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Sunday, 8 March, 2026
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बिहार का ड्रामा सेकुलरवाद की जीत नहीं, खुशी मनाने में आप तीन चीजें भूल रहे हैं

बिहार की नौटंकी घाघ नीतिश कुमार की नई जोड़तोड़ भर है, जो इतनी बार पाला बदल चुके हैं कि हर सुबह उठकर जरूर याद करने की कोशिश करते होंगे कि मेरे सहयोगी कौन हैं.

नीतीश कुमार के पाला बदलने से पलट सकता है 2024 चुनाव में हवा का रुख

भारत के चुनावी नक्शे को तीन पट्टियों के रूप में सोचने से पता चलता है कि भाजपा का केवल एक पर 'प्रभुत्व' है. अब एनडीए में नाम के अलावा कुछ भी नहीं बचा है, 2024 एक चुनौती होगी.

बहन की रक्षा सिर्फ तन की क्यों? इच्छाओं और अधिकारों की क्यों नहीं

बहनें अपने भाइयों कलाई पर राखी बांध रही हैं और भाई उनकी रक्षा का वादा कर रहे हैं. लेकिन रक्षा सिर्फ शरीर की ही क्यों? क्या रक्षा सिर्फ लड़की की इज्जत की ही होनी चाहिए.

राहुल गांधी ने खुद को ‘बलिदानी परिवार’ का वारिस बताया, जुनूनी कांग्रेस-द्वेषियों को आड़े हाथों लिया

भारी गैर-बराबरी और सांप्रदायिक तनाव की क्रूर सच्चाइयों के मद्देनजर भ्रष्टाचार और खानदानशाही के दो फर्जी अफसाने अब और चस्पां नहीं हो सकते. अब तो मुकाबले का मैदान तैयार है.

‘स्पर्श’ बनाएगा फौज वालों की पेंशन को डिजिटल, लेकिन समस्याएं बनी रहेंगी

संशोधित ‘एक रैंक एक पेंशन’ योजना लागू करने में नाकामी के बाद अब ‘स्पर्श’ का सहारा रक्षा मंत्री के लिए खतरे की घंटी जैसी ही है.

मोदी सरकार में बदली ED की पब्लिक प्रोफाइल, एजेंसी के पास है चार गुना ज्यादा स्टाफ और बजट

नई दिल्ली और सभी राज्य राजधानियों में यही कायदा था कि ‘शीशे के घरों में रहने वाले पत्थर नहीं फेंकते.’ मोदी सरकार ने उसे बदल दिया.

दिग्भ्रमित, दिशाहीन- विपक्ष पर रोनेन सेन का ‘बिना सिर वाले मुर्गे’ का जुमला सटीक बैठता है

‘राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता’ से लेकर ‘संस्थाओं से खिलवाड़’ करने के आरोपों के साथ मोदी पर हमले कर रहा विपक्ष अपने गिरेबान में झांकने से परहेज करता रहा है.

अल-जवाहिरी की मौत के बाद भी तालिबान अल-कायदा को नहीं छोड़ेगा, काबुल सुरक्षित पनाहगाह है

तालिबान में व्यावहारिक नजरिया रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मान्यता और राष्ट्र-निर्माण में मदद हासिल करने के खातिर वैश्विक जेहाद से नाता तोडऩे को तैयार हैं, मगर यह इतना आसान नहीं.

75 साल के भारत की कहानी कच्ची-पक्की रही मगर 25 साल में वह चाहे तो अपनी सदी बना सकता है

भारत अगर अगले 25 साल में अपनी संस्थागत एवं नीतिगत विफलताओं को दुरुस्त करे, असमानताओं  और विषमताओं को कम करे तो वह सदी बेशक भारत के नाम हो सकती है.

कैसे रहे कश्मीर के बीते तीन साल, 3 अच्छे बदलाव और 3 बातें जो और भी बुरी हुईं

पिछले तीन साल कश्मीर एक समस्या के रूप में सुर्खियों में और चिंता के रूप में हम सबके मन पर छाया नहीं रहा, इसे सबसे महत्वपूर्ण और बेहतर बदलाव माना जा सकता है.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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दिल्ली के नांगलोई में अचार के कुएं में गिरने से फैक्टरी मालिक और उसके बेटे की मौत

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली के नांगलोई इलाके में शनिवार शाम को अचार बनाने की एक फैक्टरी में कुएं में गिरने से फैक्टरी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.