ढांगरी गांव में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले ने कई कारणों से चिंताएं पैदा की हैं. इस हमले से आतंकवादियों ने न केवल अपनी उपस्थिति जाहिर करने की कोशिश की बल्कि इस सीमावर्ती क्षेत्र में आपसी भाईचारे को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है.
जोशीमठ की धंसती जमीन ने पर्यावरण को लेकर व्यापक चिंताओं को जन्म दिया है, सरकार को इस मोर्चे पर उभर रहीं चेतावनियों पर ध्यान देने और जल संरक्षण को प्राथमिकता देने की जरूरत है.
RSS चाहे चिर विद्रोही की भूमिका में रहा हो या सत्ता में, वह ‘अब्राहमवादी’ या साफ कहें तो मुस्लिम दुविधा से अभी तक उबर नहीं पाया है. क्या इस मामले में वह प्रगति कर सकता है? हम सरसंघचालक के अगले उद्बोधन या इंटरव्यू का इंतज़ार करेंगे.
ऐसा लगता है कि सरकार-सेना में तालमेल नही है. एक औपचारिक एनएसएस के माध्यम से अपने विरोधियों को मंशा बताना तो दूर की बात है, बलों को कोई औपचारिक निर्देश नहीं दिया गया लगता है.
सेवा क्षेत्र में तेजी से सुधार दिख रहा है, लेकिन कमजोर बाहरी मांग के कारण विनिर्माण में गिरावट का अनुमान है. कमोडिटी की कीमतों में नरमी से सेक्टर को कुछ सपोर्ट मिल सकता है.