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Saturday, 28 March, 2026
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राहुल गांधी को कांग्रेस नेतृत्व पर साफ करना चाहिए अपना रुख, चिंतन शिविर से काम नहीं चलेगा

अगर 137 साल पुरानी पार्टी अब भी अपने बुनियादी विचारों और मूल विचारधारा पर बहस में फंसी है और हर कोई एकमत नहीं हो सकता तो आगे की राह लगती है मुश्किल भरी.

कांग्रेस का चिंतन- PK नहीं, बल्कि पिछड़ों आदिवासियों, महिलाओं के साथ मिलकर जीतेंगे

गांधी परिवार जो कुछ टुकड़ों-टुकड़ों में करता रहा वह अब निरंतर किया जाएगा, प्रशांत किशोर पार्टियों को चुनाव जिताते होंगे लेकिन कांग्रेस ने अपने बूते जीतने का फैसला किया .

आपको पता है? बंगाल में ही नहीं, अवध के दिल में भी बसता है एक कलकत्ता

अवध के तीसरे नवाब शुजाउद्दौला 1764 में बक्सर की ऐतिहासिक लड़ाई में अंग्रेजों से बुरी तरह हार गये और फर्रुखाबाद के अपने शुभचिन्तक नवाब अहमद खां बंगश के सुझाव पर उन्होंने फैजाबाद को अपने सूबे की राजधानी बनाया तो सरयू तट पर विशाल ‘कलकत्ता किला’ बनवाया था.

भारत ने विदेशी ताकतों से मिलाया हाथ- नेहरू से मोदी तक प्रधानमंत्रियों ने पश्चिमी जासूसों से रिश्ते बढ़ाए

भले ही भारतीय सरकारें विदेशी ताकतों के खतरे को लेकर आगाह करती रही हों लेकिन पिछले कुछ समय से पूरी गर्मजोशी से उनसे हाथ मिला रही हैं.

आखिर सरकार को क्यों लगता है कि न्यायपालिका लक्ष्मण रेखा लांघ रही है

संसदीय समिति ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी आपत्ति की थी.

जटिल है उपनिवेशों की क्षतिपूर्ति का मामला, किसे क्या मिलेगा और क्या वह काफी होगा?

पूर्व उपनिवेशवादी शक्तियों के स्कूलों, कॉलेजों के पाठ्यक्रम में अगर यह पढ़ाया जाए कि वास्तव में वे कैसे और किसकी कीमत पर अमीर बन गए तो यह भी काफी होगा.

एंबेसडर कार की तरह कांग्रेस पर भी अस्तित्व का संकट, नया मॉडल नहीं नया ब्रांड लाने से सुधरेगी हालत

पुरानी एंबेसडर कार की तरह कांग्रेस ने भी खुद को नये अवतार में ढालने की कई नाकाम कोशिशें की लेकिन उसे अपने शानदार अतीत से आगे बढ़कर कुछ ऐसा करना पड़ेगा जो भविष्य के लिए उम्मीदें जगाता हो.

जनगणना से कौन डरता है और क्या है इसे लेकर मोदी सरकार की नीति

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2020 में ही ये घोषणा कर दी थी कि कोविड के प्रकोप के कारण इस बार की जनगणना समय पर नहीं होगी.

आर्थिक संकट ने श्रीलंका को खतरनाक मुहाने पर ला खड़ा किया है, भारत के लिए ये सबक है

श्रीलंका के मौजूदा संकट से तो यही साफ होता है कि लंबे समय तक चले भाषायी विवाद से जो देश में स्थिति उत्पन्न हुई उससे बाद के सालों में कोई सबक नहीं लिया गया.

मोदी ध्रुवीकरण वाली शख्सियत हैं और यह बुरी बात नहीं, मगर हमें तीन सवालों के जवाब चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों की चिंताएं जायज हैं लेकिन खौफज़दा होने की जरूरत नहीं है. मोदी के नाम पर ध्रुवीकरण की जो वजहें टीवी चैनलों और अखबारों में बताई जाती हैं वे गलत हैं.

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दिल्ली पुलिस ने पार्टी के ‘टिकट के लिए पैसे की मांग’ के प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज की

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) दिल्ली पुलिस ने टिकट दिलवाने के बदले पैसे की मांग करने के आरोप में कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.