दूसरे देशों के मुक़ाबले भारत का भविष्य बेहतर दिख रहा है लेकिन मुद्रास्फीति की बिगड़ती तस्वीर आर्थिक वृद्धि के अनुमानों पर लगाम लगा रही है; उत्पादन के आंकड़े मामूली हैं और व्यवसाय जगत का मूड भी सुस्त है.
पिछलेदो वर्षों में नक्शों/उपग्रह चित्रों के साथ कोई सरकारी ब्रीफिंग नहीं की गई. जनता को उधर के भौगोलिक इलाके और फौजी कार्रवाई की स्थिति के बारे में कुछ पता नहीं है और सरकार खंडन और लीपापोती करके कन्नी काटती रही है.
शिवराज सिंह चौहान ने यूपी के सीएम आदित्यनाथ की 'बुलडोजर बाबा' किताब से एक पत्ता निकाला और खुद को मध्यप्रदेश के 'बुलडोजर मामा' में बदलते हुए उनकी तर्ज पर काम करना शुरू कर दिया. लेकिन कानूनी तौर पर वह कितनी दूर तक जा सकते हैं?
आलोचनाओं पर आग बबूला होकर क्या हम अपनी नैतिक प्रतिष्ठा बढ़ा सकते हैं? पक्षधर लोग तो आपके लिए तालियां बजाएंगे, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने भीतर झांकने की सलाहियत खो दें. या अपने शुभचिंतकों की बातों पर ध्यान न दें.
अफसोस की बात है कि आंबेडकर से जुड़ी हमारी ज्यादातर यादों का रिश्ता पक्षपात से भरे ऐसे विवादों से है और उन विवादों के पीछे जो सिद्धांत काम कर रहे थे हम उन्हें शायद ही कभी याद करते हैं.
अमेरिका की जो बाइडन सरकार को बदले जमीनी हालात को स्वीकार करना होगा और भारत जैसे लोकतंत्र के साथ बहुपक्षीय ढांचें में काम करना होगा, यही दोनों के हित में बेहतर है.
हार्दिक पटेल ने आरोप लगाया कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व उन्हें परेशान कर रहा है और राज्य के कांग्रेस नेता चाहते हैं कि वो पार्टी छोड़ दें. वहीं आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रमुख गोपाल इटालिया ने पटेल को कांग्रेस छोड़ आप में आने की पेशकश की.
सैद्धांतिक तौर पर यह सौदा आसान नहीं हो सकता. दुनिया को रूसी हाइड्रोकार्बन से मुक्ति दिलाने के लिए अमेरिका को ईरान के तेल और गैस की जरूरत है. वहीं ईरान के लिए जरूरी है कि वे पाबंदियां खत्म हो जाएं जिनकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है.
राज्य की विपक्षी पार्टियां इतनी कमजोर और पस्त हो चुकी हैं कि वे तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ कोई सार्थक विरोध नहीं खड़ा कर पा रही हैं. लेकिन इसके चलते जो शून्य पैदा हुआ है उसे तृणमूल कांग्रेस ही भर रही है.