सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री का पद बार-बार ठुकरा कर सम्मान हासिल किया था, यह पीढ़ी बागडोर अपने हाथ में रखने की लालच में वह सम्मान और सहानुभूति गंवा बैठी.
कांशीराम के ‘बहुजन समाज’ नारे को छोड़ने का नतीजा मायावती और बसपा को आज उत्तर प्रदेश और पंजाब में अपनी दुर्गति के रूप में झेलना पड़ रहा है और उनका सियासी वजूद ही खतरे में पड़ गया है.
चुनावी खेल में बल्लेबाजों को आउट करने की जिम्मेदारी विपक्षी दलों की तरफ से गेंदबाजी करने उतरे लोगों की थी. नाकामी इन गेंदबाजों की कही जायेगी, किसान आंदोलन की नहीं.
चीन शीत युद्ध वाले तर्कों को खारिज करने की बात कर रहा है, संयुक्त राष्ट्र युद्ध बंद करने की मांग कर रहा है लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है. ऐसे में भारत क्या करे?
कॉंग्रेस की मौजूदा दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है? अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी इससे ज्यादा जोरदार तरीके से यह संदेश नहीं दे सकती थीं कि गांधी परिवार इसके लिए जिम्मेदार नहीं है.
इन चुनावों को 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमी फाइनल बताया जा रहा था. और इस लिहाज से भी कि उसने प्रतिद्वंद्वी दलों को नतीजों में ही नहीं, मुद्दों, रणनीति, प्रबंधन और समीकरणों के चुनाव व मत-प्रतिशत के मामलों में भी शिकस्त दी है.