व्यवसायी वर्ग चाहता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार वापस आए लेकिन वह अल्पमत सरकार हो और गठबंधन के सहयोगियों की बैसाखी के सहारे हो, जो उसकी किसी ज्यादती पर लगाम कसे रहें.
यह कहना एक आलसी सरलीकरण होगा कि भारतीय राजनीति भाजपा-प्रेमी उत्तर भारत, और भाजपा- विरोधी दक्षिण में बंट चुकी है. 2024 का मुक़ाबला भाजपाई ‘हार्टलैंड’ बनाम परिधि वाले राज्यों का होगा.
आज बुद्धिजीवी लगातार हिंदू प्रधान भारत में हाशिये पर पड़े मुसलमानों की मार्मिक कहानियों की खोज में लगे हुए हैं. एक पसमांदा मुस्लिम के रूप में मेरा नज़रिया प्रमुख कहानी से काफी अलग है.
जब तक COP28 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन भारत द्वारा प्रस्तुत वैश्विक दृष्टिकोण को मान्यता नहीं देता, सार्वभौमिक समाधान और आम सहमति प्राप्त करना कठिन होगा.
आज कांग्रेस के पास कोई स्वाभाविक सहयोगी नहीं है, केवल दुश्मन हैं. लेकिन विपक्षी नेताओं के इंडिया एलायंस के तहत फिर से एकजुट होने के बाद भी, यह 2024 में बीजेपी को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.
एकबार फिर कांग्रेस अपना जनाधार बढ़ाने में नाकामयाब रही है जबकि भाजपा ने इसे बड़ी ही सफलता से निभाया है. हिंदुत्व का मुद्दा इसबार लगभग गायब ही रहा; भाजपा से सीधे मुक़ाबले के लिए कांग्रेस अभी भी तैयार नहीं.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और भारत...