अपने औपनिवेशकालीन पूर्ववर्तियों की तरह मौजूदा भारतीय पुलिस भी आजाद ख्याल बेटियों को लेकर एक अलग ही तरह की चिंता से ग्रस्त नजर आती है—और यह उनके अधिकारों की रक्षा से जुड़ी कतई नहीं होती है.
एक ऐसी पीढ़ी जो अब किसी भी चीज़ के रूप में परिभाषित नहीं होना चाहती है, उसके लिए अपने नए रोमांटिक संबंधों को 'सिचुएशनशिप' कहना सिर्फ इस तरह के रिश्तों को लेकर और अधिक भ्रम की स्थिति को बनाए रखने जैसा है.
ज्यादा लाभकारी रोजगार गारंटी स्कीम जैसे कार्यक्रम अपनी कहानी खुद बयान करते हैं, जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा, और रोजगार केंद्रित ट्रेनिंग में ज्यादा निवेश करने के तर्क अपनी कहानी बयान करते हैं.
भारत ने नेपाल में राजशाही से लेकर माक्र्सवादी निजाम तक, हर राज के साथ कामयाबी रिश्ता बनाया है. चीन के साथ मिलकर दो कम्युनिस्ट नेताओं की ताजा पेशकश भी नई दिल्ली के लिए कुछ अलग नहीं होगी.
न्यूज़रूम की गरिमा बनाए रखने, तथ्यों के प्रति सम्मान बरतने और खबर को उसकी मूल अहमियत से ज्यादा न उछालने में कामयाबी से बड़ा संतोषप्रद शायद ही कुछ हो सकता है. इसी संतोष के साथ रॉय दंपती एनडीटीवी को नये हाथों में सौंपकर इससे विदाई ले सकता है.
पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिकाओं और लिव-इन पार्टनर नहीं, मां-बेटा और गुरु-शिष्य के संबंध भी रिसने लगे हैं और मामले केवल श्रद्धा जैसी युवतियों को मारकर उनके शरीर के 35 टुकड़े करने तक ही सीमित नहीं रह गए हैं.
बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान के अप्रैल में भारत आने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान के पद संभालने के बाद ये दोनों देशों के बीच पहला बड़ा हाई-लेवल संपर्क होगा.