scorecardresearch
Sunday, 8 March, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

दिमागी दबाव बनाने के लिए हवाई क्षेत्र के अतिक्रमण के चीनी खेल का भारत को देना होगा जवाब          

भारत के सामने अपनी सेना को संसाधन पहुंचाने का ही मसला नहीं है, उसके राजनीतिक नेतृत्व को नारेबाजी छोड़कर नतीजे देने वाले सुधारों को लागू करना पड़ेगा. 

अफगानिस्तान में अपने दूतावास का दर्जा बढ़ाकर भारत ने उठाया सकारात्मक कदम

लेकिन तालिबान द्वारा ताकत के अनावश्यक इस्तेमाल की कई कहानियां हैं, और ये उसे भारत का नया करीबी दोस्त बनने से रोकती हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी का लीडरशिप फार्मूला: बड़ा दिल व सुलझा नेतृत्व

अटल बिहारी वाजपेयी जी की 93वीं वर्षगांठ पर एक नज़र उन बातों पर जो उन्हें महान नेता बनाती है: इरादे मजबूत लेकिन दिल से कवि.

मुर्शिदाबाद कलकत्ता से क्यों हार गया- मुगलों के उलट, ब्रिटिश बैंकिंग परिवारों पर नहीं थे निर्भर

मुर्शिदाबाद ईस्ट इंडियन कंपनी द्वारा स्थापित पहले जिलों में से एक था. अब ममता बनर्जी सरकार इसे तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी में है.

सावरकर और नेहरू ने भारत का भविष्य गढ़ने में इतिहास का सहारा लिया लेकिन गांधी कभी इसके पक्षधर नहीं रहे

मूलत: परस्पर विरोधी होने के बावजूद सावरकर और नेहरू की कृतियों में कल्पनाशीलता के निशान मिलते हैं, भले ही यह सकारात्मक हों या नकारात्मक.

नीतीश कुमार ‘पहले बिहारी PM-पहले कुर्मी पीएम’ उम्मीदवार बनते हैं तो क्यों 2024 के चुनाव में कांग्रेस का अच्छा दांव होंगे

प्रधानमंत्री पद के विपक्षी उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार कांग्रेस के लिए सर्वश्रेष्ठ दांव हो सकते हैं, बशर्ते वह अभी भी यह न माने बैठी हो कि राहुल गांधी ही मोदी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.

‘आजादी का अमृत महोत्सव’- भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार से कितना आजाद हुए हम

भारत में यह माना जाता रहा कि ऊपर के लोगों का विकास होगा तो रिसकर नीचे तक पहुंचता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज असमान विकास के नाम पर भारत के सामने जस की तस चुनौती बनी हुई है.

आजादी की जंग अब भी लड़ रहा पाकिस्तान, राजनीतिक थ्रिलर से कहीं ज्यादा नाटकीय है कहानी

आईएमएफ के पंजों में फंसा एक नाकारा लोकतंत्र- यही है पाकिस्तान के 75 साल की कहानी.

उस आजादी के स्वर्ग में, ऐ भगवान, कब होगी मेरे वतन की नई सुबह?

कितना अच्छा होता कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हम अपने प्यारे भारत को उनकी कल्पनाओं का देश बनाने की दिशा में बढ़ते लेकिन जो हालात हैं, उनमें कोई इसका सपना भी भला कैसे देखें?

आज़ादी के 75वें साल किस बात का जश्न? संवैधानिक संस्थाओं के ढहने का या क्रूर होती लोकतांत्रिक सत्ता का

जब भारत 2022 में आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है तो यहां एक सवाल सबसे जरूरी हो जाता है कि हमारे लिए आजादी के मायने क्या हैं, क्या इसका मतलब हम लोगों के बीच ठीक तरह से ले जा पाए?

मत-विमत

ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

वीडियो

राजनीति

देश

दिल्ली के नांगलोई में अचार के कुएं में गिरने से फैक्टरी मालिक और उसके बेटे की मौत

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली के नांगलोई इलाके में शनिवार शाम को अचार बनाने की एक फैक्टरी में कुएं में गिरने से फैक्टरी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.