अंबेडकर धर्म और राष्ट्र के बीच के बारीक संतुलन को बहुत अच्छी तरह पहचानते थे. उन्हें पता था कि धर्म का उफान असल में एक तरीके के जातीय अस्मिता को बल देता है. जिससे राष्ट्रीय अस्मिता खंडित होगी. इसलिए अंबेडकर धर्म को राष्ट्रीय चेतना से संबद्ध करने की वकालत करते हैं.
केजरीवाल को हरियाणा से दिल्ली के लिए कम पानी छोड़ने की शिकायत रही है, वे सतलुज यमुना नहर को बनाने के समर्थक रहे हैं क्योंकि उसमें दिल्ली का भी हिस्सा है.
रूस की सेना में जबरन भर्ती के मॉडल की नकल में भारत की टीओडी यानी अग्निपथ स्कीम सेना के बढ़ते पेंशन बिल को कम करने के मामले में आकर्षक तो है मगर इसकी अपनी खामियां भी हैं.
अब सार्वजनिक बहसों में दो परस्पर विरोधी, भ्रामक तर्कों का बोलबाला रहने वाला है. एक यह कि जेएनयू हिंदू विरोधी, ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ का अड्डा बन गया है. दूसरा यह कि आरएसएस हमारे खानपान पर भी रोक लगाता है
शाहबाज शरीफ के अब्बा, जिन्हें सब लोग आदर से अब्बा जी कहते थे, उनकि तो इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उन्हें उसी मिट्टी में दफन किया जाए जिससे उनके परिवार का सदियों पुराना नाता है. पर अफसोस कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के जिस तरह के संबंध रहे,उसमें यह मुमकिन नहीं हुआ.
श्रीलंका और पाकिस्तान के हालात पर चीन का कोई आधिकारिक बयान तो अब तक नहीं आया है मगर खबरों में और उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वेइबो तथा बायदू पर हलचल बढ़ गई है.
भारत और पाकिस्तान में ऐसे लोगों की संख्या लाखों में हैं जिन्हें लगता है कि ये धर्म के रास्ते से भटके विफल राष्ट्र हैं. अल-कायदा ऐसे विषैले राजनीतिक परिदृश्य में पनपने वाला एकमात्र हिंसक आंदोलन नहीं है.