कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार प्रधानमंत्री मोदी का पसंदीदा विषय है. जब भी वह किसी मुश्किल में फंसे होते हैं तो नेहरू की गलतियां और गांधी परिवार के परिवारवाद का सहारा लेकर निकलने की कोशिश करते हैं.
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के एक साल बाद, दोनों देशों के अनुभव के सबक हैं जो अधिक व्यापक रूप से लागू होते हैं. हालांकि संदर्भ और परिस्थितियां बहुत भिन्न हैं, ये सबक भारत पर भी लागू होते हैं.
भारत ने आरएसएस से जुड़े एक वकील और एक पूर्व सीपीआई मंत्री को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में देखा है. एक पूर्व सीजेआई भी दो बार कार्यवाहक राष्ट्रपति रह चुके हैं.
इस कॉलम में पढ़िए कि उस जनसंहार से पहले असम के एक पुलिसवाले के वायरलेस संदेश को किस तरह अनदेखा किया गया और कैसे हमें उसका सुराग मिला और कैसे हमने उसे ढूंढ निकाला.
खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.7% से बढ़कर जनवरी में 6.5% हो गई, जो मुख्य रूप से खाद्य कीमतों से प्रेरित थी, जबकि भारत की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में 2 साल के निचले स्तर 4.73% पर आ गई.
देश आजाद हुआ, तो खेती-किसानी के बुरे हाल के कारण देशवासियों के भरपेट भेजन का सवाल इतना जटिल था कि कोई भी केन्द्रीय मंत्री खाद्य मंत्रालय का प्रभार नहीं लेना चाहता था.
मुख्यधारा मीडिया में लगातार, लगभग एक जैसा नैरेटिव दिखाया जाता है: बंगाल ‘कानूनहीन’, बंगाल ‘हिंसक’, बंगाल ‘अस्थिर’. हर घटना को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है.
(तस्वीरों के साथ) कोलकाता, सात अप्रैल (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह ‘‘समुदायों...