‘मेधावी’ लोगों के भाई-भतीजावादी आचरण की पड़ताल करने पर हमें पता चलता है कि कैसे उनकी आत्म-केंद्रित रणनीतियों से भारत की विविध जातियों और जनजातियों की वास्तविक योग्यता का अवमूल्यन हुआ है.
विभाजन के माहौल का सामना करते हुए, लोग पूछते हैं 'आज के भारत में मुसलमान होना कैसा लगता है?' लेकिन हमें यह भी पूछना चाहिए: 'आज के भारत में हिंदू होना कैसा लगता है?'
हरियाणा के गुरुग्राम में सांप्रदायिक हिंसा के बाद पुलिसकर्मियों को ऐसे मार्च करते देखा जा सकता है जैसे वे युद्ध करने जा रहे हों और कुछ ही दिन पहले आरपीएफ के एक जवान ने मुंबई-जयपुर ट्रेन में चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी.
आठ साल पहले, भारत की नयी सरकार ने जब नगालैंड में विद्रोह को हमेशा के लिए खत्म कर देने का फैसला किया तो उसने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ विद्रोह की बेताज नेत्री गैडिनलिउ के स्मारक का निर्माण करने की घोषणा की.
अपने तीसरे कार्यकाल में सभी के सपनों को पूरा करने का मोदी का वादा उनके भाजपा सहयोगियों के लिए एक संदेश है कि वे उनकी उम्र या 75 वर्ष की अलिखित सेवानिवृत्ति की आयु के बारे में ज्यादा न सोचें.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.