किसी मुख्यमंत्री ने कभी ऐसा नहीं किया जो शिवराज सिंह चौहान ने किया. सिंह ने इसे प्रशासनिक और सामाजिक-व्यक्तिगत गलती के तौर पर देखा और पीड़ित आदिवासी युवक दसमत रावत को बुलाकर उसके पैर धोए और माफी मांगी.
डेली सोप (धारावाहिकों) में बच्चों द्वारा पुलिस और डाकू की भूमिका निभाने में होने वाली शारीरिक हिंसा की तुलना मिर्ज़ापुर जैसे ओटीटी विशेष कार्यक्रमों में देखी जाती है.
नियंत्रण रेखा के पार होने वाले व्यापार को आम तौर पर सिर्फ आपसी भरोसा बढ़ाने वाले कदम के तौर पर देखा जाता है, लेकिन सरहदी इलाकों की छोटी अर्थव्यवस्था को इससे काफी फायदे होते हैं जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है.
निपुण भारत मिशन प्राथमिक स्तर पर शिक्षा प्रदान करने के लिए एक अभिन व दृष्टिकोण अपनाता है. यह एफ एल एन कौशल को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मिशन अधिगम के पांच क्षेत्रों पर ध्यान देगा.
होली पर एक सोशल मीडिया पोस्ट देश की नींव को कमज़ोर करने, इस्लाम को खतरे में डालने और सदियों पुराने सवाल को सामने लाने के लिए काफी था — क्या पाकिस्तान इसलिए बना था?
इतिहासकार शिहाबुद्दीन अल-उमरी ने 1296-1316 के बीच अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल का जिक्र करते हुए लिखते हैं, 'हजारों गुलामों की बिक्री के बिना कोई दिन नहीं जाता था.'
पीएम मोदी की हेलियोपोलिस यात्रा बोहरा और अहमदिया सहित मुसलमानों तक उनकी पहुंच को ध्यान में रखते हुए है. नोबेल पुरस्कार विजेता ओबामा, भारत को अकेला छोड़ दें.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.