प्रधानमंत्री पद के विपक्षी उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार कांग्रेस के लिए सर्वश्रेष्ठ दांव हो सकते हैं, बशर्ते
वह अभी भी यह न माने बैठी हो कि राहुल गांधी ही मोदी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.
भारत में यह माना जाता रहा कि ऊपर के लोगों का विकास होगा तो रिसकर नीचे तक पहुंचता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज असमान विकास के नाम पर भारत के सामने जस की तस चुनौती बनी हुई है.
कितना अच्छा होता कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हम अपने प्यारे भारत को उनकी कल्पनाओं का देश बनाने की दिशा में बढ़ते लेकिन जो हालात हैं, उनमें कोई इसका सपना भी भला कैसे देखें?
जब भारत 2022 में आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है तो यहां एक सवाल सबसे जरूरी हो जाता है कि हमारे लिए आजादी के मायने क्या हैं, क्या इसका मतलब हम लोगों के बीच ठीक तरह से ले जा पाए?
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.