आप तेजिंदर सिंह बग्गा जैसों से कैसे निपटेंगे ? अच्छा यही है कि उसकी अनदेखी की जाये. ऐसे किरदारों को नकारने के जुगत कीजिए प्रतिकार कीजिए और आपका यह नकार ही उनके लिए जीवनदायिनी शक्ति बन जायेगा.
पड़ोसी देश म्यांमार में नार्कोटिक्स के धंधे के ‘दादाओं’ ने राज्यतंत्र पर कब्जा कर लिया है. चीन वहां अपने पैर पसार रहा है और भारत के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.
यदि इस देश को धार्मिक कट्टरता से छुटकारा पाना है और भारतीय जनमानस के सामाजिक समरसता एवं सामंजस्य को बचाना है तो सभी धर्मों में व्याप्त जातिवाद को समाप्त करते हुए सामाजिक न्याय को पूरी तरह स्थापित करना ही एक मात्र विकल्प दिखाई दे रहा है.
एक प्रेस कांफ्रेंस में तो यहां तक कह दिया कि अयोध्यावासियों को खून के आंसू रुलाने पर आमादा योगी सरकार इतना भी नहीं समझती कि भगवान राम की प्रजा को बेघरबार कर उसके हाथों में कटोरा देकर रामकाज करने का उसका दावा कितना अमानवीय है.
गुजरात के राजनीतिक शब्दकोश में ‘विकास’ को फिर से दाखिला मिल गया है लेकिन अरविंद केजरीवाल को समझना होगा कि वहां के मतदाता विकास के उनके ‘दिल्ली मॉडल’ को शायद ही पसंद करें.
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग ने जिस तरह से चुनावी क्षेत्रों की मैपिंग की है, उसने डोगरा शासनकाल के सांप्रदायिक घावों को फिर से हरा कर दिया है.
अटॉर्नी जनरल ने ही राजद्रोह कानून से संबंधित धारा 124 ए की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने पर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी का उल्लेख किया.