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Thursday, 12 March, 2026
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भारत को 1962 में उठाए गलत कदमों को दोहराने से बचना होगा, LAC की संवेदनशीलता दिखाती है तवांग की झड़प

एलएसी पर टकराव के कारण स्थिति बेकाबू न होने पाए, इसके लिए भारत को 1962 में उठाए गलत कदमों की पुनरावृत्ति से बचना होगा. बहुत ध्यान से यह तय करना होगा कि कौन-सी लाइन लेनी है और उनका बचाव कैसे करना है.

भारत के खिलाफ तवांग में PLA के साथ झड़प के बाद अब चीनी राष्ट्रवादियों का हल्ला

भारतीय मीडिया में झड़प की खबर के फौरन बाद चीन के सोशल मीडिया जोरदार हंगामा बरपा.

थिएटर कमांड हो या डिफेंस यूनिवर्सिटी, क्यों राष्ट्रीय सुरक्षा को चाहिए राजनीतिक प्रोत्साहन

रक्षा संबंधी सुधार सत्तासीन सरकार के जिम्मे हैं. पीएमओ को रक्षा मंत्रालय पर दबाव बढ़ाना चाहिए और रक्षामंत्री को इसके लिए जवाबदेह बनाना चाहिए.

मोदी की चायवाले से पावरहाउस तक की यात्रा अब अनूठी नहीं रही, बाकी भी लिख रहे ऐसी स्क्रिप्ट

मामूली चायवाले से सर्वशक्तिमान बनने तक की मोदी की कहानी अब अनूठी नहीं रह गई है. यह सफर कई लोग तय कर रहे हैं, चाहे उनका पैमाना और उनकी सफलता तुलनात्मक रूप से छोटी दिखती हो.

क्यों दिल्ली में AAP की ‘डबल इंजन’ जीत से बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है, TMC का उदाहरण सामने है

टीएमसी के राजनीतिक वर्चस्व और केएमसी पार्षदों के अपनी जिम्मेदारी निभाने के बीच की कड़ी को समझने के लिए हमने सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच कोलकाता के 20 वार्डों का सर्वेक्षण किया.

मेंबरशिप बनी पहेली—BJP ने 7 करोड़ ‘नए सदस्य’ जोड़े लेकिन चुनाव में वोटिंग से ऐसा नजर क्यों नहीं आता

भाजपा अपनी सदस्य संख्या 18 करोड़ पर पहुंचने के दावे के साथ 2019 में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी, जो 2015 की तुलना में 64 फीसदी अधिक है. हालांकि, चुनाव नतीजों का डेटा इन आंकड़ों के अनुरूप नहीं लगता है.

मॉस्को प्रारूप 2022: अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया में कितने जरूरी हैं क्षेत्रीय प्रयास

भारत, रूस, चीन और मध्य एशियाई देश समेत सभी पक्ष अफगान संकट का एक स्थिर समाधान देखना चाहते हैं ताकि उनके हितों की रक्षा की जा सके. इन सभी देशों के लिए आतंकवाद एक कॉमन प्रॉब्लम है.

जर्मनी को नव-नाज़ियों से बड़ा खतरा तो नहीं है, मगर लोकतांत्रिक देश ऐसे खतरों की अनदेखी नहीं कर सकते

आधुनिक जर्मनी को कॉर्पोरेट साजिश की मिसाल बता रहे राइशबर्गर आंदोलनकारी टैक्स देने से मना कर रहे हैं और अपने छद्म देश तक की स्थापना कर चुके हैं.

गुजरात चुनाव से AAP राष्ट्रीय पार्टी तो बनी लेकिन जयप्रकाश नारायण नहीं हो सकते केजरीवाल

अगर बीजेपी को लोकसभा चुनाव 2024 में दिल्ली की सातों सीटें बनाए रखनी है, तो उसे अपनी प्रदेश इकाई में भारी फेरबदल और कुछ नेताओं को विदा करने की दरकार है.

भले ही मोदी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा पर कायम हों, पर स्थानीय राजनीति के सामने यह कमजोर पड़ जाता है

हिमाचल प्रदेश में मोदी का चेहरा नहीं चला और राष्ट्रवाद-हिंदुत्ववाद भी मुद्दे नहीं बन पाए इसलिए वह एक सामान्य चुनाव बन गया, वहां 2014 से ऐसा ही चल रहा है

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माझी ने ममता से राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान हुई ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ घटना पर खेद व्यक्त करने का आग्रह किया

भुवनेश्वर, 11 मार्च (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राज्य...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.