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Sunday, 5 April, 2026
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कनाडा अपने निरंकुश मानवाधिकार मूल्यों से अंधा हो गया है, सिख कट्टरपंथी इसका प्रतिकार करेंगे

सिख प्रवासियों के बीच असंतोष पंजाब और भारत में अन्य जगहों पर नाजुक सांप्रदायिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

लोकतंत्र में आरक्षण के लिए समय सीमा नहीं, भागवत को पता होना चाहिए. RSS इसका विरोध करने वाला पहला नहीं है

बोलीविया में मोरालेस से लेकर वेनेज़ुएला में मादुरो और मिस्र में मोर्सी तक, नेताओं ने सकारात्मक कार्रवाई को हमेशा चुनौती देने की कोशिश की है और तबाही देखी है. RSS इससे एक या दो सबक ले सकता है.

चीनी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि खालिस्तान मुद्दे पर किसका समर्थन किया जाए: भारत का या कनाडा का

CCTV, फीनिक्स टेलीविजन और CGTN जैसे चीनी स्टेट कंट्रोल्ड मीडिया चैनलों ने अपने टीवी प्रसारणों पर इस तनाव को पूरा कवर किया है.

ट्रूडो के आरोपों के पीछे के रहस्य 5 आइज़ के पास छिपे हैं, भारत को अपनी कमजोरियों के बारे में चिंता करनी चाहिए

चीन या रूस द्वारा साइबर-जासूसी की सभी चर्चाओं के बावजूद, फ़ाइव आइज़ दुनिया का सबसे बड़ा ख़ुफ़िया जानकारी एकत्र करने वाला संगठन है, जिसमें सभी ग्लोबल कम्युनिकेशन को इकट्ठा करने की क्षमता है.

‘भागते भूत की लंगोटी भली’, सोचकर महिला आरक्षण का स्वागत कीजिए जो शायद 2039 में आपको मिलेगा

महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के नाम पर हमारे हाथ में आया है बेतरतीबी का नमूना बना एक ऐसा नक्शा जो इस बुनियादी सवाल का कोई जवाब ही नहीं देता कि आखिर हमारा हासिल क्या रहा.

आतंकी संगठनों के खिलाफ कनाडा दोहरे मापदंड अपनाता है, भारत और पश्चिम को इसे फॉलो करने की जरूरत नहीं

राजनीतिक रूप से कमजोर जस्टिन ट्रूडो कनाडा के आर्थिक लाभों का त्याग करने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने जल्दबाजी में गलती की है और जल्द ही संभावित राजनीतिक हार के बाद फुर्सत में पश्चाताप करेंगे.

परिसीमन के प्रभावों से बचाने के लिए सरकार पहले दक्षिण के राज्यों को आश्वस्त करे

उत्तर के ज्यादा आबादी वाले राज्यों को लोकसभा में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल जाएगा. उनकी जो सामाजिक-आर्थिक स्थितियां हैं उनके चलते एक नयी तरह की राजनीति शुरू हो सकती है, मसलन भाषा नीति के मामले में.

पंजाबी सिख गुस्से में हैं पर खालिस्तान से उनका लेना-देना नहीं, भारतीय होने पर उन्हें गर्व है

जब पंजाबी नाखुश होते हैं तो वे अपनी सरकार को वोट से हटा देते हैं. वे सत्ता परिवर्तन के लिए मदद मांगने किसी ट्रूडो या गुरपतवंत सिंह पन्नून के पास नहीं जाते.

मोदी के बिल में मेरे जैसी पसमांदा मुस्लिम महिलाओं के लिए जगह होनी चाहिए थी, हमें अपना प्रतिनिधित्व चाहिए

अगर पसमांदा पुरुष भी विधायी पदों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते हैं, तो संसद में पसमांदा महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और भी बड़ी चुनौती होगी.

ट्रूडो भारत में हुए अपमान का बदला चुकाना चाह रहे हैं, लेकिन वह इसकी जगह भांगड़ा कर सकते हैं

भारत, एक ऐसा देश जिसके पारंपरिक रूप से कनाडा के साथ अच्छे संबंध रहे हैं. लेकिन ट्रूडो के साथ यहां एक मौज-मस्ती करने वाले व्यक्ति और हमारे राष्ट्रीय हितों के दुश्मन की तरह क्यों व्यवहार किया जाता है?

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गोरखपुर (उप्र), पांच अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं को सतर्क करते हुए सोशल मीडिया...

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