भारत को आंतरिक सुरक्षा के लिए जो मौजूदा खतरे हैं और उत्तर-पूर्व में जो बची-खुची विद्रोही गतिविधियां जारी हैं उनके लिए सेना को तैनात करने की जरूरत नहीं है.
चीन ने इन दोनों देशों के संकट को बढ़ाने में तो भूमिका निभाई मगर उसे संकट का जड़ नहीं कहा जा सकता, वह तो इन देशों की राजनीतिक और आर्थिक कुप्रबंध के कारण पैदा हुआ, कर्ज से उनकी कुछ ही समस्याओं का समाधान हुआ होगा.
दुनिया इस तरह बदल चुकी है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, उन्होंने भी नहीं की होगी जो लोगों को आपस में लड़ाने के लिए उन्हें धर्म, संस्कृति, और सभ्यतागत अंतरों के आधार पर बांटते हैं.
आम आदमी पार्टी ने बीजेपी-आरएसएस द्वारा बढ़ाए गए राष्ट्रवाद की ही नकल की है जो कि भारतीय राष्ट्रवाद के बिल्कुल उलट है. यह राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले घावों को भरने में बिल्कुल नाकाम है.
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्तारूढ़ दलों द्वारा इस तरह के लोकलुभावन लेकिन आर्थिक रूप से अव्यावहारिक इन वादों को पूरा करने की वजह से राज्यों के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं.
दक्षिण दिल्ली में मीट- मांस की दुकानों को बंद करने के कदम का संबंध धर्म परायणता से कम और धार्मिक शक्ति से अधिक है. और यह किसी विश्वसनीय डेटा पर आधारित नहीं है.