लोकनीति-सीएसडीएस के पोस्ट पोल सर्वे के आंकड़ों के आधार पर हम साल 2023 के विधानसभा चुनावों को लेकर प्रचलित कुछ मिथकों की पोल-पट्टी खोलने और ये बता पाने की स्थिति में हैं कि कौन-कौन सी चीजें कारगर साबित नहीं हुईं और कांग्रेस को क्यों चिंता करनी चाहिए.
आर्थिक प्रतिबंधों का घातक असर इसलिए नहीं हुआ क्योंकि रूस को अपने तेल के लिए ग्राहक के रूप में चीन और भारत मिल गए, लेकिन ईरान सबूत है कि प्रतिबंधों का अंततः असर पड़ता ही है.
जिस शहर में लगभग किसी को कुछ भी निर्माण करने की इजाजत नहीं थी वहां डीडीए फ्लैट विशेषाधिकार जैसा ही था. आज वही डीडीए ख़रीदारों को ढूंढ रहा है जबकि उसके 40,000 से ज्यादा फ्लैट अनबिके पड़े हैं.
भारत के लिए मोदी का करिश्मा और दूरदर्शिता ही चुनाव के लिए एकमात्र जनादेश है. स्थानीय नेता सुविधाप्रदाता से ज्यादा कुछ बन नहीं पाते. उनके नाम पर वोट जीतने की उम्मीद नहीं की जाती है.
कई एंकर और जाने-माने टीवी समाचार रिपोर्टर अब वहां नहीं हैं जहां उन्हें होना चाहिए था — उन्होंने नई ज़िम्मेदारियां ले ली हैं और हमें अपना सिर खुजलाने के लिए छोड़ दिया है.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और भारत...