भारत में ईशनिंदा विरोधी अभियान मौलवी नहीं चला रहे. और उदयपुर और अमरावती में हत्या की घटनाओं के आरोपियों ने न तो कोई मजहबी शिक्षा हासिल की थी और न ही उनका दक्षिणपंथी संगठनों से कोई संबंध रहा है.
मोदी की भाजपा तो यही चाहेगी कि कांग्रेस ही मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरे ताकि उसे सड़क पर उतरकर संघर्ष करने वाले, राजनीतिक रूप से अधिक चुस्त-चतुर क्षेत्रीय नेताओं का सामना न करना पड़े.
मुर्मू के गांव के तमाम लोग न तो रायसीना हिल के बारे में जानते हैं और न ही उन्हें यह पता है कि भारत में राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों की सीमा क्या है.
भारत की आत्मा की सौम्यता, ‘सत्यमेव जयते’ का धैर्य और साहस भी इस नये स्तम्भ में एकसार नहीं ही हो पाए हैं, जबकि किसी भी देश का राष्ट्रीय प्रतीक उसके मूल चरित्र का परिचायक होता है.
क्या किसी को परवाह है कि सुनक यूके के अगले पीएम बनेंगे या नहीं? हम बस इतना जानना चाहते हैं कि सुष्मिता सेन और ललित मोदी की शादी की तारीख क्या है, संगम होगा कि नहीं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.