रविवार की हुई सीडब्ल्यूसी बैठक राहुल गांधी के लिए अपने 'त्याग' के बारे में लग रही अटकलों पर विराम लगाने और यह घोषणा करने हेतु एक आदर्श मंच था कि वह अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. लेकिन उन्होंने इस बारे में एक शब्द तक नहीं कहा.
सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, भारत की खुफिया सेवाओं ने प्रधान मंत्री की इच्छा से चलने वाले उपकरणों के रूप में काम किया है. उनके संचालन के लिए न तो कोई तयशुदा कानूनी ढांचा है, और न ही कोई जवाबदेही.
साउथ से आने वाली हर फिल्म को अच्छी, उम्दा, शानदार बताने का रिवाज ‘लाइगर’ से हल्का पड़ा है. क्या हिन्दी वालों का साउथ इंडियन फिल्मों से मोहभंग हो रहा है?
चिप उत्पादन के लिए चाहिए जटिल व्यवस्था क्योंकि उसके लिए सामग्री रूस और यूक्रेन सप्लाइ करते हैं, उसके यंत्र जापान से आते हैं, फोटोलिथोग्राफी का यंत्र बनाने में डचों को महारत हासिल है.
2004 में सत्ता में वापसी के रूप में काँग्रेस की जो लॉटरी लगी थी उसके कारणों पर यथार्थपरक आत्ममंथन करने की जगह उसने उससे तमाम तरह के गलत राजनीतिक निष्कर्ष निकाल लिये.
पूंजीवाद ठीक से काम करता रहे, बाजार बड़ा हो, उद्यमों को अच्छा वर्कर मिले, इसलिए भी जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो और आगे बढ़ने और गरिमा से जीने का मौका हर किसी के लिए खुला हो. यही द्रविड़ियन मॉडल है.
हमारी धारणाओं के विपरीत, कंबोडिया को शैव बनाया हिंदू संतों द्वारा करवाए गए धर्मांतरण, बाजार की ताक़तों के उभार और ‘भारतीय’ विचारों के साथ कंबोडियाइयों के संवाद में विवेक के प्रयोग ने.
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.