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Friday, 6 February, 2026
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कैसे खरगे कांग्रेस का पुनर्निर्माण कर रहे हैं, प्रशांत किशोर के 4M फॉर्मूला में मिलती है इसकी एक झलक

मल्लिकार्जुन खरगे ने 26 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर एक साल पूरा कर लिया. गैर-गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अपेक्षाकृत बेहतर दिख रही है.

अगर हम राजनीति में धन बल को रोक नहीं सकते, तो चुनावी खर्च की सीमा बांधने के पाखंड से क्यों न पिंड छुड़ा लें?

मुनुगोडे भारत में चुनावी राजनीति का भविष्य बन सकता है. दरअसल, जमीनी स्तर पर राजनीति अब `साइड बिजनेस` के रूप में हो रही है..

गाज़ा की इस्लामी लहर भारत में जिहादवाद को बढ़ावा दे सकती है— ‘सिल्क लेटर मूवमेंट’ को नहीं भूलना चाहिए

हजारों किलोमीटर दूर की घटनाओं से प्रेरित भारतीय जिहादी लामबंदी की हर पिछली लहर को तब तक नजरअंदाज किया गया जब तक कि घर पर बमबारी शुरू नहीं हो गई.

जगह-जगह मोदी सेल्फी प्वाइंट बनाने का रक्षा मंत्रालय का निर्देश खतरे की घंटी है  

‘एसओपी’ ने सिफ़ारिश की है कि इन ‘सेल्फी प्वाइंट’ पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर लगाई ‘जा सकती है’. ‘सकती है’ जैसे शब्द का इस्तेमाल विवादास्पद निर्देशों की ज़िम्मेदारी उनका पालन करने वालों पर डालने की पुरानी चाल रही है

भारत को कैसे त्वचा और बाल के इलाज के लिए अगला मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है?

पंजीकृत क्लीनिकों और चिकित्सा संस्थानों को सरकार के साथ गठजोड़ करना चाहिए और यात्रा और आवास की व्यवस्था करने की दिशा में काम करना चाहिए.

महंगाई का 4 फीसदी का लक्ष्य जब चार साल में पूरा न किया जा सका तो उसे फिर क्यों दोहराएं

भू-राजनीतिक टकराव और नये शीतयुद्ध ने तेल के बाजार, खाद्य तथा दूसरी सामग्री के बाज़ारों को उलट-पुलट दिया है. जलवायु परिवर्तन अलग तरह की कीमतें थोप रहा है. इसलिए, मांग भले कमजोर हो, कीमतें बढ़ेंगी.

वकार यूनुस, शोएब अख्तर से लेकर रिजवान तक- पाकिस्तानी क्रिकेटर मैदान पर धर्म को लाते हैं, भारत नहीं

इस तथ्य की अनदेखी की गई कि मोहम्मद रिज़वान को अक्सर क्रिकेट के मैदान में नमाज पढ़ते हुए देखा जाता है.

इज़रायल गुस्से में है, नेतन्याहू गाज़ा को मिट्टी में मिलाने को तैयार हैं, पर फौजी ताकत की भी कुछ सीमाएं हैं

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का इतिहास और इजरायल के अनुभव यही सिखाते हैं कि आपकी सेना चाहे कितनी भी ताकतवर हो, राजनीतिक और रणनीतिक मकसद हासिल करने में वह शायद ही मददगार होती है.

वसीम अकरम जातिवादी गाली दे पा रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान में न आंबेडकर हुए, न मायावती

पाकिस्तान का समाज, भारत, बांग्लादेश और नेपाल की तरह ही जन्म आधारित जातियों और बिरादरियों में बंटा है, जिनके बीच ऊंच और नीच की एक स्थापित व्यवस्था है.

पूजा पंडालों में बंगाली अगर मटन रोल खाते हैं तो उनके लिए अच्छा है, हिंदू धर्म का तालिबानीकरण बंद करें

पश्चिम बंगाल में मांसाहारी भोजन का सेवन कोई बड़ी बात नहीं है. जहां तक बोंग्स की बात है तो यह सिर्फ खाना है और वे इसे पसंद करते हैं.

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बीआरएस विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए विस अध्यक्ष को आखिरी मौका

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को अंतिम मौका देते हुए शुक्रवार को कहा कि यदि वह (अध्यक्ष) कांग्रेस...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.