सितंबर में 85 लाख रोजगार बढ़े, जो मार्च 2020 के कोविड कहर के बाद का अधिकतम आंकड़ा है. मुद्रास्फीति घटी है, निर्यात बढ़ा है और 100 करोड़ लोगों का टीकाकरण एक बड़ी उपलब्धि है.
मॉनसून खत्म होने के साथ कोयले की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन बेहतर नियोजन और आपूर्ति में सुधार से भविष्य में बेहतर इंतजाम करने में मदद मिलेगी.
रिजर्व बैंक ने श्री इन्फ्रा फाइनांस और श्री ईक्विपमेंट फाइनांस के बोर्ड को बरखास्त कर दिया है और उनके दिवालिया घोषित करने प्रक्रिया आइबीसी के जैसी हो सकती है.
शादियों और त्योहारों के मौसम में बढ़ने वाली मांग और ऊंची मुद्रास्फीति सोने के आयात को बढ़ावा दे रही है. बचत पर ब्याज दरों में गिरावट और इक्विटी मार्केट की समस्याएं इसमें और वृद्धि ला सकती है.
वित्त वर्ष’22 की पहली तिमाही में 20.1 फीसदी ग्रोथ मुख्यतः ‘बेस इफेक्ट’ के कारण रही. लेकिन मजबूत वृद्धि के लिए विनिवेश तथा बैंक निजीकरण जैसे संरचानात्मक सुधार जरूरी हैं.
चीन द्वारा खाली की गई जगह भरने की कोशिश में जुटे वियतनाम जैसे देशों से होड़ लेने के लिए भारत को अपनी नियमन व्यवस्था और कानून के शासन में स्थिरता लाने की जरूरत है.
मुद्रास्फीति में नरमी और आर्थिक वृद्धि में तेजी के कुछ शुरुआती संकेत हैं. लेकिन लगता है कि रिजर्व बैंक अभी इन पर नज़र रखने के बाद ही दरों पर कोई फैसला करेगा.
बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्या गलत हो गया है? कई मुख्यमंत्रियों की ढीली-ढाली सरकार इस सोच से निकलती है कि चुनावी जीत तीन ‘एम’ की वजह से मिली—मोदी, बहुसंख्यकवाद और पैसा.
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ (सीपीसी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय...