क्या हम अब भी गुलाम हैं? साल जब हौले-हौले आजादी की 75वीं वर्षगांठ की तरफ कदम बढ़ा रहा है तो हमें अपने से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि : क्या विचारों के मामले में हमने अपना स्वराज हासिल किया है?
आरबीआई की गलती खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2% की छूट के साथ 4% पर रखने के अपने मैंडेट की व्याख्या से जुडी हो सकती है, क्योंकि यह मुद्रा स्फीति के 6% या उसके आस पास होने पर भी इसे कुछ भी न करने की अनुमति देती है.
मोदीफोबिया से उबरने से लेकर ‘आजाद’ भारत की विदेश नीति की सराहना और भारतीयों को ‘स्वाभिमानी’ बताने तक, इमरान खान के यू-टर्न कुछ और नहीं उनके दोहरे चरित्र को दर्शाते हैं.
आजादी के बाद हिंदी का जो विकास हुआ, वह पूरी तरह स्वाभाविक नहीं है. हिंदी आज अगर पहले से ज्यादा लोकप्रिय नजर आ रही है, तो इसमें सरकार का पैसा और प्रयास लगा है.
मुल्ला उमर के रहस्यमय उत्तराधिकारी हिबतुल्लाह अखूंदज़ादा ने इस सप्ताह ईद पर संदेश जारी किया मगर वे सबके सामने क्यों नहीं आते इसका कोई खुलासा नहीं किया गया है.