बिहार की नौटंकी घाघ नीतिश कुमार की नई जोड़तोड़ भर है, जो इतनी बार पाला बदल चुके हैं कि हर सुबह उठकर जरूर याद करने की कोशिश करते होंगे कि मेरे सहयोगी कौन हैं.
भारत के चुनावी नक्शे को तीन पट्टियों के रूप में सोचने से पता चलता है कि भाजपा का केवल एक पर 'प्रभुत्व' है. अब एनडीए में नाम के अलावा कुछ भी नहीं बचा है, 2024 एक चुनौती होगी.
बहनें अपने भाइयों कलाई पर राखी बांध रही हैं और भाई उनकी रक्षा का वादा कर रहे हैं. लेकिन रक्षा सिर्फ शरीर की ही क्यों? क्या रक्षा सिर्फ लड़की की इज्जत की ही होनी चाहिए.
भारी गैर-बराबरी और सांप्रदायिक तनाव की क्रूर सच्चाइयों के मद्देनजर भ्रष्टाचार और खानदानशाही के दो फर्जी अफसाने अब और चस्पां नहीं हो सकते. अब तो मुकाबले का मैदान तैयार है.
‘राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता’ से लेकर ‘संस्थाओं से खिलवाड़’ करने के आरोपों के साथ मोदी पर हमले कर रहा विपक्ष अपने गिरेबान में झांकने से परहेज करता रहा है.
तालिबान में व्यावहारिक नजरिया रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मान्यता और राष्ट्र-निर्माण में मदद हासिल करने के खातिर वैश्विक जेहाद से नाता तोडऩे को तैयार हैं, मगर यह इतना आसान नहीं.
पिछले तीन साल कश्मीर एक समस्या के रूप में सुर्खियों में और चिंता के रूप में हम सबके मन पर छाया नहीं रहा, इसे सबसे महत्वपूर्ण और बेहतर बदलाव माना जा सकता है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.