यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के एक साल बाद, दोनों देशों के अनुभव के सबक हैं जो अधिक व्यापक रूप से लागू होते हैं. हालांकि संदर्भ और परिस्थितियां बहुत भिन्न हैं, ये सबक भारत पर भी लागू होते हैं.
भारत ने आरएसएस से जुड़े एक वकील और एक पूर्व सीपीआई मंत्री को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में देखा है. एक पूर्व सीजेआई भी दो बार कार्यवाहक राष्ट्रपति रह चुके हैं.
इस कॉलम में पढ़िए कि उस जनसंहार से पहले असम के एक पुलिसवाले के वायरलेस संदेश को किस तरह अनदेखा किया गया और कैसे हमें उसका सुराग मिला और कैसे हमने उसे ढूंढ निकाला.
खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.7% से बढ़कर जनवरी में 6.5% हो गई, जो मुख्य रूप से खाद्य कीमतों से प्रेरित थी, जबकि भारत की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में 2 साल के निचले स्तर 4.73% पर आ गई.
देश आजाद हुआ, तो खेती-किसानी के बुरे हाल के कारण देशवासियों के भरपेट भेजन का सवाल इतना जटिल था कि कोई भी केन्द्रीय मंत्री खाद्य मंत्रालय का प्रभार नहीं लेना चाहता था.
हार्वर्ड पेपर इस बारे में नहीं है कि कांग्रेस ने कब अपना नंबर वन का दर्जा खो दिया. यह इस बारे में है कि जब वे शीर्ष पर थे तो यह कैसा दिखता था और इसलिए बीजेपी को इस पर ध्यान देना चाहिए.
जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?