोलन की जीत का जश्न किसी और वक्त में मना लिया जायेगा, अभी तो वक्त भारतीय कृषि के लिए एक नया, आत्मविश्वास से लबरेज और भविष्यदर्शी घोषणापत्र तैयार करने का है.
आज भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में समलैंगिक जीवन को तेजी से मान्यता मिलती जा रही है. विश्व के अनेक देशों में समलैंगिकता को हेय नज़रिये से नहीं देखा जाता है.
सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा के प्रश्नपत्र में बेहद प्रतिगामी और महिला विरोधी टिप्पणी को संसद में एक अहम एजेंडा बनाकर सोनिया गांधी ने इस उम्मीद को मजबूत किया है कि राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने के जुनून से आगे भी सोच सकती है.
नेहरू ने इतिहास के प्रति जो नजरिया अपनाया उसे एक वामपंथी नजरिए के रूप में पढ़ना जटिल बातों का सरलीकरण करना है. देश को और उसकी विविधता को समझने के लिए, इन मामलों में नेहरू का जो नजरिया है उसकी आज बहुत जरूरत है.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.