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Wednesday, 11 March, 2026
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आज भारत में बढ़ते बीजेपी के वर्चस्व से भारतीय समाजवाद ही लड़ सकता है

आप बीजेपी के उग्र राष्ट्रवाद का प्रतिकार किसी अमूर्त अंतर्राष्ट्रीयतावाद के सहारे नहीं कर सकते. आज जिस झूठे और धर्मान्ध राष्ट्रवाद का प्रचार किया जा रहा है उसकी कारगर काट भारतीय समाजवादियों के सकारात्मक राष्ट्रवाद से ही की जा सकती है.

मोहन भागवत की जाति को भूलने की ‘मासूम’ सलाह जातीय वर्चस्व को बनाए रखने की कोशिश है

सवाल उठता है कि ‘धर्म’ भी तो अतीत का विषय है. उसे भूलने की जरूरत क्यों नहीं है? धर्म से जुड़ी अनेक बुराइयां पूरे संसार में रही हैं, फिर उसे याद रखने की जरूरत क्यों?

40 साल मामूली प्रदर्शन के बाद अर्थव्यवस्था 2023 में ठोस वृद्धि दिखाने को तैयार

पिछले चार दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 16 गुना वृद्धि की और अब वृद्धि के आंकड़े भले कम आकर्षक लग रहे हों मगर आईएमएफ के मुताबिक भविष्य चमकदार है.

कैसे गुजरात पिटाई मामले ने भारतीय राजनीति की ‘सेकुलर’ चुप्पी को सामने ला दिया

गुजरात में मुस्लिम युवाओं की कोड़े से पिटाई जैसी घटनाओं पर ही भारत जैसे बहुलतावादी, लोकतांत्रिक गणतंत्र से राजनीतिक आवाज़ उठाने की अपेक्षा की जाती है लेकिन भाजपा के प्रतिद्वंद्वी मुसलमानों के साथ दिखने से भी डर रहे हैं.

नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक को फिर से जिंदा करना जरूरी

पूर्व सीजेआई रमना ने हाल ही में जजों की नियुक्ति के मामले में विविधता को सुनिश्चित करने के लिए किसी मैकेनिज़म के न होने की बात कही थी. हालांकि, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इस पर कोई काम नहीं किया.

भारत में मुसलमानों के लिए हिजाब इस्लाम से ज्यादा ‘वे बनाम हम’ का मामला है

हिजाब पहनने के लिए ज़ोर देना धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक मामला ही है इसलिए इसका विरोध भी धार्मिक नहीं है, इस्लाम के खिलाफ नहीं है बल्कि राजनीति का मामला है.

RBI के डिजिटल रुपया के कॉन्सेप्ट के कई फायदे मगर भारत की वित्तीय स्थिरता के लिए कई जोखिम भी

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) में व्यापक वित्तीय समावेश की संभावना, मगर भारतीय रिजर्व बैंक के कॉन्सेप्ट नोट में उपभोक्ता सुरक्षा पर जोर देना भी वाजिब है.

एजुकेशन लोन या कार लोन, किससे देश का भला होता है

यह जरूरी है कि भारत एजुकेशन लोन खासकर विदेशों में पढ़ने के लिए लिये गये लोन के बारे में एक नीति बनाये. मेधावी और बढ़िया डिग्री पाने वालों को यहां समायोजित करे.

हर रोज खौफ, नफरत की नई कहानी आ धमकती है, हैरानी कि सामान्य हिंदू का इससे दिल नहीं दहलता

मैं नाजी जर्मनी जैसा दौर नहीं कहना चाहता, क्योंकि कम से कम अभी तक वे उस जैसा नहीं कर पाए, मगर तालिबान और इस्लामी आतंक जैसा तो बिलकुल है.

चीन पिछले कुछ सालों से ‘शीप्लोमेसी’ आगे बढ़ा रहा था, दुनिया तो अब जान पाई

चीन नई विश्व-व्यवस्था बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाते हुए दूसरे देशों के मामलों में दखलंदाजी नहीं चाहता, यही तो है ‘शी-कूटनीति’

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पश्चिमी एशिया में स्थिति के मद्देनजर विमानन कंपनियां परिचालन संबंधी व्यवस्थाएं कर रही हैं : मंत्रालय

मुंबई, 10 मार्च (भाषा) नागर विमानन मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में बदलते घटनाक्रम और भारत व इस क्षेत्र के बीच...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.