‘राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता’ से लेकर ‘संस्थाओं से खिलवाड़’ करने के आरोपों के साथ मोदी पर हमले कर रहा विपक्ष अपने गिरेबान में झांकने से परहेज करता रहा है.
तालिबान में व्यावहारिक नजरिया रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मान्यता और राष्ट्र-निर्माण में मदद हासिल करने के खातिर वैश्विक जेहाद से नाता तोडऩे को तैयार हैं, मगर यह इतना आसान नहीं.
पिछले तीन साल कश्मीर एक समस्या के रूप में सुर्खियों में और चिंता के रूप में हम सबके मन पर छाया नहीं रहा, इसे सबसे महत्वपूर्ण और बेहतर बदलाव माना जा सकता है.
चीन ने सीमावर्ती इलाकों के प्रबंधन और विकास के जरिए अपनी संप्रभुता जताने की रणनीति बना रखी है. द्विपक्षीय रिश्ते बेहतर बनाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को इस मसले को हल्के में कतई नहीं लेना चाहिए
केंद्र सरकार की इस घोषणा के साथ ही विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कराई जा रही जनगणना और जाति जनगणना अब निरर्थक हो चुकी है. राज्य सरकारों द्वारा कराई जा रही इन कवायद से आई रिपोर्ट को जनगणना की रिपोर्ट का दर्जा नहीं मिल पाएगा.
ह्वाइट हाउस ने दौरे को निजी बताकर मामला रफा-दफा करना चाहा और ‘एक चीन’ नीति के प्रति अमेरिकी प्रतिष्ठान की प्रतिबद्धता को दोहराया. लेकिन बीजिंग सहमत नहीं
बड़ी बारीकी और तटस्थता के साथ लिखी हुई विनायक दामोदर की एक परिपूर्ण बौद्धिक जीवनी प्रकाशित हुई है और यह जीवनी समझाने की कोशिश करती है कि हिंदुत्व नाम की विचारधारा के साथ हमें पूरी गंभीरता के साथ संवाद करने की जरूरत है.
काश, हमारे लोकतंत्र के दबाव में वह (आरएसएस) देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने के अपने मंसूबे के बरक्स खुद को उन मानकों, मूल्यों, सपनों व सिद्धांतों वगैरह के प्रति भी समर्पित कर पाता, तिरंगा जिनका प्रतीक है.