चीन और रूस दोनों ने मध्य पूर्व में - और अन्य जगहों पर - अपने करीबी सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को सही ठहराने के लिए अमेरिका को अपने युद्धों के लिए कोसने पर भरोसा करते हैं.
बीजिंग के शांति-निर्माण के प्रयास आश्चर्यजनक नहीं हैं. यह चीन की ताकत और अमेरिकी प्रभुत्व का विकल्प खोजने की क्षेत्रीय शक्तियों की इच्छा को दर्शाता है.
अत्याधुनिक चिप्स को प्रायः आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के लिए भविष्य का ईंधन कहा जाता है. लेकिन प्रतिबंधों ने चीन को दोयम दर्जे की ताकत वाली हैसियत में पहुंचा दिया है
बिहारी मजदूरों पर हमले की फेक न्यूज पहले सोशल मीडिया से फैली और बाद में कई बड़े अखबार भी इसे सच मानकर फेक न्यूज को फैलाने लगे. अखबारों के छप जाने के बाद तो सोशल मीडिया में ऐसी चर्चाओं की बाढ़ ही आ गई.
मोदाणी मॉडल की खासियत यह है कि व्यवसायिक घरानों से गहरे रिश्ते गांठने से मोदी का इकबाल कम नहीं हुआ है. बल्कि सत्ता डंके की चोट पर उगाही कर रही है और पूंजीपति तबके के सामने घुटने टेकने की जगह उनपर हुक्म फटकार रही है.
बरेलवियों ने कभी भी स्थानीय रीति-रिवाजों को 'हिंदुवाना' के रूप में लेबल करने पर जोर नहीं दिया, देवबंदियों ने इस्लाम के शुद्धतावादी संस्करण पर ध्यान केंद्रित किया. दोनों का उद्देश्य एक नई 'इस्लामिक' राजनीति पर हावी होना है.
भारतीय रिजर्व बैंक बेशक पुरातनपंथी ही बना हुआ है, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था को विदेशी पोर्टफोलियो पूंजी के बाहर चले जाने का जोखिम झेलना पड़ सकता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा और यह शेयर बाजार के लिए बुरी खबर होगी
‘क्रोनिज़्म’ निंदनीय है, और यह अच्छी बात है कि इस पर जोरदार बहस जारी है. लेकिन अविश्वसनीय रूप से ताकतवर, अमीर, सफल कंपनियों के साथ-साथ सरकारी नीति की सबसे बड़ी विफलता भारत की ब्रांडलेस ग्रोथ है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.