scorecardresearch
Thursday, 5 March, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

LAC पर भारत के पास विकल्प सीमित हैं, मोदी को BRICS में मिले अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए

यदि मोदी और शी दोनों साहस दिखाते हैं, तो नई LAC के दोनों ओर 20 किमी के क्षेत्र को असैन्यीकृत क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव पर दोबारा काम किया जा सकता है.

कांग्रेस के पास 2024 के लिए तुरुप का पत्ता है, लेकिन राहुल को ‘क्या करें, क्या न करें’ से बाहर आना होगा

एक समय था जब कांग्रेस के अंदर के लोग कहते थे,'राहुल नहीं तो कौन?' खरगे के पार्टी की कमान संभालने के बाद से यह धारणा बदल रही है.

LAC पर चीन ‘विवादित’ सीमाओं का निपटारा नहीं कर रहा है और इसमें भारत भी शामिल है

G20 से पहले भारत को खुद को ऐसी स्थिति में डालने से सावधान रहना चाहिए जहां वह समय की दीवार के पीछे अपनी पीठ के साथ उत्तरी सीमा पर सफलता हासिल करना चाहता है.

चीन ने G20 से पहले 2 लक्ष्य पा लिए – BRICS का विस्तार और भारत को विश्वास दिलाना कि सब कुछ ‘सामान्य’ है

चीनी बयान द्विपक्षीय संबंधों से सीमा मुद्दे को अलग करने पर बीजिंग की स्थिति को दोहराता है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में तनाव की संभावना कभी नहीं थी.

कैसे एक ज़हर देने वाले की हैंडबुक ने पुतिन को सत्ता के शिखर पर पहुंचा दिया

पुतिन के पूरे राजनीतिक करियर में, दर्जनों शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों की मृत्यु हो चुकी है - परिस्थितियों के बारे में इतनी कम जानकारी थी कि रूसी अधिकारियों के लिए जांच के बहाने खुद को परेशान करना भी ठीक नहीं लगा.

अनएकेडमी से करन सांगवान की विदाई और सिर्फ पढ़े-लिखे नेता चुनने के लोकतंत्र के लिए मायने

बेशक करन सांगवान-अनअकादमी विवादों से सामने आए हैं, पर ऐसे विवाद आगे भी होते रहेंगे, इसलिए इसे एक परिघटना के तौर पर देखे जाने की जरूरत है.

‘मोदी हटाओ’ VS ‘अमृत काल’- 2024 में जीतने के लिए विपक्ष को क्यों आलोचना से कहीं ज्यादा करने की जरूरत

‘इंडिया’ ने कुछ बुनियादी बातों को समेटने की कोशिश की है लेकिन उसे यह साफ करना होगा कि मतदाता मोदी को हटाने के उसके लक्ष्य का समर्थन क्यों करें, और यह गठबंधन उनके लिए बेहतर दांव क्यों साबित हो सकता है.

BRICS का विस्तार हो चुका है, अब यह अमेरिका विरोधी गुट नहीं बन सकता. संतुलन बनाना भारत पर निर्भर है

BRICS को हमेशा पश्चिम को संतुलित करने के लिए स्थापित एक गुट के रूप में माना जाता था. लेकिन अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के जुड़ने के बाद खेल बिल्कुल बदल गया है.

मोदी, नेहरू के ‘ग्लोबल साउथ’ को वापस लाए हैं, लेकिन यह भूगोल, भू-राजनीति, अर्थशास्त्र पर खरा नहीं उतरता

ग्लोबल साउथ का विचार, जिसके मुताबिक भारत या इसके नेता, बाकी देशों के अगुआ बन सकते हैं. नरेंद्र मोदी इसके सबसे प्रमुख और ताकतवर ग्लोबल एम्बेसडर बनकर उभरे हैं.

अच्छी लोन ग्रोथ, पूंजी की आसान उपलब्धता- बैंकिंग सेक्टर की सफलता के पीछे का क्या है राज़

हालांकि, खुदरा क्षेत्र में घटते नेट इंट्रेस्ट मार्जिन और खराब ऋणों के रूप में तनाव के कुछ शुरुआती संकेत भी हैं जिन पर नजर रखने की आवश्यकता है.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव: संतीश नांदल ने निर्दलीय के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया

(कॉपी में आवश्यक सुधार के साथ रिपीट) चंडीगढ़, पांच मार्च (भाषा) वर्ष 2019 में हरियाणा विधानसभा के चुनाव में हार चुके सतीश नांदल ने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.